Wednesday , October 28 2020

रघुराम राजन ने फिर चेताया, साजिश में जुटीं ‘बड़ी मछलियां’

मुंबई

रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन का कहना है कि डिफॉल्ट कर चुकी कंपनियों के कुछ प्रमोटर्स अब भी सिस्टम की खामियों का फायदा उठाने की कोशिश में लगे हैं। राजन ने इसके साथ ही यह भी कहा कि जूडिशरी को डिफॉल्टरों की खोखली दलीलों वाली अपीलों को बढ़ावा देने से बचना चाहिए।

राजन ने संसदीय समिति के नाम पत्र में लिखा है, ‘बड़े कॉरपोरेट्स विवादास्पद और कभी-कभार फर्जी अपील के जरिए बैंकरप्सी कोड के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। उच्चतर न्यायालयों को ऐसे मामलों में नियमित रूप से दखल देने के लोभ से बचना चाहिए। मामले से जुड़े बिंदुओं की व्याख्या हो जाने के बाद उनमें अपील पर अंकुश लगाया जाना चाहिए।’

फॉर्मर आरबीआई गवर्नर का यह बयान तब आया है, जब कई पावर प्रड्यूसर्स बैंकिंग रेग्युलेटर की तरफ से 12 फरवरी को जारी सर्कुलर पर रोक लगवाने की कोशिश कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इस सर्कुलर पर एक तरह से स्टे लगा दिया है। आरबीआई के पूर्व गवर्नर ने यह बात भी उठाई है कि कैसे कुछ प्रमोटर्स भारी भरकम लोन के चलते डिफॉल्ट हो चुके अपनी असेट्स को बैकडोर से खरीदने के रास्ते तलाशने में जुटे हैं।

राजन ने कहा, ‘जब तक बैंकरप्सी कोड लागू नहीं हुआ था, तब तक प्रमोटर्स को कभी ऐसा नहीं लगा कि कंपनी उनके हाथ से निकल भी सकती है। कोड लागू होने के बाद भी कुछ प्रमोटर प्रॉक्सी बिडर के जरिए सस्ते दाम पर अपनी कंपनी का कंट्रोल वापस हासिल करने के लिए प्रोसेस से खिलवाड़ करने की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए बहुत से प्रमोटर्स बैंकों के साथ गंभीरता से बात नहीं कर रहे हैं।’

सबसे बड़ी लोन डिफॉल्टर कंपनियों में शामिल एस्सार स्टील का नाम बैंकरप्सी कोड के हिसाब से लोन डिफॉल्ट मामले के निपटारे के लिए जून 2017 में आरबीआई की तरफ से जारी लिस्ट में आया था। इसमें अब तक सेटलमेंट नहीं हो पाया है और मामला खिंचता ही चला जा रहा है।

नैशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल ने हाल में कहा था कि रूसी बैंक की अगुआई वाला कंसोर्शियम न्यूमेटल और आर्सेलरमित्तल, दोनों एस्सार स्टील के लिए बिड कर सकते हैं। कंसोर्शियम में पहले एस्सार स्टील का मालिकाना हक रखने वाला रुइया परिवार भी शामिल था, लेकिन उसे ग्रुप से निकाल दिया गया। आर्सेलरमित्तल को उसकी दूसरी कंपनियों के डिफॉल्टर होने के चलते बिड के अयोग्य करार दिया गया था। मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। राजन ने कहा कि इन मामलों में कुछ हद तक रेग्युलेटर भी जिम्मेदार है, जिसने स्ट्रॉन्ग बैंकरप्सी लॉ नहीं होने के चलते कुछ रीस्ट्रक्चरिंग स्कीमों की इजाजत दी थी।

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