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शत्रु संपत्ति को बेचकर सरकार यूं कमाएगी पैसे, जानें क्या होगा फायदा

नई दिल्ली

सरकार ने शत्रु संपत्ति के शेयर्स बेचने को लेकर बड़ा फैसला किया है। गुरुवार को सरकार ने शत्रु संपत्ति की बिक्री के लिए तय प्रक्रिया और कार्यप्रणाली को मंजूरी दे दी, जिसकी मौजूदा बाजार कीमत करीब 3,000 करोड़ रुपये है। कस्टोडियन के पास पड़ी शत्रु संपत्ति के शेयर्स बेचने से सरकार को कमाई तो होगी ही, इसके साथ ही उसका विनिवेश लक्ष्य भी पूरा होगा। कैबिनेट की बैठक के बाद कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पत्रकारों को फैसले की जानकारी दी।

आपको बता दें कि शत्रु संपत्ति अधिनियम, 1968 के अनुसार शत्रु संपत्ति का मतलब उस संपत्ति से है, जिसका मालिकाना हक या प्रबंधन ऐसे लोगों के पास था, जो बंटवारे के समय भारत से चले गए थे। सरकार का यह फैसला काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि अब दशकों से बेकार पड़ी शत्रु संपत्ति को बेचा जा सकेगा।

शत्रु संपत्ति को लेकर सरकार ने हाल ही में एक कानून बनाया है। हालांकि मौजूदा प्रस्ताव शेयर्स को लेकर है और ऐसी बड़ी संपत्तियों में से एक का मालिकाना हक लखनऊ में राजा महमूदाबाद के पास था। उनके उत्तराधिकारियों ने इस कदम को आगे बढ़ाया।

20,323 शेयरधारकों के 996 कंपनियों में कुल 6,50,75,877 शेयर सीईपीआई (कस्टोडियन ऑफ एनिमी प्रॉपर्टी ऑफ इंडिया) के कब्जे में है। इनमें से 588 ही फंक्शनल या ऐक्टिव कंपनियां हैं। एक आधिकारिक बयान में बताया गया कि इन 996 कंपनियों में से 588 सक्रिय, 139 कंपनियां सूचीबद्ध हैं और शेष कंपनियां गैरसूचीबद्ध हैं। आपको बता दें कि मौजूदा कानून विपक्ष की आपत्ति के बाद संसद में लटक गया था और इसे अध्यादेश के तौर पर आगे बढ़ाया गया।

एक और टारगेट पूरा होगा
प्रसाद ने कहा, ‘दशकों से निष्क्रिय पड़ी शत्रु चल संपत्ति को अब बेचा जा सकेगा। सेल से हुई आय का इस्तेमाल कल्याण कार्यक्रमों में होगा।’ सरकार के इस कदम से केंद्र के विनिवेश प्रोग्राम को बढ़ावा मिलेगा, जो इस साल अब तक सुस्त रहा है जबकि इसका लक्ष्य 80,000 करोड़ रुपये है। इस वित्त वर्ष में 7 महीने पहले ही पूरे हो चुके हैं और सरकार अबतक 10,000 करोड़ रुपये ही जुटा सकी है। अब सरकार टारगेट को पूरा करने के लिए बायबैक पर ध्यान दे रही है, जो कुल वित्तीय घाटे के टारगेट को बरकरार रखने के लिए महत्वपूर्ण है।

शत्रु संपत्ति के शेयर्स की बिक्री से मिले धन का इस्‍तेमाल विकास और समाज कल्‍याण के कार्यक्रमों में किया जा सकता है। सरकार की ओर से जारी बयान के अनुसार, इस प्रकार की संपत्ति की बिक्री से प्राप्त राशि उसी रूप से रखी जाएगी जैसा कि विनिवेश राशि के मामले में होता है। इसकी देखरेख वित्त मंत्रालय करता है। निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम या DIPAM) को शेयरों की बिक्री के लिए अधिकृत किया गया है।

क्या है प्रक्रिया?
इन शेयरों को बेचने की प्रक्रिया के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग तथा गृहमंत्री को शामिल करके वित्त मंत्री की अध्यक्षता वाली वैकल्पिक कार्यप्रणाली (एएम) से मंजूरी प्राप्त करनी होती है। इस कार्यप्रणाली की सहायता अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय समिति करेगी जिसके सह-अध्यक्ष दीपम विभाग के सचिव और गृह मंत्रालय के सचिव (आर्थिक मामलों के विभाग, डीएलए, कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय और सीईपीआई के प्रतिनिधियों सहित) होंगे।

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