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व्यापम घोटाला: मुख्य आरोपी की डायरी में ‘मामाजी’ का जिक्र, कांग्रेस हमलावर

भोपाल

मध्य प्रदेश के चर्चित व्यापम घोटाले के मुख्य आरोपी डॉक्टर जगदीश सागर की डायरी ने शिवराज सरकार को एक बार फिर मुश्किल में डाल दिया है। सागर की डायरी में दर्ज ब्यौरे से पता चला है कि उसने व्यापम ही नहीं मध्यप्रदेश लोकसेवा आयोग से राज्य सेवा का अफसर बनवाने के लिये भी सौदे किए थे। उसने 6 पदों के लिए 95 लाख में सौदे किए थे। डायरी में ‘मामाजी’ और ‘वीआईपी’ जैसे शब्द भी लिखे हैं। इसी वजह से कांग्रेस ने एमपी-पीएससी की परीक्षाओं की भी जांच कराने की मांग की है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा, ‘एमपी-पीएससी में फर्जीवाड़े के मामले 5 साल पहले भी सामने आए थे। अब मुख्य आरोपी की डायरी के जो तथ्य सामने आए हैं वे बहुत गंभीर हैं। पूरा प्रदेश जानता है कि मामा कौन है। इन तथ्यों से यह साफ है कि राज्य सरकार के काडरवाले पदों के सौदे हुए हैं। यह बहुत गंभीर मामला है। इस मामले की जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए ताकि सच सामने आ सके।’

सीबीआई और एसटीएफ कर रहे हैं जांच
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश के बहुचर्चित व्यापम घोटाले की जांच सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई कर रही है। इस जांच की शुरुआत राज्य की एसटीएफ ने की थी। एसटीएफ ने ही मुख्य दलाल इंदौर के डॉक्टर जगदीश सागर को गिरफ्तार किया था। सीबीआई और एसटीएफ की जांच सिर्फ व्यापम द्वारा कराई गई पीएमटी और प्री पीजी परीक्षाओं तक सीमित है। वैसे एसटीएफ ने व्यापम द्वारा कराई गई अन्य परीक्षाओं की भी जांच की थी, उसने तत्कालीन राज्यपाल रामनरेश यादव और उनके ओएसडी के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया था। शिवराज सरकार में मंत्री रहे लक्ष्मीकांत शर्मा को भी गिरफ्तार किया गया था। तब कांग्रेस ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और उनके परिजनों पर भी आरोप लगाए थे लेकिन सीबीआई ने उन्हें आरोपी नहीं बनाया है। मध्यप्रदेश के कई निजी मेडिकल कॉलेज मालिक और उनके अधिकारी भी जेल भेजे गए थे।

डॉक्टर सागर को इस घोटाले का मास्टरमाइंड माना गया है, वह अभी भी जेल में ही है। एसटीएफ ने डॉक्टर सागर के कई ठिकानों पर छापे मारे थे, उसके यहां जो दस्तावेज मिले थे, उनमें एक डायरी में 70 पन्नों पर व्यापम का हिसाब लिखा हुआ था। सागर ने मेडिकल कालेजों में ही नहीं कई अन्य विभागों में भी सौदे करके भर्तियां कराई थीं। उसी डायरी में एमपी-पीएससी की भर्तियों का जिक्र है, इसके साथ ही मामाजी और वीआईपी जैसे शब्द भी लिखे हुए हैं।

पांच साल पहले खुला था मामला
गौरतलब है कि पांच साल पहले इस बात के संकेत मिले थे कि एमपी-पीएससी की भर्तियों में घोटाला किया जा रहा है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 2013 में चार ऐसे लोगों को पकड़ा था, जो पैसे लेकर विभिन्न राज्यों में परीक्षाएं पास कराते थे। उन्होंने एमपी-पीएससी का भी जिक्र किया था, तब एसटीएफ ने उन चारों से भी पूछताछ की थी। एसटीएफ ने तब पीएससी से 2012 की परीक्षा सूची और अन्य जानकारी भी मांगी थी लेकिन बाद में व्यापम के चक्कर में पीएससी की तरफ से ध्यान हट गया था। कांग्रेस के आरोप पर शिवराज ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी लेकिन बीजेपी ने इसे बेबुनियाद बताया है।

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