Tuesday , September 22 2020

RBI के रिजर्व का 1/3 चाहती है मोदी सरकार, मांगे 3.6 लाख करोड़

नई दिल्ली,

रिजर्व बैंक और केन्द्र सरकार के बीच खींचतान जारी है. जहां केन्द्र सरकार 19 नवंबर को होने आरबीआई बोर्ड बैठक में अपना अहम एजेंडा सामने करते हुए बोर्ड में रिजर्व बैंक गवर्नर की भूमिका को कम करने का काम कर सकती है. दरअसल, खबर के मुताबिक केन्द्र सरकार और रिजर्व बैंक गवर्नर के बीच विवाद की अहम वजह केन्द्रीय रिजर्व बैंक के पास मौजूद 9.6 ट्रिलियन (9.6 लाख करोड़) रुपये की रकम है.

इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि केन्द्र सरकार रिजर्व बैंक के पास पड़ी इस रिजर्व मुद्रा का लगभग एक-तिहाई हिस्सा लेना चाहती है. केन्द्र सरकार का रुख है कि इतनी बड़ी मात्रा में रिजर्व मुद्रा रखना रिजर्व बैंक की पुरानी और संकुचित धारणा है और इसे बदलने की जरूरत है. खबर के मुताबिक केन्द्र सरकार रिजर्व बैंक से चाहती है कि उसे इस रिजर्व मुद्रा से 3.6 ट्रिलियन रुपये दिए जाएं. केन्द्र सरकार इस मुद्रा का संचार कर्ज और अन्य विकास कार्यों पर खर्च के जरिए अर्थव्यवस्था को मजबूत करना चाहती है.

गौरतलब है कि इंडिया टुडे कि रिपोर्ट के मुताबिक 19 नवंबर को होने वाली आरबीआई बोर्ड की प्रमुख बैठक में केन्द्र सरकार अपने नुमाइंदों के जरिए विवादित विषयों पर प्रस्ताव के सहारे फैसला करने का दबाव बना सकती है. दरअसल, रिजर्व बैंक बोर्ड में केन्द्र सरकार के प्रतिनिधियों की संख्या अधिक है लिहाजा फैसला प्रस्ताव के आधार पर लिया जाएगा तो रिजर्व बैंक गवर्नर के सामने केन्द्र सरकार का सभी फैसला मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा.

वहीं, केन्द्र सरकार की इस मांग पर रिजर्व बैंक का मानना है कि इससे देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो सकता है. इस दलील के साथ केन्द्रीय रिजर्व बैंक केन्द्र सरकार को अपने रिजर्व खजाने से पैसे देने के का विरोध कर रहा है.

सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि केन्द्र सरकार का पक्ष है कि रिजर्व फंड से 3.6 ट्रिलियन रुपये को बाजार में लाकर सरकारी बैंकों की मदद की जा सकती है. गौरतलब है कि इस पैसे से सरकारी बैंक नए कारोबारी कर्ज बांट सकेंगे और अपनी कमाई मजबूत कर सकेंगे. केन्द्र सरकार यह भी कह रही है कि एक तरफ जहां सरकारी बैंक अपने डूबे कर्ज की रिकवरी कर रही है, रिजर्व मुद्रा की मदद से वह वापस मजबूती के साथ खड़ा हो सकता है.

वहीं इसके उलट रिजर्व बैंक का मानना है कि रिजर्व मुद्रा को खर्च करना उचित नहीं है. इस खर्च से कमाई में इजाफा नहीं होगा और यह खर्च महज सरकारी खर्च बनकर रह जाएगा. वहीं आरबीआई के मुताबिक वित्तीय बाजार के लिए भी यह कदम उचित नहीं है क्योंकि इससे बाजार का भरोसा कम होने का खतरा है.

गौरतलब है कि इससे पहले 2017-18 में रिजर्व बैंक ने 50,000 करोड़ रुपये की रकम अपने रिजर्व से केन्द्र सरकार को दी थी. इसमें 10,000 करोड़ रुपये की अंतरिम राशि भी शामिल है. वहीं इससे पहले 2016-17 में उसने 30,659 करोड़ रुपये केन्द्र सरकार को दी थी.

Did you like this? Share it:

About editor

Check Also

UN में चीन पर बरसे ट्रंप- विश्वयुद्ध के बाद फिर संघर्ष में उलझे, दुश्मन है चाइना वायरस

न्यूयॉर्क संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के 75 साल पूरे होने के अवसर पर राष्ट्रपति डोनाल्ड …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)
52 visitors online now
7 guests, 45 bots, 0 members
Max visitors today: 150 at 12:03 am
This month: 227 at 09-18-2020 01:27 pm
This year: 687 at 03-21-2020 02:57 pm
All time: 687 at 03-21-2020 02:57 pm