सबरीमाला: RSS का यू-टर्न, कहा- सरकार ने भक्तों की भावनाओं को किया नज़रअंदाज़

नई दिल्ली

केरल के सबरीमाला मंदिर में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आएएसएस) ने अपना रुख बदल लिया है. आरएसएस ने बुधवार को केरल सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि उसने ‘भक्तों की भावनाओं को ध्यान में रखे बिना’ तुरंत ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू कर दिया. आरएसएस महासचिव भैयाजी जोशी ने कहा कि संघ सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करता है, लेकिन महिलाओं सहित लाखों श्रद्धालुओं की भावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है.

सुप्रीम कोर्ट फैसले के खिलाफ मंगलवार से जारी कई हिंदू संगठनों के विरोध प्रदर्शन का समर्थन करते हुए जोशी ने कहा कि यह ‘परंपरा के बलपूर्वक तोड़ने’ के खिलाफ एक स्पष्ट प्रतिक्रिया थी. उन्होंने आध्यात्मिक और सामाजिक नेताओं से अपील की कि सभी लोग साथ आएं और इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ न्यायिक सहित सभी विकल्पों पर विचार करें.

बता दें कि जोशी का ये बयान उनके 2016 में दिए गए बयान से बिल्कुल उलट है. दो साल पहले उन्होंने एक टीवी इंटरव्यू में कहा था कि हज़ारों साल से चली आ रही परंपरा के नाम पर सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को रोकने का कोई तुक नहीं बनता. ‘आरएसएस चाहता है कि पुरुषों की तरह महिलाओं को भी मंदिर में समान रूप से प्रवेश मिले.’

आरएसएस के इस स्टैंड का तब संघ और बीजेपी की केरल इकाइयों ने खंडन किया था. उन्होंने खुद को परंपरा के रक्षक के रूप में प्रस्तुत किया था, जिन्हें कि शीर्ष अदालत ने असंवैधानिक करार दिया गया है. बता दें कि केरल सरकार ने बुधवार को कहा था कि वह जल्द ही आने वाली तीर्थयात्रा के समय इस फैसले को लागू करेगी.

28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर के दरवाजे सभी आयु वर्ग की महिलाओं के लिए खोल दिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने 10 से 50 साल आयु वर्ग की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर लगे बैन को हटाने का आदेश दिया था। सर्वोच्च अदालत ने शताब्दियों पुरानी इस धार्मिक परंपरा को असंवैधानिक बताकर खारिज कर दिया था।

संघ की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि हालांकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान होना चाहिए, लेकिन संघ सभी पक्षों, धार्मिक और सामुदायिक नेताओं को साथ आने की अपील करता है। इसमें सभी पक्षों से न्यायिक सहित सभी विकल्पों से इस मुद्दे पर गौर करने को कहा गया है।

संघ ने अपने बयान में इस बात पर जोर दिया है कि यह एक स्थानीय मंदिर की परंपरा का मामला है जिससे महिलाओं समेत लाखों श्रद्धालुओं की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। संघ ने फैसले को ध्यान में रखते हुए इस बात को रेखांकित किया है कि श्रद्धालुओं की भावनाओं को दरकिनार नहीं किया जा सकता है। भैयाजी जोशी ने कहा कि जबरन परंपरा तोड़ने के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे श्रद्धालुओं खासकर महिलाओं की प्रतिक्रिया सहज है।

संघ ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को त्वरित रूप से लागू कराने के वाम सरकार के फैसले को अफसोसजनक बताया है। भैयाजी जोशी ने कहा कि अफसोसजनक है कि श्रद्धालुओं की भावनाओं को ध्यान में रखे बिना केरल सरकार ने तत्काल प्रभाव से इस फैसले को लागू करने का कदम उठाया है।

सबरीमाला हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण मंदिर है। हर साल यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। भगवान अयप्पा का यह मंदिर साल में केवल 4 महीनों के लिए खुलता है। पंपा नदी पर बेस कैंप से 5 किमी के जंगली रास्ते से होकर मंदिर तक जाना पड़ता है। अयप्पा धर्म सेना के प्रेजिडेंट ने इससे पहले कहा था कि फैसले के खिलाफ रिव्यू याचिका दाखिल की जाएगी।

उन्होंने कहा था कि सबरीमाला मंदिर 16 अक्टूबर तक बंद होगा, हमारे पास अभी समय है। वहीं मंदिर के तंत्री कंदारारु राजीववारु ने फैसले को ‘निराशाजनक’ बताया था, लेकिन साथ में यह भी कहा था कि प्रबंधन ने इसे स्वीकार कर लिया।

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