Thursday , September 24 2020

रिजर्व बैंक पर कड़ी निगरानी चाहती है सरकार, बढ़ सकता है तनाव

नई दिल्ली

सरकार और RBI के बीच गतिरोध लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। रिजर्व बैंक पर निगरानी बढ़ाने के लिए सरकार ने कुछ नियमों में बदलाव का प्रस्ताव दिया है। मामले के जानकार लोगों को कहना है कि इससे दुनिया की सबसे तेज बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था पर निवेशकों का विश्वास कमजोर हो सकता है। मोदी सरकार ने RBI बोर्ड को निर्देश दिए हैं कि फाइनैंशल स्टेबिलिटी, मॉनेटरी पॉलिसी और फॉरन एक्सचेंज मैनेजमेंट पर निगरानी के लिए एक पैनल बनाया जाए।

सरकार के इस कदम से बोर्ड की शक्तियां बढ़ेंगी। बता दें कि बोर्ड में सरकार द्वारा नामित सदस्य भी होते हैं और वह निगरानी का काम करते हैं। सोमवार को RBI बोर्ड की बैठक होने वाली है। केंद्रीय बैंक और सरकार के बीच झगड़े की स्थिति यूएस और तुर्की जैसे देशों में भी बन चुकी है।

सोमवार को होने वाली बैठक में सरप्लस फंड, बैड लोन के नियमों में ढील देने जैसे विषयों पर चर्चा हो सकती है। हालांकि सरकार का कहना है कि रिजर्व बैंक विकास में सहयोग नहीं दे रहा है। RBI का कहना है कि सरप्लस फंड ट्रांसफर से उसकी स्वतंत्रता कमजोर होगी और बाजार पर भी बुरा असर पड़ेगा।

सरकार के प्रस्ताव में बोर्ड के सदस्यों की कई कमिटियां बनाने की बात कही गई है। आरबीआई ऐक्ट 1934 के मुताबिक, केंद्रीय बैंक के पास नियम बनाने का अधिकार है और इसमें संवैधानिक बदलाव की जरूरत नहीं है। RBI बोर्ड के सदस्य अपनी राय दे सकते हैं लेकिन फैसला लेना गवर्नर और उनके सहयोगियों का अधिकार होता है।

बोर्ड में मोदी सरकार द्वारा नामित सदस्य एस गुरुमूर्ति ने रिजर्व बैंक के आरक्षित भंडारण के नियम में बदलाव की वकालत की थी। उन्होंने कहा था कि आरबीआई के पास 9.6 करोड़ रुपये का आरक्षित भंडार है और दुनिया के किसी भी केंद्रीय बैंक के पास इतना आरक्षित भंडार नहीं है। गुरुमूर्ति ने कहा कि भारत में निर्धारित पूंजी पर्याप्तता अनुपात एक प्रतिशत है जो बेसल के वैश्विक नियम से ज्यादा है। उन्होंने छोटे एवं मंझोले उद्योगों के लिए कर्ज नियमों को आसान बनाने की भी वकालत की जो देश की जीडीपी का 50 प्रतिशत है।

आरबीआई और वित्त मंत्रालय के बीच विवाद शुरू होने के बाद सार्वजनिक तौर पर पहली बार टिप्पणी करते हुए गुरुमूर्ति ने कहा कि यह गतिरोध अच्छी बात नहीं है। आरबीआई के बोर्ड की बैठक सोमवार को होनी है जिसमें पीसीए के नियमों को सरल करना, आरक्षित भंडारण को कम करने और एमएसएमई को ऋण बढ़ाने समेत सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

आरबीआई के पूंजी ढांचे के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि आरबीआई के पास 27-28 प्रतिशित का आरक्षित भंडार है जो रुपये के मूल्य में आई हालिया गिरावट के कारण और बढ़ सकता है। उन्होंने कहा था, ‘आप यह नहीं कह सकते हैं कि इसके पास बहुत आरक्षित भंडार है और वे धन मुझे दें दें। मेरे ख्याल से सरकार भी यह नहीं कह रही है। जहां तक मेरी समझ है सरकार एक नीति बनाने के लिए कह रही है कि केंद्रीय बैंक के पास कितना आरक्षित भंडार होना चाहिए। अधिकतर केंद्रीय बैंकों के पास इतना आरक्षित भंडार नहीं होता है जिनता आरबीआई के पास है।’

सरकार ने पिछले महीने केंद्रीय बैंक को असहमति वाले मुद्दों पर बात करने का लिखित निर्देश दिया है। सरकार ने आरबीआई ऐक्ट के सेक्शन 7 का इस्तेमाल किया है जो कि 83 साल के इतिहास में कभी नहीं किया गया।

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