RBI ने बढ़ाया रेपो रेट, अब महंगा हो जाएगा लोन

रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी ने ब्याज दरें बढ़ाने का फैसला किया है. रेपो रेट 0.25 फीसदी बढ़ाकर 6.50 फीसदी कर दी है. वहीं, रिवर्स रेपो रेपो रेट 6 फीसदी से बढ़कर 6.25 फीसदी हो गई है. इससे आपके होम और ऑटो लोन की ईएमआई बढ़ सकती है. आपको बता दें कि जून में में भी आरबीआई ने रेपो रेट में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी की थी. इस बढ़त के साथ रेपो रेट 6.25 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई थी. (ये भी पढ़ें-बैंक से लेकर किचन तक, अगस्त में ये 9 चीजें आपकी जेब पर डालेंगी असर!)

RBI का फैसला-रेपो रेट 0.25 फीसदी बढ़ाकर 6.50 फीसदी कर दी है. रिवर्स रेपो रेपो रेट 6 फीसदी से बढ़कर 6.25 फीसदी हो गई है. मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (एमएसएफ) रेट और बैंक रेट 6.75 फीसदी हो गई है.आबीआई द्वारा जारी बयान के मुताबिक, रेपो रेट में यह बढ़ोतरी को मौजूदा अर्थव्यवस्था की स्थिति को देखते हुए की गई है. इस बदलाव के बाद होम लोन सहित लगभग सभी तरह के लोन महंगे होने की संभावना है.

क्यों बढ़ेगी आपकी EMI- इस फैसले के बाद बैंक की कॉस्ट ऑफ फंडिग बढ़ सकती है. इसीलिए बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकते हैं. आपको बता दें कि 30 जुलाई को एसबीआई ने ब्याज दरें 0.05 फीसदी से 0.10 फीसदी बढ़ा दी है. इसीलिए माना जा रहा है कि होम, ऑटो और पर्सनल लोन की EMI बढ़ सकती है.

लगातार दूसरी बढ़ी दरें- आरबीआई की मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) के 5 मेंबर्स ने रेपो रेट बढ़ाने के पक्ष में और 1 मेंबर ने इसके विरोध में वोट किया. कमिटी के एक्सटर्नल मेंबर रविंद्र ढोलकिया ने इसके विरोध में वोट किया. रेपो रेट में बढ़ोत्तरी की उम्मीद पहले से ही उम्मीद जताई जा रही थी. यह लगातार दूसरा मौका है, जब रेपो रेट में बढ़ोत्तरी की गई है. इससे पहले जून में हुई पिछली मॉनिटरी पॉलिसी मीटिंग में भी रेपो रेट में 0.25 फीसदी की बढ़ोत्तरी की गई थी.

महंगाई की चिंता का दिखा असर-एमपीसी मीटिंग पर महंगाई की चिंताओं का खासा असर दिखा. जून में खुदरा महंगाई 5 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई थी, जो 5 महीने का उच्चतम स्तर है. अप्रैल से जून के दौरान रिटेल महंगाई औसतन 4.8 फीसदी रही. इसे देखते हुए आरबीआई ने जुलाई-सितंबर की अवधि के लिए खुदरा महंगाई यानी सीपीआई के 4.2 फीसदी रहने का अनुमान जाहिर किया, जबकि चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही के लिए 4.8 फीसदी का अनुमान जाहिर किया गया है. महंगाई की अनुमानित दर पूर्व में तय 4 फीसदी के लक्ष्य से कहीं ज्यादा है.

2018-19 में जीडीपी ग्रोथ 7.4 फीसदी रहने का अनुमान-आरबीआई के मुताबिक अप्रैल-सितंबर की अवधि के दौरान जीडीपी ग्रोथ 7.5-7.6 फीसदी रहने की उम्मीद है. केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2018-19 के लिए जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को 7.4 फीसदी के स्तर पर बरकरार रखा है.

रेपो रेट- रोजमर्रा के कामकाज के लिए बैंकों को भी बड़ी-बड़ी रकमों की ज़रूरत पड़ जाती है, और ऐसी स्थिति में उनके लिए देश के केंद्रीय बैंक, यानी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से कर्ज लेना सबसे आसान विकल्प होता है.इस तरह के ओवरनाइट ऋण पर रिजर्व बैंक जिस दर से उनसे ब्याज वसूल करता है, उसे रेपो रेट कहते हैं. (ये भी पढ़ें-ऐसा होगा 100 रुपये का नया नोट, RBI जल्द करेगा जारी)

रिवर्स रेपो रेट-जैसा इसके नाम से ही साफ है, यह रेपो रेट से उलट होता है.जब कभी बैंकों के पास दिन-भर के कामकाज के बाद बड़ी रकमें बची रह जाती हैं, वे उस रकम को रिजर्व बैंक में रख दिया करते हैं, जिस पर आरबीआई उन्हें ब्याज देता है. अब रिजर्व बैंक इस ओवरनाइट रकम पर जिस दर से ब्याज अदा करता है, उसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं.

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