Thursday , October 29 2020

कोविड-19 से भारतीयों में मौत का खतरा ज्यादा, इस रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

पूरी दुनिया में तबाही मचाने वाला कोरोना वायरस भारतीयों के लिए ज्यादा खूंखार बन गया है. लंदन में शुक्रवार को एक नया सांख्यिकीय विश्लेषण जारी हुआ, जिसके मुताबिक, इंग्लैंड और वेल्स में रहने वाले भारतीयों की कोविड-19 से मौत (Covid-19 Death rate) की संभावना श्वेतों की तुलना में 50-75 प्रतिशत ज्यादा है. भारतीय पुरुष और महिलाएं दोनों में वायरस से मौत का खतरा ज्यादा बताया गया है.

क्या कहती है रिपोर्ट?
‘दि ऑफिस फॉर नेशनल स्टैटिक्स’ (ONS) ने इस साल की शुरुआत में कोरोना वायरस के प्रभाव को लेकर एक नस्लीय भिन्नता का निष्कर्ष निकाला था. इस सप्ताह अपने आंकड़ों को अपडेट करते हुए ONS ने बताया कि इस असमानता के पीछे पहले से चली आ रही किसी बीमारी (Pre existing health conditions) से ज्यादा रहन-सहन और पेशा (जॉब्स) जिम्मेदार हैं.

पहले भी मिले थे संकेत
ONS की रिपोर्ट के मुताबिक, 28 जुलाई तक हुई मौतों को देखें तो अश्वेत और साउथ एशियन लोगों में कोविड-19 से मौत का खतरा श्वेत लोगों से ज्यादा है. इससे पहले 15 मई तक हुई मौतों में भी ONS ने ऐसे ही आंकड़े मिलने का दावा किया था. इस निष्कर्ष से पता चलता है कि कोविड-19 से हुई मौतों का नस्लीय अंतर डेमोग्राफिक, सामाजिक और आर्थिक कारकों के साथ मजबूती से जुड़ा हुआ है.

महिलाओं में पुरुषों से कम खतरा
रिपोर्ट यह भी दावा करती है कि सभी समुदायों में कोरोना वायरस से मौत (Corona virus Death rate) का खतरा पुरुषों में महिलाओं से ज्यादा है. चीनी लोगों को छोड़ दें तो श्वेत लोगों में बाकी समुदाय के लोगों से मौत का खतरा कम बताया गया है.

पाक से ज्यादा बांग्लादेशियों में खतरा
अपने पिछले विश्लेषण में ONS ने बांग्लादेश और पाकिस्तान के बाशिंदों में कोरोना के खतरे पर आंकड़े पेश किए थे. इस रिपोर्ट में बांग्लादेश के पुरुषों में कोरोना से मौत का खतरा पाकिस्तान के पुरुषों से ज्यादा बताया गया था. ONS हेल्थ एंड लाइफ इवेंट्स विभाग के डिप्टी डायरेक्टर बेन हम्बरस्टोरन ने कहा कि यह रिपोर्ट पुष्टि करती है कि कोविड-19 से जातीय अल्पसंख्यक समूहों में मृत्यु दर अधिक रहती है.

पहले से बीमारी रहें संभलकर
इनमें ब्लैक अफ्रीकन, ब्लैक कैरेबियन, बांग्लादेशी और पाकिस्तानी भी शामिल हैं. यह रिपोर्ट हॉस्पिटल से लिए गए डेटा और ONS के खुद के सर्वे पर आधारित है, जिसमें डायबिटीज, रेस्पिरेटरी फेलियर या हार्ट फेलियर जैसी प्री एग्जिस्टिंग हेल्थ कंडीशन के आधार पर विभिन्न समुदायों में कोविड-19 के डेथ रेट का पता लगाया गया है.

रहन-सहन और पेशा
रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड-19 मौत इस बात पर भी निर्भर करती है कि आप कहां रहते हैं या आप किस पेशे (प्रोफेशन) में हैं. ये रिपोर्ट सरकार समर्थित पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड (PHE) के निष्कर्षों को दोहराती है, जिसमें वायरस के जानलेवा प्रभाव में असमानताओं की बात कही गई है.

अफ्रीकन-एशियाई लोगों पर खतरा
विपक्षी लेबर पार्टी की ‘विमिन एंड इक्वैलिटीज’ की सेक्रेटरी मार्शा डी कॉर्डोवा ने कहा, ‘यह वायरस अभी भी विनाशकारी है. कोविड-19 का विशेष रूप से ब्लैक अफ्रीकन, ब्लैक कैरिबियन और दक्षिण एशियाई लोगों पर ज्यादा बुरा प्रभाव पड़ा है. उन्होंने कहा कि सरकार को कुछ समुदायों में कोविड-19 का ज्यादा खतरा होने के कारणों की समीक्षा करनी चाहिए.

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