Tuesday , September 22 2020

जवानों की जान बचाएगी DRDO की नई दवाई

नई दिल्ली

गंभीर रूप से घायल सुरक्षाकर्मियों में से 90 प्रतिशत कुछ घंटे में दम तोड़ देते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए डिफेंस रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) की चिकित्सकीय प्रयोगशाला ‘कॉम्बैट कैजुअलिटी ड्रग्स’ लेकर आई है, जिससे घायल जवानों को अस्पताल में पहुंचाए जाने से पहले तक के बेहद नाजुक समय को बढ़ाया जा सके, जिसे घायल जवानों की जान बचाने के लिहाज से ‘गोल्डन’ समय कहा जाता है।

DRDO के वैज्ञानिकों ने बताया कि इन दवाओं में रक्तस्राव वाले घाव को भरने वाली दवा, अवशोषक ड्रेसिंग और ग्लिसरेटेड सैलाइन शामिल हैं। ये सभी चीजें जंगल, अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में युद्ध और आतंकवादी हमलों की स्थिति में जीवन बचा सकती हैं। वैज्ञानिकों ने 14 फरवरी को पुलवामा में आतंकवादी हमले का जिक्र किया, जिसमें सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे।

वैज्ञानिकों ने कहा कि इन दवाओं से मृतक संख्या में कमी लाई जा सकती है। डीआरडीओ की प्रयोगशाला इंस्टिट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन ऐंड अलाइड साइंसेस में दवाओं को तैयार करने वाले वैज्ञानिकों के अनुसार घायल होने के बाद और अस्पताल पहुंचाए जाने से पहले यदि घायल को प्रभावी प्राथमिक उपचार दिया जाए तो उसके जीवित बचने की संभावना अधिक होती है।

संगठन में लाइफ साइंसेस के महानिदेशक ए. के. सिंह ने कहा कि डीआरडीओ की स्वदेशी निर्मित दवाएं अर्द्धसैनिक बलों और रक्षाकर्मियों के लिए युद्ध के समय में वरदान हैं। उन्होंने कहा, ‘ये दवाएं यह सुनिश्चित करेंगी कि घायल जवानों को युद्धक्षेत्र से बेहतर स्वास्थ्य देखभाल के लिए ले जाए जाने के दौरान हमारे वीर जवानों का खून बेकार में न बहे।’

विशेषज्ञों ने कहा कि चुनौतियां कई हैं। ज्यादातर मामलों में युद्ध के दौरान सैनिकों की देखभाल के लिए केवल एक चिकित्साकर्मी और सीमित उपकरण होते हैं। युद्धक्षेत्र की स्थितियों से चुनौतियां और जटिल हो जाती हैं, जैसे जंगल एवं पहाड़ी इलाके तथा वाहनों की पहुंच के लिहाज से दुर्गम क्षेत्र।

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