Sunday , October 25 2020

‘FB पर आतंक की परिभाषा से दब रही आवाज’: संयुक्त राष्ट्र

जीनिवा

संयुक्त राष्ट्र की एक विशेषज्ञ ने सोमवार को कहा कि फेसबुक की आतंकवाद की परिभाषा कुछ ज्यादा ही व्यापक है जिससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक और इसकी सेवाओं तक पहुंच से मनमाने ढंग से इनकार का जोखिम बढ़ता है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के समय मानवाधिकारों की रक्षा और इन्हें बढ़ावा देने से जुड़े मामलों की संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत फिओनुआला नी एओलैन ने फेसबुक के प्रमुख मार्क जकरबर्ग को पत्र लिखकर आतंकवादियों को फेसबुक मंच का इस्तेमाल करने से रोकने के कंपनी के प्रयासों के बारे में चिंता जताई है।

उन्होंने आगाह किया कि आतंकवाद की फेसबुक की व्यापक और अनिश्चित परिभाषा के इस्तेमाल से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक और फेसबुक सेवाओं तक पहुंच से मनमाने ढंग से इनकार करने का जोखिम बढ़ता है। फेसबुक की नीतियां आतंकवादियों को इसकी सेवाओं के इस्तेमाल से रोकती हैं। फेसबुक टेकनॉलजी का सहारा लेता है और इसके विशेषज्ञों की टीम किसी भी आपत्तिजनक सामग्री का पता लगाने और इसे हटाने के लिए काम करती है।

एओलैन ने कहा, ‘इस तरह की परिभाषा का इस्तेमाल खासकर ऐसे समय चिंताजनक है जब कई सरकारें असहमति और विरोध के विभिन्न स्वरूपों को चाहे वह शांतिपूर्ण हों या हिंसक आतंकवाद के रूप में ले रही हैं।’ साथ ही उन्होंने कहा कि यह भी साफ नहीं है कि फेसबुक यह कैसे फैसला करता है कि कोई शख्स किसी खास ग्रुप से जुड़ा हुआ है।

अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत फैलाने को लेकर सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स पर पहले से ही संयुक्त राष्ट्र की नजर है। पिछले सप्ताह ही यूएन ह्यूमन राइट्स चीफ ने कहा था कि फेसबुक ने रोहिंग्याओं के खिलाफ हिंसा फैलाने में फेसबुक को जरिया बनाया जा रहा है। हालांकि, फेसबुक की तरफ से इस बात पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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