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कृषि विधेयकों पर बुरी फंसी कांग्रेस, राहुल के नेतृत्व में तब थी समर्थन में, सामने आया प्रूफ

नई दिल्ली

मोदी सरकार द्वारा लोकसभा में पेश किए गए कृषि विधेयकों के विरोध को लेकर कांग्रेस बैकफुट पर आती दिख रही है। पहले कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता संजय झा ने बताया कि लोकसभा से पारित कृषि संबंधित विधेयक कांग्रेस के घोषणा पत्र में भी थे। और अब विधेयक को लेकर कांग्रेस का एक पुराना वीडियो भी सामने आया है। जिसमें राहुल गांधी के सामने कांग्रेस नेता ने घोषणा की थी एपीएमसी ऐक्ट में कांग्रेस शासित राज्यों में संशोधन किया जाएगा।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो 27 दिसंबर 2013 का है। इस वीडियो में कांग्रेस नेता अजय माकन राहुल गांधी के सामने घोषणा कर रहे हैं कि महंगाई और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के लिए कांग्रेस के 11 मुख्यमंत्रियों की बैठक में फैसला लिया गया कि किसानों को सहूलियत पहुंचाने और उपभोक्ताओं को कम कीमत में फल और सब्जियां उपलब्ध कराने के लिए इन्हें एपीएमसी ऐक्ट के तहत बनी लिस्ट से हटा दिया जाएगा।

कांग्रेस के पुराने ट्वीट पर बीजेपी नेता की चुटकी
कृषि विधेयकों को कांग्रेस के विरोध के बीच 2013 का कांग्रेस के ऑफिशन हैंडल से किया गया ट्वीट भी वायरल हो रहा है। इस ट्वीट में कांग्रेस ने लिखा है कि सभी कांग्रेस शासित राज्यों एपीएमसी ऐक्ट से फल और सब्जियों को हटाएंगे। इस ट्वीट को कोट करते हुए दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता ताजिंदर पाल सिंह बग्गा ने चुटकी ली। उन्होंने ट्वीट को कोट कर लिखा, ‘राहुल गांधी जी! प्लीज इस ट्वीट को डिलीट मत करिएगा।’

जनता सब समझती है: बीजेपी
एनबीटी ऑनलाइन से बातचीत में बग्गा ने कहा कांग्रेस की कथनी और करनी हमेशा से अलग रही है। कृषि संबंधी विधेयकों पर किए जा रहे विरोध से भी यह बात साफ हो गई है। उन्होंने कहा, ‘किसानों के हित में और उन्हें बंधनों से मुक्त करने के लिए लाए गए इन बिलों का विरोध करके कांग्रेस की किसान विरोधी सोच भी सामने आ गई है। लेकिन जनता सब समझती है। वह जानती है कि ये बिल किसान, उपभोक्ता और देश के हित में है।’

नड्डा ने भी बोला कांग्रेस पर हमला
शुक्रवार को बीजेपी अध्यक्ष जे पी नड्डा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उसने अपने घोषणापत्र में यह वादा किया था कि किसानों को एपीएमसी से बाहर निकाल कर लायेंगे और आवश्यक वस्तु अधिनियम को बदलेंगे। उन्होंने कहा, ‘ कांग्रेस पार्टी ने अपने ही घोषणा पत्र में कहा था कि हम APMC से किसानों को बाहर लाएंगे, Essential Commodities Act 1955 में जंग लग गया है, उसे हम बदल डालेंगे। पीएम मोदी ने ये करके दिखाया है। जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं, वो बिचौलियों की भाषा बोल रहे हैं, किसानों की नहीं।’

किसानों को मिलेंगे नए अवसर: नड्डा
नड्डा ने कहा, ‘ न्यूनतम समर्थन मूल्य एवं सरकारी खरीद अर्थात् एपीएमसी की व्यवस्था बनी रहेगी। विधेयक किसानों को कई और विकल्प प्रदान कर उन्हें सही मायने में सशक्त करने वाले हैं। इसके तहत एक परिस्थितिकी तंत्र के निर्माण का प्रावधान किया गया है जिसमें किसान कानूनी बंधनों से आजाद होंगे।’ उन्होंने कहा कि कृषि से जुड़े जो तीनों विधेयक लोकसभा में पारित हुए हैं वे सही मायने में किसानों को बिचौलियों और तमाम अवरोधों से मुक्त करेंगे। इस कृषि सुधार से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए नए-नए अवसर मिलेंगे, जिससे उनका मुनाफा बढ़ेगा और किसान सशक्त होंगे।

‘कांग्रेसी’ ने ही बताया था सच
आपको बता दें कि इससे पहले कांग्रेस से निष्कासित पूर्व पार्टी प्रवक्ता संजय झा ने शुक्रवार को ट्वीट किया था, ‘साल 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने भी अपने घोषणापत्र में एपीएमसी अधिनियम को खत्म करने और कृषि उत्पादों को प्रतिबंधों से मुक्त करने की बात कही थी।’ उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने जो वादा अपने घोषणापत्र में किया था, वही मोदी सरकार ने पूरा किया है। झा ने कहा कि इस मुद्दे पर बीजेपी और कांग्रेस एकमत हैं।

पीएम मोदी ने भी कही थी यही बात
वहीं इस मुद्दे पर पीएम मोदी ने भी शुक्रवार को कहा था, ‘चुनाव के समय किसानों को लुभाने के लिए ये बड़ी-बड़ी बातें करते थे, लिखित में करते थे, अपने घोषणापत्र में डालते थे और चुनाव के बाद भूल जाते थे। और आज जब वही चीजें एनडीए सरकार कर रही है, किसानों को समर्पित हमारी सरकार कर रही है, तो ये भांति-भांति के भ्रम फैला रहे हैं। जिस APMC एक्ट को लेकर अब ये लोग राजनीति कर रहे हैं, एग्रीकल्चर मार्केट के प्रावधानों में बदलाव का विरोध कर रहे हैं, उसी बदलाव की बात इन लोगों ने अपने घोषणापत्र में भी लिखी थी लेकिन अब जब एनडीए सरकार ने ये बदलाव कर दिया है, तो ये लोग इसका विरोध करने पर उतर आए हैं।’

हरसिमरत कौर ने दिया था इस्तीफा
इससे पहले संसद में पेश कृषि बिलों के विरोध में अकाली दल कोटे की मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने एनडीए सरकार से इस्तीफा दे दिया था। हरसिमरत कौर ने प्रधानमंत्री मोदी को सौंपे इस्तीफे में अपनी पार्टी और किसानों को एक दूसरे का पर्याय बताया था। उन्‍होंने कहा था कि किसानों के हितों से उनकी पार्टी किसी तरह का समझौता नहीं कर सकती।

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