Saturday , September 26 2020

IL&FS: राहुल गांधी पर बरसे जेटली, कहा-अपनों से सीखें

नई दिल्ली

संकटग्रस्त प्राइवेट कंपनी आईऐलऐंडएफएस को बचाने के केंद्र सरकार के प्रयास पर कांग्रेस पार्टी की ओर से सवाल खड़ा किए जाने पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को अपने ही पार्टी के नेता से सीखने की सलाह दी है। Lessons for Rahul Gandhi from his Partyman (राहुल गांधी के लिए उनके पार्टी नेता से सीख) शीर्षक से की गई फेसबुक पोस्ट में जेटली ने कांग्रेस को ‘राष्ट्रीय विध्वंसक’ करार दे दिया।

जेटली ने लिखा, ‘पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस पार्टी प्राइवेट सेक्टर की कंपनी आईएलऐंडएफस को लेकर सरकार के संभावित कदमों के बारे में गलत सूचनाएं फैलाने में व्यस्त है। कांग्रेस राष्ट्रीय विध्वंसक है। यह एक कंपनी को अपने हाल पर छोड़कर, उसकी समस्या बढ़ाकर और फिर पूरी तरह अनियंत्रित करके भारत की अर्थव्यवस्था को तहस-नहस करना चाहती है। इसमें स्टेटमैनशिप और विजन का अभाव है।’

केवी थॉमस की चिट्ठी का हवाला
दरअसल, वित्त मंत्री ने यह पोस्ट कांग्रेस नेता केवी थॉमस से मिली उस चट्ठी का हवाला देकर लिखी है, जिसमें थॉमस ने आईएलऐंडएफस की समस्या के निस्तारण को लेकर तीन सुझाव दिए हैं। थॉमस ने वित्त मंत्री को लिखी चिट्ठी में आईएलऐंडएफएस की अब तक बड़ी-बड़ी उपलब्धियां गिनाते हुए कहा है कि सरकार को कंपनी को बचाने की दिशा में हर संभव प्रयास करना चाहिए। इसके लिए उन्होंने एलआईसी, एसबीआई, एचडीएफसी जैसे सांस्थानिक निवेशकों को आईएलऐंडएफएस की मदद का निर्देश दिए जाने का सुझाव दिया है।

क्या कहा है थॉमस ने?
थॉमस ने यहां तक लिखा है कि वित्त मंत्री इन सांस्थानिक निवेशकों को आईएलऐंडएफस की तरफ से 8 हजार करोड़ रुपये की मांग पूरी करने के लिए उसकी हिस्सेदारी खरीदने और कर्ज देने को कहें। दूसरे सुझाव के रूप में थॉमस ने लिखा कि वित्त मंत्री एनएचएआई (नैशनल हाइवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) एवं अन्य सरकारी एजेंसियों को आईएलऐंडएफएस की बकाया रकम का कुछ हिस्सा बिना देर किए जारी करने को कहें। उनका तीसरा सुझाव है कि सरकार आईएलऐंडएफएस को नए प्रॉजेक्ट्स के लिए बिना बैंक गारंटी लिए फंडिंग करे ताकि बैंकों और निवेशकों में कंपनी के प्रति भरोसा फिर बहाल हो जाए कि सरकार आईएलऐंडएफएस के पीछे खड़ी है।

आखिर में थॉमस ने लिखा है, ‘मुझे उम्मीद है कि आप उचित जरूरी कार्रवाई के लिए प्रासंगिक मंत्रालयों और विभागों के साथ बातचीत शुरू करेंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि भारतीय अर्थव्यवस्था मंदी का शिकार नहीं हो। साथ ही, छोटे एवं बड़े, दोनों निवेशकों के हितों की रक्षा, इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निवेश को लेकर फिर से भरोसा-बहाली सुनिश्चित हो सके जो भविष्य के लिए बहुत जरूरी है।’

जेटली का सवाल- क्या इन्हें आज से घोटाला कहने लगें?
वित्त मंत्री ने अपनी पोस्ट में थॉमस की इस चिट्ठी को साझा करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर भी निशाना साधा है। उन्होंने पूछा, ‘किसी भी कंपनी में वित्तीय संस्थानों का निवेश करना क्या घोटाला है, जैसा कि राहुल गांधी और उनकी मंडली फैला रही है?’ उन्होंने आगे सवाल किया, ‘क्या 1987 में जब सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने 50.5% और यूटीआई ने 30.5% हिस्सेदारी लेकर आईएलऐंडऐफएस को प्रमोट किया तो क्या वह घोटाला था? 2005 में एलआईसी ने आईएलऐंडएफएस का 15% स्टेक लिया और मार्च 2006 में फिर से 11.10% हिस्सेदारी ली तो क्या वे घोटाले थे? दरअसल, एलआईसी ने तो 2010 में भी आईएलऐंडएफएस का 19.34 प्रतिशत शेयर लिया था। क्या हम ‘राहुल गांधी की विकृत सोच’ के मुताबिक इन सभी निवेशों को आज घोटाला कहना शुरू कर दें?’

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