MP चुनाव: ‘कंप्यूटर बाबा’ से क्यों परेशान हुई शिवराज सरकार?

भोपाल

इस साल ही मध्य प्रदेश सरकार ने पांच संतों को राज्यमंत्री का दर्जा देकर नई बहस की शुरुआत की थी। तब इसे मध्य प्रदेश बीजेपी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का एक महत्वाकांक्षी कदम माना जा रहा था, लेकिन अब इन्हीं में से एक संत की नाराजगी ने प्रदेश में विधानसभा चुनाव से ऐन पहले सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार की कार्यप्रणाली से नाराज कंप्यूटर बाबा ने पिछले दिनों ही राज्यमंत्री के दर्जे से इस्तीफा दिया था और अब वह सीएम को खुली चुनौती दे रहे हैं।

कंप्यूटर बाबा संतों के समागम में मन की बात के जरिए शिवराज सरकार पर निशाना साधेंगे। कंप्यूटर बाबा यह अभियान मंगलवार से इंदौर में शुरू कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि इसके बाद कंप्यूटर बाबा ग्वालियर में 30 अक्टूबर, खांडवा में 4 नवंबर, 11 नवंबर को रीवा और 23 नवंबर को जबलपुर में संतों से मुलाकात करेंगे।

कंप्यूटर बाबा को मनाने में जुटी बीजेपी
यहां वह नर्मदा में अवैध खनन और गोरक्षा जैसे मामलों पर चर्चा करेंगे। प्रदेश में वैसे ही विधानसभा चुनाव का माहौल है ऐसे में बीजेपी के माथे पर शिकन होना लाजमी है। ऐसे में बीजेपी भी नाराज कंप्यूटर बाबा को मनाने के प्रयास में जुटी है। खबरों की मानें तो बीजेपी इसके लिए दूसरे राज्यों के बड़े-बड़े संतों को कंप्यूटर बाबा के पास भेजने की तैयारी कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीजेपी जूनापीठ के पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी को कंप्यूटर बाबा के पास भेजने वाली है।

इस महीने के शुरू में कंप्यूटर बाबा ने पद से दिया था इस्तीफा
बता दें कि इस महीने की शुरुआत में ही मध्य प्रदेश के दर्जा प्राप्‍त राज्‍यमंत्री संत नामदेव शास्त्री उर्फ कंप्यूटर बाबा ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया था। कंप्यूटर बाबा ने राज्‍य सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार ने धर्म और संत समाज की उपेक्षा की थी। उन्होंने सरकार द्वारा गो मंत्रालय बनाए जाने की घोषणा पर भी सवाल उठाए थे। साथ ही सरकार से अलग नर्मदा मंत्रालय बनाने की मांग की थी।

हेलिकॉप्टर राइड और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स से लगाव
उनका पूरा नाम अनंत विभूषित 1008 महामंडलेश्वर नामदेव त्यागी उर्फ कंप्यूटर बाबा है। कंप्यूटर बाबा नाम के पीछे वजह उनका इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के लिए प्यार और हमेशा साथ में लैपटॉप होना है। दो साल पहले उन्होंने सिंहस्थ में मध्य प्रदेश सरकार की तैयारियों की पोल खोली थी। बाबा ने उज्जैन से लेकर दिल्ली तक मध्य प्रदेश सरकार द्वारा सिंहस्थ में किए गए भ्रष्टाचार को उजागर किया था।

हेलिकॉप्टर राइड और चुनाव लड़ने की प्रबल इच्छा रखने के चलते कंप्यूटर बाबा हमेशा लाइमलाइट में रहते हैं। विशेष धार्मिक कार्यक्रमों में वह किराये के हेलिकॉप्टर से ही आते हैं। हाल ही में नर्मदा नदी के किनारे स्नान के लिए हेलिकॉप्टर से उतरने की इच्छा जाहिर करने के चलते वह खबरों में रहे थे।

नर्मदा घोटाला यात्रा निकालने की ऐलान किया था
इसी साल अप्रैल में कंप्यूटर बाबा और एक दूसरे धर्मनेता पंडित योगेंद्र महंत ने अवैध खनन घोटाले और नर्मदा नदी के किनारे 6 करोड़ पौधरोपण में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए नर्मदा घोटाला यात्रा निकालने की धमकी दी थी। तब बीजेपी ने उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा देकर सरकारी कमिटी का सदस्य बना दिया था ताकि वह नर्मदा की सुरक्षा के लिए उपाय बता सकें। उन्हें एक सरकारी वाहन और एक छोटा ऑफिस भी दिया गया था।

बीजेपी से चुनाव लड़ने की इच्छा
लेकिन छह महीने बाद राज्य मंत्री के पद से अचानक इस्तीफा देने और शिवराज सरकार को घेरने से कई सवाल उठने लगे। कंप्यूटर बाबा के इस फैसले को उनके विधानसभा चुनाव लड़ने की महत्वकांक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है। कंप्यूटर बाबा ने हाल ही में बीजेपी के टिकट से विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा भी जाहिर की थी लेकिन पार्टी की तरफ से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।

पहले भी जाहिर कर चुके हैं चुनाव लड़ने की इच्छा
इससे पहले 2014 में भी कंप्यूटर बाबा ने आम आदमी पार्टी और बीजेपी से लोकसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की थी लेकिन उन्हें टिकट नही मिल सका था। हालांकि शायद कंप्यूटर बाबा के धार्मिक रसूख को देखते हुए ही बीजेपी सरकार ने उसी दिन विशेष गो मंत्रालय गठित करने की बात की थी जिस दिन कंप्यूटर बाबा ने इस्तीफा दिया था। दरअसल, बीजेपी यह बखूबी जानती है कि चुनाव से पहले साधु-संतों की नाराजगी उस पर भारी पड़ सकती है फिर कंप्यूटर बाबा के कई समर्थक भी हैं। ऐसे में सरकार उन्हें मनाने में कोई कसर बाकी छोड़ नहीं रही है।

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