पाक को मुंह की खानी पड़ी, EU ने कहा-नहीं कर सकते कश्मीर पर मध्यस्थता

नई दिल्ली,

पाकिस्तान को गुरुवार को तब बड़ा झटका लगा जब लक्जमबर्ग और यूरोपिय यूनियन (ईयू) ने एक सुर में कश्मीर मामले पर मध्यस्थता करने से मना कर दिया. पुलवामा आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान दुनिया में अलग-थलग पड़ गया है. उसने भारत के खिलाफ आवाज उठाने के लिए कश्मीर मुद्दे को फिर से सुलगाना शुरू कर दिया है. इसी क्रम में पाकिस्तान ने कई देशों से कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता की गुजारिश की है लेकिन उन्होंने इसे सिरे से खारिज कर दिया है.

मध्यस्थता को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में लक्जमबर्ग के मंत्री जिन एस्सेलबॉर्न ने कहा कि ऐसा नहीं लगता कि कश्मीर मुद्दा सुलझाने के लिए ईयू में कोई क्षमता है. पाकिस्तानी विदेश मंत्री महमूद कुरैशी ने भी एस्सेलबॉर्न से कुछ ऐसा ही सवाल किया कि क्या ईयू यह मुद्दा सुलझाने में दिलचस्पी रखता है? इस पर एस्सेलबॉर्न ने स्पष्ट जवाब दिया कि उनके पास मध्यस्थता करने की क्षमता नहीं है.

इससे पहले संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत शुरू करवाने की अपनी क्षमता पर संदेह जताया था. हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई थी कि भारत और पाकिस्तान अपनी अहमियत को समझते हुए एक अच्छी बातचीत करेंगे.

गुटेरेस ने कहा, “मैं दोनों देशों के बीच वार्ता के संबंध में मध्यस्थता की पेशकश करता रहा हूं, लेकिन अभी तक सफलता की कोई स्थिति पैदा नहीं हुई है.” उन्होंने कहा, “भारत और पाकिस्तान दोनों की अंतरराष्ट्रीय मामलों में महत्ता है, इसलिए मैं उम्मीद करता हूं कि दोनों देश एक अर्थपूर्ण वार्ता करने में सक्षम होंगे.”

भारत शुरू से पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय वार्ता के लिए संयुक्त राष्ट्र या किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से इनकार करता रहा है. भारत का मानना है कि 1972 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पाकिस्तान के राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो के बीच हुए शिमला समझौते में इस बात पर समझौता हुआ था कि दोनों देश अपने विवाद आपस में सुलझाएंगे, न कि तीसरा पक्ष इसमें शामिल होगा.

हालांकि अभी हाल में रूस और अमेरिका जैसे देशों ने भारत और पाकिस्तान के बीच पनपे तनाव को कम करने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाने की पेशकश की थी. पहले भी ऐसी खबरें आई थीं कि रूस दोनों देशों के बीच तनाव कम करने में मदद के लिए वार्ता की मेजबानी कर सकता है. समाचार एजेंसी तास ने लावरोव के हवाले से कहा, “निश्चित रूप से, अगर वे ऐसा चाहें तो.” विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जाखारोवा ने भी कहा कि मास्को, भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को कम करने में मदद के लिए कुछ भी करने को तैयार है.

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