Thursday , October 22 2020

…तो क्या NCERT की नकली किताबों की छपाई में अधिकारी भी हैं शामिल?

मेरठ/नई दिल्ली

उत्तर प्रदेश के मेरठ में बड़े पैमाने पर नकली किताबों की छपाई मामले के तार राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) के अधिकारियों से जुड़ते नजर आ रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि जो मामला सामने आया, वो तो महज नमूना भर है जबकि असली खेल कहीं ज्यादा बड़ा है। वहीं एक रिटायर्ड अधिकारी ने यह भी बताया कि नकली किताबों की छपाई का धंधा बिना मिलीभगत के संभव नहीं है।

टाइम्स ऑफ इंडिया के पास मौजूद दस्तावेज, फोन पर बातचीत और मेसेज, शिक्षा मंत्रालय को भेजी गई NCERT की आंतरिक जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि करीब दो साल पहले सचेतक की सूचना के बाद भी परिषद पांच दिनों तक बैठी रही। शिक्षा सचिव के हस्तक्षेप के बाद ही ऐक्शन लिया गया।

ग्रेटर नोएडा में भी सामने आया था केस
20 दिसंबर 2018 को एक सचेतक (Whistle Blower) ने ग्रेटर नोएडा के एक प्रिंटिंग प्रेस में बड़ी संख्या में नकली किताबों के रखे जाने की सूचना सतर्कता और सुरक्षा अधिकारी (VSO) आशुतोष मिश्र को दी थी। उसी संदेश को एनसीईआरटी निदेशक हृषिकेश सेनापती, स्कूल शिक्षा सचिव रीना रे को भी दी गई। यह भी दावा किया गया कि टिप देने वाले अधिकारी ने अगले ही दिन प्रिंटिग प्रेस पहुंचकर नकली किताबों का जखीरा देखा और पाइरेटेड किताबों के लोकेशन के बारे में जानकारी दी।

दस्तावेजों के अनुसार पांच दिनों तक ना तो VSO और ना ही एनसीईआरटी के निदेशक ने किसी तरह का ऐक्शन लिया। 24 दिसंबर को स्कूल शिक्षा सचिव रीना रे के हस्तक्षेप के बाद अगली सुबह ही छापेमारी की गई और वहां कुछ नहीं मिला। इस रेड को लेकर VSO ने अपनी रिपोर्ट में ‘तत्काल ऐक्शन’ लिए जाने का दावा किया। जबकि असल में पांच दिन बाद छापेमारी हुई थी।

टिप के 5 दिन बाद रेड पर उठे सवाल
NCERT के निदेशक और सचिव को ईमेल किए गए सवालों पर परिषद की तरफ से जवाब देते हुए VSO ने पांच दिनों तक कोई ऐक्शन ना लिए जाने पर कोई जवाब नहीं दिया। अधिकारी ने अथॉरिटी की प्रतिक्रिया का इंतजार नहीं किया और अगली सुबह ही प्रेस पहुंच गया। फर्म के मालिक ने शिकायत कर दी और निरीक्षण की इजजात नहीं दी। ऐसे में अधिकारी ने फोन पर VSO से संपर्क किया, जिन्होंने कहा कि ऐसे दौरा कर फर्म को अलर्ट कर दिया और अवैध किताबों को हटाने का मौका मिल गया।

हालांकि फोन पर बातचीत की ट्रांसक्रिप्ट में यह खुलासा हुआ कि किसी अनाधिकृत दौरे के बारे में चर्चा नहीं हुई थी। और 26 दिसंबर को VSO की अगुवाई वाली टीम की छापेमारी के बाद मालिक की तरफ से NCERT को ‘अनाधिकारिक दौरे’ संबंधित मेल किया गया। वहीं बातचीत के अनुसार सचेतक ने 21 दिसंबर को VSO को बताया था कि देरी होने पर कुछ हाथ नहीं लगेगा।

‘मिलीभगत के बिना संभव नहीं फर्जीवाड़ा’
एनसीईआरटी के ही एक रिटायर्ड अधिकारी ने नाम ना जाहिर होने की शर्त पर बताया कि बिना अंदर के अधिकारियों की मिलीभगत के देश भर में नकली NCERT किताबों की छपाई का धंधा संभव ही नहीं है। किताबों की आर्टिफिशल कमी, सत्र शुरू होने पर भी जरूरत से कम किताबों की छपाई होती है। नकली किताबों की छपाई के खिलाफ किसी भी तरह का ऐक्शन महज दिखावा भर ही होता है। उन्होंने यह भी बताया कि तत्कालीन HRD के मंत्री प्रकाश जावडेकर ने भी एक बार बैठक में पायरेसी के मसले पर चिंता जाहिर की थी। इसके बाद NCERT ने दबाव में आकर किताबों की ऑनलाइन डिलिवरी शुरू की थी।

Did you like this? Share it:

About editor

Check Also

…तो बिहार में BJP का फ्री कोरोना वैक्‍सीन का वादा सभी देशवासियों के लिए है गुड न्‍यूज?

कोरोना वायरस वैक्‍सीन अब चुनावी वादों का हिस्‍सा बन चुकी है। भाजपा ने बिहार में …

Do NOT follow this link or you will be banned from the site!