Wednesday , October 28 2020

पूर्वी लद्दाख में सेना का और बढ़ा दबदबा, 20+ रणनीतिक चोटियों पर नियंत्रण, राफेल भी तैयार

नई दिल्ली

भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में सीमा पर तनाव के बीच भारत ने पैंगोंग झील के फ्रिक्शन पॉइंट्स के आसपास 20 से अधिक माउंटेन हाइट्स पर अपना दबदबा बना लिया है। सूत्रों के मुताबिक, भारतीय वायुसेना राफेल को भी सीमा से लगे इलाकों में चीनी सैनिकों की ‘उत्तेजक कार्रवाई’ के मद्देनजर उपयोग करने के लिए तैयार है। भारत की यह मजबूती देखकर चीन भी सकते में है। इससे पहले भी चीन ने जब-जब घुसपैठ की कोशिश की भारतीय जवानों ने उल्टे पांव पीछे लौटने पर मजबूर कर दिया।

सूत्रों ने कहा कि भारतीय सेना ने पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारों के साथ-साथ 20 से अधिक हाइट्स के साथ-साथ चुशुल के विस्तारित सामान्य क्षेत्र में भी पिछले कुछ दिनों में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। दूसरी ओर राफेल के औपचारिक रूप से भारतीय वायुसेना में शामिल हुए अभी 10 दिन ही बीते हैं और लद्दाख में फ्रांस निर्मित इस जेट की तैनाती की तैयारी शुरू हो गई है। दरअसल 29 और 30 अगस्त की रात भी चीनी सेना ने पैंगोंग लेक इलाके में घुसपैठ की कोशिश की और बाद में हवाई फायरिंग भी की। लेकिन उसकी इस गिदड़भभकी से भारतीय सेना डरने के बजाए और चौकन्नी हो गई और अतिरिक्त चोटियों पर दबदबा बना लिया।

राफेल ने वायुसेना को और किया मजबूत
10 सितंबर को अंबाला में हुए समारोह में पांच राफेल विमानों को वायुसेना के बेड़े में औपचारिक रूप से शामिल कर लिया गया है। इस मौके पर रक्षा मंत्री ने भी कहा था कि सीमाओं पर जिस तरह का माहौल बनाया जा रहा है, ऐसे में भारतीय अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए ये विमान बहुत कारगर हैं। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने भी कहा था कि इस समय राफेल का आना सुरक्षा कारणों से बहुत उपयोगी है।

LAC के पास तैनात हैं फ्रंटलाइन एयरक्राफ्ट
भारतीय वायुसेना ने अपने फ्रंटलाइन एयरक्राफ्ट जैसे कि सुकोई 30MKI, जगुआर, मिराज 2000 को एलएसी के आसपास तैनात कर दिया है। इसके अलावा कुछ दिन पहले यहां राफेल भी उड़ान भरता नजर आया था। पूर्वी लद्दाख में IAF के विमान एलएसी के आसपास गश्त करते नजर आते हैं। इसी बीच एक बार फिर भारत और चीन के बीच कोर कमांडर स्तर की बतचीत होने जा रही है। भारत ने इसमें भी चीन को घेर लेने का प्लान बना लिया है। इस बार बैठक में विदेश मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी भी शामिल होने वाले हैं।

भारत की रणनीतिक पकड़ मजबूत
विदेश मंत्रीऔर रक्षा मंत्री ने SCO सम्मेलन के दौरान भी अपने समकक्षों से मुलाकात की थी और शांति स्थापित करने पर बात की। उस समय तो चीन राजी होता नजर आया लेकिन फिर भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आया। चीनी सेना की ओर से बीच-बीच में अतिक्रमण की कोशिशें होती रहीं हैं। इसके बाद भारत की सेना लगातार ऑपरेशंस कर रही है जिसमें रणनीतिक रूप से महत्‍वपूर्ण ऊंचाइयों तक पहुंच बनाई जा रही है। इन ऑपरेशंस की मॉनिटरिंग राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्‍टाफ जनरल बिपिन रावत और सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे कर रहे हैं।

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