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व्‍यापम: दिग्विजय के केस पर शिवराज की चुप्‍पी, उमा ने दिया जवाब

भोपाल

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले मध्य प्रदेश में व्यापम का जिन्न एक बार फिर बोतल के बाहर आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता दिग्वजिय सिंह ने 27 हजार पन्नों का दस्तावेज विशेष अदालत में पेश करके मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के साथ-साथ केंद्रीय मंत्री उमा भारती को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। हालांकि, इस पूरे मामले में जहां शिवराज चुप्पी साधे हुए हैं वहीं केंद्रीय मंत्री उमा भारती ट्विटर के जरिए मैदान में कूद गई हैं।

दिग्विजय के वकील बनकर आए कपिल सिब्बल की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद उमा ने एक के बाद एक कई ट्वीट किए। उमा ने लिखा, ‘मुझे पता चला है कि दिग्विजय सिंह व्यापम की नए तरीके से जांच करवाने का प्रयास कर रहे हैं। मैं स्वयं यह जानने के लिये बेचैन हूं कि 2014 में मेरा नाम इसके साथ कैसे जुड़ गया, जो भी इस असलियत को सामने लाएगा वह मुझे भी बहुत बड़ी राहत देगा।’

उमा भारती ने किया यह ट्वीट
उमा भारती ने कहा, ‘यह रहस्य खुल जाए कि व्यापम की जड़ें कहां तक थीं तो मुझे बहुत खुशी होगी क्योंकि 6 दिसंबर 2013 को मैंने खुद इस घोटाले को घिनौना बताते हुए सीबीआई जांच का सुझाव दिया था।’ उमा के मुताबिक, इस घोटाले की प्राथमिक जांच तो इंदौर पुलिस ने की थी। एसटीएफ और सीबीआई तो बाद में जांच से जुड़ी। उमा भारती ने अपने ट्वीट में कथित सेंट किट्स घोटाले का भी जिक्र किया है।

सूत्रों के मुताबिक जिस एक्सेल शीट के आधार पर व्यापम घोटाले की जड़ पड़ी थी उसमें उमा का भी नाम था। आरोप है कि उन्होंने भी सरकारी भर्ती के लिए दो लोगों की सिफारिश की थी। इस घोटाले में जेल जाने वाले तत्कालीन मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा उमा भारती के भी करीबी रहे थे। यह सर्वविदित है कि उमा भारती और शिवराज सिंह चौहान के बीच छत्तीस का आंकड़ा है। माना जाता है कि शिवराज की वजह से ही उमा भारती पहले बीजेपी फिर मध्यप्रदेश से बाहर हुई थीं। काफी मशक्कत के बाद उत्तर प्रदेश के जरिये वह मुख्यधारा में लौट पाई हैं।

विधानसभा चुनाव के दौरान वह दिग्विजय की आड़ में इस मुद्दे को हवा देना चाहती हैं। बता दें कि दिग्विजय ने उमा पर भी मानहानि का एक मुकदमा कर रखा है। 2003 में उमा भारती ने दिग्विजय पर 15000 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया था । 15 साल में वह अपने आरोपों का एक भी सबूत अदालत में पेश नही कर पाई हैं। वह दिग्विजय से मुकदमा वापसी की मनुहार भी करती रही हैं लेकिन दिग्विजय लिखित माफीनामा चाहते हैं, जिसकी वजह से मामला फंसा हुआ है।

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