प्रयागराज
24 फरवरी को प्रयागराज में दिन दहाड़े उमेश पाल की हत्या कर दी गई थी। उसके बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में माफिया को मिट्टी में मिला देंगे बयान दिया था और यूपी सरकार अतीक अहमद को अहमदाबाद की साबरमती जेल से प्रयागराज लाने के लिए जुट गई थी। इसके बाद से माफिया अतीक अहमद ने यूपी न भेजने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिका में अतीक अहमद ने कहा था कि उन्हें गुजरात से बाहर न भेजा जाए। यूपी सरकार के कुछ मंत्रियों के बयान से ऐसा लगता है कि उनका फर्जी एनकाउंटर किया जा सकता है। सीएम योगी ने माफिया और आरोपियों को मिट्टी में मिला देने की बात कही है।
एक मार्च को अतीक अहमद के वकील हनीफ खान ने बताया था कि याचिका में यूपी में अतीक को भेजने का विरोध किया गया है। उनके फर्जी एनकाउंटर की बात कही गई थी। 17 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए एक सप्ताह के लिए सुनवाई टाल दी थी। वहीं, अतीक के भाई अशरफ की पत्नी जैनब फातिमा ने 17 मार्च से दो दिन पहले यूपी पुलिस और एसटीएफ पर जेल में पति के साथ अनहोनी की घटना जताई थी।
यूपी एसटीएफ साबरमती जेल से अतीक अहमद को लेकर 26 मार्च की रात में यूपी रवाना हो गई थी। करीब 30 घंटे के सफर के बाद अतीक अहमद प्रयागराज पहुंचा था, जहां 28 मार्च को उसकी पेशी हुई थी। वहीं, अतीक अहमद ने रास्ते में अपने एनकाउंटर का डर बताया था। 28 मार्च को पेशी के बाद अतीक और अशरफ को वापस साबरमती और बरेली जेल भेज दिया गया था। वहीं, दोबारा जब अतीक अहमद को लेने एसटीएफ 11 अप्रैल को सबारमती पहुंची तो उसने जेल से निकलते ही कहा था कि इनकी नीयत साफ नहीं है। रास्तेभर में जहां अतीक रुका वहां उसने मीडिया के सामने अपने एनकाउंटर होने की बात कहता रहा।
28 मार्च को ही अतीक अहमद की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की थी, जिसमें यूपी भेजे जाने पर जान को खतरा बताया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके 19वें दिन यानी 15 अप्रैल को अतीक अहमद और अशरफ को जब मेडिकल के लिए प्रयागराज के अस्पताल लाया जा रहा था, तभी तीन हमलावरों ने तबाड़तोड़ गोलियां बरसाकर मौत के घाट उतार दिया गया था।
बेटे के जनाजे के दिन पिता और चाचा की हत्या
झांसी में यूपी एसटीएफ ने अतीक अहमद के बेटे असद और शूटर गुलाम को 13 अप्रैल को मार गिराया था। बेटे असद अहमद को प्रयागराज के कसारी मसारी कब्रिस्तान में 15 अप्रैल को दफनाया गया था। वहीं, रोजाना मेडिकल प्रक्रिया के तहत रात में अतीक अहमद और उसके भाई को प्रयागराज के अस्पताल ले जाया जा रहा था, तभी तीन हमलावरों ने उसकी हत्या कर दी।
साबरमती से बहन साथ आई थी
अतीक अहमद की बहन भाई के एनकाउंटर की आशंका जताई थी, इसलिए जब अतीक अहमद को साबरमती जेल से लेकर एसटीएफ यूपी रवाना हुई थी तो पूरे रास्ते बहन भी गाड़ी के साथ चल रही थी। पूरे रास्ते भर में बहन ने भाई का साथ नहीं छोड़ा था और वह पुलिस काफिले के साथ चल रही थी।
