Wednesday , September 23 2020

2019: इस ‘वोट बैंक’ पर है PM मोदी की नजर

नई दिल्ली

लोकसभा ने रेप्रिजेंटेशन ऑफ द पीपल (अमेंडमेंट) बिल, 2017 पर मुहर लगा दी है। इस बिल में एनआरआई (प्रवासी भारतीयों) को वोट देने की मंजूरी दी गई है। वोटर लिस्ट में शामिल एनआरआई अपने चुनाव क्षेत्र में किसी को अपनी तरफ से वोट देने के लिए अधिकृत कर सकता है। इस तरह प्रधानमंत्री मोदी की निगाह एक करोड़ से ऊपर एनआरआई वोटों पर है। बिल को लोकसभा की मंजूरी मिली है। दोनों सदनों से पास होने और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह बिल कानून की शक्ल ले लेगा।

मोदी की नजर ‘NRI वोटबैंक’ पर
देश के कुल 543 लोकसभा क्षेत्रों में करीब 1.1 करोड़ एनआरआई वोट हैं। इसका मतलब है कि हर लोकसभा क्षेत्र में औसतन 21,000 वोट। अगर ये वोट एकमुश्त किसी के खाते में जाते हैं तो चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं। ये एनआरआई भारत में अपने परिवार को भी प्रभावित कर सकते हैं। मान लीजिए कि एक परिवार में औसतन 3 वोटर ही हों तो इसका मतलब है कि हर लोकसभा क्षेत्र में औसतन 60 हजार से ज्यादा ऐसे वोट होंगे, जिन पर सीधे-सीधे एनआरआई का प्रभाव होगा। आजकल जिस तरह हर चुनावों में जीत का अंतर घटता जा रहा है, उसके मद्देनजर वोटरों का यह आंकड़ा बहुत हद तक निर्णायक भी साबित हो सकता है।

बतौर पीएम एनआरआई से संवाद में मोदी आगे
प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी 54 से ज्यादा देशों का दौरा कर चुके हैं। उन्होंने जिन देशों का दौरा किया है, उन देशों में करीब एक करोड़ एनआरआई रहते हैं। प्रधानमंत्री मोदी अपने विदेश दौरों में अकसर एनआरआई को संबोधित करते हैं। जिन देशों में बड़ी तादाद में एनआरआई मौजूद हैं, वहां प्रधानमंत्री अपने मेगा शो करते आए हैं। उनके विदेश दौरों को लेकर संबंधित देशों में रह रहे एनआरआई और भारतीय मूल के लोगों में भी काफी क्रेज देखा जाता रहा है।

मोदी ने अमेरिका में न्यू यॉर्क से लेकर, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया समेत तमाम देशों में प्रवासी भारतीयों और भारतीय मूल के लोगों को संबोधित किया है। पिछले महीने 3 अफ्रीकी देशों के अपने दौरे के दरम्यान भी उन्होंने भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित किया। खाड़ी देशों में बड़ी तादाद में भारतीय रहते हैं और पीएम जब भी खाड़ी देशों के दौरे पर गए तो भारतीय समुदाय को संबोधित करना नहीं भूले। विदेशों में भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी इस बात पर विशेष जोर देते रहे हैं कि विश्व समुदाय में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है और कभी सांप-सपेरों के देश की छवि वाला भारत आज विश्व पटल पर सॉफ्ट पावर के तौर पर उभरा है।

प्रधानमंत्री मोदी विदेशों में एनआरआई को संबोधित करते हुए राष्ट्रवाद और भारतीय अस्मिता का कार्ड खेलते हैं जो उन्हें सीधे कनेक्ट करता है। खास बात यह है कि इस समुदाय के बीच दमदार तरीके से अपनी बात रखने वाले वह इकलौते भारतीय नेता हैं और प्रधानमंत्री होना निश्चित तौर पर उनके पक्ष में जाता है। प्रधानमंत्री मोदी के विदेशों में कार्यक्रमों की काट के लिए बाद में कांग्रेस ने भी रणनीति बनाई। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी कुछ जगहों पर भारतीय समुदाय के लोगों से रूबरू हुए। लेकिन इस मामले में मोदी से वह बहुत पीछे हैं।

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