#MeToo: ‘एमजे अकबर के खिलाफ जांच नहीं कर सकती MEA कमिटी’

मुंबई

विदेश मंत्रालय (MEA) की इंटनरल कंप्लेंट्स कमिटी (ICC) ऑन प्रिवेंशन ऑफ सेक्शुअल हैरसमेंट (PoSH) एमजे अकबर के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच शुरू नहीं कर पाएगी। यह बात MEA की PoSH सेल की मेंबर ऐडवोकेट अपर्णा भट ने कही है। अपर्णा ICC सेल की चार सदस्यों वाली कमिटी का हिस्सा हैं जिस पर मिनिस्ट्री में सेक्शुअल हैरसमेंट की शिकायतों की जांच करने की जिम्मेदारी है।

अपर्णा ने इकनॉमिक टाइम्स से टेलीफोन पर हुई बातचीत में कहा, ‘ICC के बारे में मेरी जो समझ है, उसके हिसाब से अगर सेक्शुअल हैरसमेंट की घटना संगठन में होती है, तभी ICC जांच करने वाली सक्षम अथॉरिटी होगी। ICC बाहर लगाए गए आरोपों की जांच नहीं कर सकती। आरोप जांच लायक हैं या नहीं, यह एकदम अलग मामला है।’ अपर्णा ने ICC के सीमित दायरे के बारे में कहा कि इसकी अपनी सीमाएं हैं जिसमें वह सिर्फ सेक्शुअल हैरसमेंट के उन्हीं मामलों की जांच कर सकती है, जो किसी शख्स ने MEA के मेंबर की हैसियत से ऑफिस की हद में उसके या बाहर किए हों।

अपर्णा भट ने कहा, ‘अगर घटना कई साल पहले किसी और संस्थान में हुई है, तो मुझे पता नहीं कि ICC उसे हैंडल कर सकती है।’ उन्होंने कहा कि यह हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जैसी संस्था नहीं है। यह सिर्फ एक जांच समिति है। इस बारे में डिटेल जानकारी के लिए MEA की ICC की चेयरपर्सन मधुमिता हजारिका भगत को भेजी गई ईमेल का जवाब अबतक नहीं मिल पाया है।

आपको बता दें कि विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर पर कई महिलाओं ने आरोप लगाया है कि जब वे अकबर के मातहत काम कर रही थीं, तब उन्होंने उनका सेक्शुअल हैरसमेंट किया था। डेली न्यूजपेपर टेलीग्राफ और एशियन एज के फाउंडर और एडिटर रहे अकबर ने इन आरोपों को खारिज करते हुए सोमवार को जर्नलिस्ट प्रिया रमानी के खिलाफ मानहानि का आपराधिक मामला दर्ज कराया है। प्रिया ने वोग मैगजीन के एक न्यूज आर्टिकल में लिखा था कि अकबर ने मुंबई के एक होटल में नौकरी के लिए उनका इंटरव्यू लिया था। उन्होंने इंटरव्यू के दौरान अकबर की तरफ से ड्रिंक्स ऑफर किए जाने और पास में बैठने जैसी बातों का जिक्र किया है।

पिछले 10 दिन में इंडिया का #MeToo बन चुके कैंपेन में कई ऐसी महिलाओं ने सोशल मीडिया पर आकर साथी और वरिष्ठ सहकर्मियों के हाथ अपने सेक्शुअल हैरसमेंट की घटनाओं का जिक्र किया। इनमें से कुछ घटनाएं कई साल पहले की हैं। कई प्राइवेट ऑर्गनाइजेशन इन शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए PoSH के तहत आरोपित पुरुष कर्मियों के खिलाफ जांच शुरू कर चुके हैं, जबकि इस लॉ के मुताबिक छह महीने तक की घटनाओं के बारे में तीन महीने के भीतर ही शिकायत की जा सकती है।

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