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UP में महागठबंधन के खिलाफ शाह का प्लान ‘सुपर-60’

नई दिल्ली

यूपी में एसपी और बीएसपी के महागठबंधन के खतरे को देखते हुए बीजेपी ने 2019 के लिए इस तरह का मास्टर प्लान बनाया है कि विपक्षी नेताओं के पैरों के नीचे से जमीन ही खिसक जाए। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की निगरानी में बनाए गए इस मास्टर प्लान में कुल पांच दर्जन बिंदुओं पर पार्टी की राज्य इकाई के नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है। इन बिंदुओं में पोलिंग बूथ के लेवल पर अपना आधार मजबूत करने के साथ ही विपक्षी आधार को भी ध्वस्त करने की रणनीति शामिल है।

ए से डी तक की कैटिगरी
बीजेपी सूत्रों के मुताबिक पार्टी को लग रहा है कि 80 सीटों वाले उत्तर प्रदेश में उसे एसपी, बीएसपी के गठबंधन से कड़ी चुनौती मिलेगी। ऐसे में मिशन 2019 का पूरा दारोमदार यूपी पर ही रहेगा। ऐसे में पार्टी ने पोलिंग बूथ लेवल पर अब कमिटियां बनाने के साथ ही एक-एक पोलिंग बूथ की समीक्षा का भी फैसला किया है। मौजूदा बूथों को ए से डी कैटिगरी में बांटा गया है यानी जहां बीजेपी की जीत पक्की है, वह ए और जहां सबसे खराब स्थिति है, वह डी कैटिगरी में रखा गया है। अब पार्टी ने रणनीति बनाई है कि हर बूथ के वोटरों के आधार पर यह कोशिश की जाए कि हर बूथ की कैटिगरी को बदला जाए।

बीजेपी में शामिल करें दमदार कार्यकर्ता
पार्टी सूत्रों का कहना है कि दूसरी रणनीति यह है कि हर बूथ लेवल पर दूसरी मजबूत पार्टी के कार्यकर्ताओं की पहचान की जाए। ऐसे कार्यकर्ताओं की पहचान करके उन्हें बीजेपी के पक्ष में लाया जाए। बीजेपी की रणनीति के अनुसार बूथ लेवल पर संगठन को मजबूत करने की स्थिति में इसका फायदा वोटिंग का प्रतिशत बढ़ाने में भी मिल सकता है।

दलित-ओबीसी सदस्य जोड़े जाएं
पार्टी ने यह भी तय किया है कि हर बूथ पर दलित और ओबीसी वर्ग के कम से कम 20-20 नए सदस्य अपने साथ शामिल किए जाएं। इसकी वजह यह है कि बीजेपी को लग रहा है कि उच्च जातियों का तो उसे समर्थन है ही। अब अगर पिछड़ी जातियों और दलित वोटरों का उसका आधार बढ़ जाए तो वह सपा और बसपा की चुनौती का सामना कर सकती है।

मंदिरों, मठों का भी हो डेटा बैंक
पार्टी सूत्रों के मुताबिक हर बूथ में आने वाले मंदिरों, मठों और उनके प्रमुखों का भी डेटा बैंक बनाने के लिए कहा गया है। यही नहीं, पार्टी अपने कमजोर बूथों पर दो से तीन वर्कर बनाने की तैयारी में है, जो बीजेपी की पहचान को बढ़ा सकें। इन सब के साथ पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को क्षेत्र में होने वाले सार्वजनिक कार्यक्रमों और आम लोगों के आयोजनों में खास तौर पर भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

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