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डॉक्टरों की सुरक्षा पर ऐक्शन तेज, केंद्र ने राज्यों को दिए 20 पॉइंट फॉर्मूले को लागू करने के निर्देश

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नई दिल्ली

केंद्र सरकार ने अस्पतालों व मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की सुरक्षा के मद्देनजर राज्यों को तुरंत प्रभाव से कड़े कदम उठाने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बनी नैशनल टास्क फोर्स की बीते मंगलवार को पहली बैठक हुई और बुधवार को केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन व केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव अपूर्व चंद्रा ने राज्यों के मुख्य सचिव व डीजीपी के साथ महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक की। बैठक में राज्यों को मेडिकल स्टाफ की सुरक्षा को लेकर तुरंत प्रभाव से जिन शार्ट टर्म उपायों को करना होगा, उनमें हर अस्पताल व मेडिकल कॉलेज में चीफ सिक्युरिटी ऑफिसर्स की नियुक्ति, रात के समय अस्पताल परिसर में रूटीन सिक्युरिटी पेट्रोलिंग शामिल है। वहीं स्वास्थ्य सचिव अपूर्व चंद्रा ने राज्यों के मुख्य सचिव व डीजीपी को इस संबंध में पत्र भी लिखा है। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉ. अतुल गोयल भी बैठक में मौजूद रहे।

कोलकाता के अस्पताल में ट्रेनी डॉक्टर के रेप- मर्डर मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में मेडिकल स्टाफ की सुरक्षा पर चिंता जताते हुए टास्क फोर्स बनाने का आदेश दिया था और टास्क फोर्स की अब बहुत जल्द- जल्द बैठकें भी होनी हैं। टास्क फोर्स की अगली बैठक से पहले बुधवार को गृह सचिव व स्वास्थ्य सचिव ने राज्यों के प्रशासनिक व पुलिस के वरिष्ठतम अधिकारियों के साथ बैठक कर कई महत्वपूर्ण सुझावों को लागू करने को कहा है। टास्क फोर्स को तीन हफ्तों में अंतरिम रिपोर्ट देनी है और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक दो महीनों में अंतिम रिपोर्ट देनी है। वर्चुअल मीटिंग में राज्यों को पब्लिक, प्राइवेट अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों व हेल्थकेयर इंस्टिट्यूशंस में सुरक्षा उपायों की समीक्षा कर जरूरी कदम उठाने को कहा गया है।

केंद्र की ओर से राज्यों को क्या- क्या महत्वपूर्ण दिशा- निर्देश दिए गए
1- डॉक्टरों के साथ हिंसा व मारपीट के मामलों में पश्चिम बंगाल समेत 26 राज्यों में कानून पास किए गए हैं, इनमें आंध्र प्रदेश, अरूणाचल प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, ओडिशा, पुडुचेरी, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, त्रिपुरा, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड व पश्चिम बंगाल। केंद्र ने कहा है कि जिन राज्यों में कानून नहीं है, उनको भी मेडिकल स्टाफ की सुरक्षा को लेकर ऐसे कानून बनाए बनाने होंगे।
2- केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव अपूर्व चंद्रा ने डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए राज्यों को लिखे पत्र में कहा है कि राज्यों के कानूनों और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के साथ-साथ दंडात्मक और जुर्माना संबंधी जानकारी को स्थानीय भाषा और अंग्रेजी में अस्पताल परिसर में प्रमुख स्थानों पर डिस्प्ले करने पर जोर दिया है।
3-अस्पतालों व मेडिकल कॉलेजों में चीफ सिक्युरिटी ऑफिसर्स की नियुक्ति की जाए और रात के समय कॉलेज कैंपस में रूटीन सिक्युरिटी पेट्रोलिंग को अनिवार्य बनाया जाए।
4- अस्पतालों में कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले और आउटसोर्स कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन जरूर हो।
5- गवर्नमेंट डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेजों में डिस्ट्रिक्ट मैजिस्ट्रेट और एसपी के साथ मिलकर संस्था के डीन व डायरेक्टर जॉइंट सिक्युरिटी ऑडिट करें।
6- बड़े मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों के कैंपस में पुलिस चौकी हो, पुलिस थाने के साथ अस्पताल का संपर्क रहे और रात में समय पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए।
7- कैंपस में सीसीटीवी कैमरा नेटवर्क को रिव्यू किया जाए और डॉर्क जोन की पहचान की जाए। जहां- जहां सीसीटीवी की जरूरत हो, वहां पर अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं।
8- कई राज्यों में कंट्रोल रूम है, जहां पर सीसीटीवी कवरेज की मॉनिटर होती है, ऐसा प्रयोग सभी जगह हो।
9- मेडिकल कॉलेजों व अस्पतालों के विभिन्न हिस्सों में लाइटिंग की भी समीक्षा हो और लाइटिंग की पुख्ता व्यवस्था हो।
10- बहुत से राज्यों में 100 और 112 नंबर हेल्पलाइन है। 112 नंबर की हेल्पलाइन का दायरा बढ़ाया जाए ताकि जरूरत पड़ने पर हेल्थ केयर वर्कर्स की तुरंत मदद हो सके।
11- जिस तरह से फायर सेफ्टी ड्रिल होती है, उसी तरह से अस्पतालों में रेगुलर ड्रिल हो।
12- अस्पतालों व मेडिकल कॉलेजों में खाली जगह और कमरों का ऑडिट किया जाए ताकि इस जगह का मिसयूज न किया जा सके।
13- रेजिडेंट डॉक्टरों की ड्यूटी टाइमिंग को रेगुलेट किया जाए और डॉक्टर को एक साथ बहुत अधिक घंटे तक ड्यूटी न करनी पड़े, उन्हें जरूरी ब्रेक दिया जाए।
14- रात में अस्पताल से हॉस्टल तक महिला स्टाफ के आने- जाने की व्यवस्था संस्थान करें।
15- जिस एजेंसी से सिक्युरिटी हायर की जाती है, उस एजेंसी की सर्विसेज की भी नियमित आधार पर समीक्षा हो
16-सिक्युरिटी स्टाफ की ट्रेनिंग पर खास फोकस हो।
17-मरीज के साथ बहुत सारे लोग न जाएं ताकि सिक्युरिटी स्टाफ पर भी भार कम हो सके।
18- सिक्युरिटी और सेफ्टी कमिटी को मजबूत बनाया जाए।
19- अस्पतालों में 24 घंटे चलने वाला सिक्युरिटी कंट्रोल रूम बनाया जाए
20- विजिटर पास पॉलिसी को लागू किया जाए। पास के बिना एंट्री न हो।

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