नई दिल्ली,
बांग्लादेश के सेना प्रमुख वकार-उज-जमान ने देश की पीएम शेख हसीना से जनता की भावना का ख्याल करते हुए इस्तीफा देने के लिए कहा है। इसके बाद शेख हसीना का सत्ता से बाहर जाना तय हो गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सेना प्रमुख के अल्टीमेटम के बाद शेख हसीना ने राजधानी ढाका को छोड़ दिया है। हसीना के साथ उनकी बहन ने भी ढाका छोड़ दिया है। बांग्लादेश आर्मी चीफ ने हसीना से कहा है कि उनको सम्मानजनक तरीके से इस्तीफा देकर सत्ता से हट जाना चाहिए। इस बीच बांग्लादेश की प्रधानमंत्री के बेटे ने सुरक्षा बलों से किसी भी अनिर्वाचित सरकार को सत्ता में आने से रोकने का आग्रह किया है।
बांग्लादेश के आर्मी चीफ की ओर से ये ऐसे समय किया है जब पीएम शेख हसीना के इस्तीफे की मांग को लेकर रविवार से शुरू हुई हिंसा में कुछ घंटों के भीतर ही 100 लोगों की मौत हुई और अरबों की संपत्ति को आग के हवाले कर दिया गया। सभी बड़े शहरों में लाखों की तादाद में लोग शेख हसीना के इस्तीफे की मांग करते हुए सड़कों पर हैं। राजधानी ढाका पर प्रदर्शनकारियों ने पूरी तरह कब्जा कर रखा है और लाखों लोग प्रमुख चौकियों पर जमे हुए हैं। बांग्लादेश में बीते कुछ दिनों में प्रदर्शनों के दौरान हिंसा में 300 लोगों की मौतें हो चुकी हैं। इससे देश की अवामी लीग की सरकार और पीएम शेख हसीना सवालों के घेरे में आ गई।
राजनेताओं से बातचीत कर रहे हैं आर्मी चीफ
बांग्लादेश मीडिया के मुताबिक, देश के सेना प्रमुख वर्तमान में देश की स्थिति पर राजनीतिक दलों के नेतृत्व के साथ परामर्श में लगे हुए हैं। इसके बाद सेना प्रमुख का संबोधन होगा। बांग्लादेश सेना प्रमुख का टेलीविजन संबोधन एक बार फिर कुछ समय के लिए टाला गया है। माना जा रहा है कि सेना प्रमुख अपने संबोधन में सत्ता परिवर्तन का ऐलान करेंगे।
बांग्लादेश में बीते महीने विवादास्पद कोटा प्रणाली पर ढाका विश्वविद्यालय में छात्र कार्यकर्ताओं की पुलिस और सरकार समर्थक प्रदर्शनकारियों के साथ हिंसक झड़प हुई थी। इन विरोध प्रदर्शनों में भीड़ बढ़ने लगी और हिंसा शुरू हो गई। सुप्रीम कोर्ट ने कोटा घटाने का फैसला दिया तो चीजें ठीक होती दिखीं लेकिन रविवार को हसीना के इस्तीफे की मांग करते हुए लाखों की तादाद में लोग सड़कों पर उतर आए और चीजें शेख हसीना के हाथ से बाहर हो गईं।
क्या स्टूडेंट प्रोटेस्ट हुआ हाईजैक?
बांग्लादेश के इस प्रोटेस्ट में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है. आरक्षण के विरोध में शुरू हुआ ये प्रदर्शन अब पूरी तरह से हिंसा में तब्दील हो चुका है. रविवार को हुई हिंसा में 100 से अधिक लोगों की मौत हुई है. सड़कों पर उत्पात मचा रहे प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस ने बल का प्रयोग किया. इंटरनेट पर बैन लगा दिया गया. अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू किया गया है.
लेकिन इस बीच शेख हसीना सरकार के नेताओं ने दावा किया है कि स्टूडेंट्स के इस प्रोटेस्ट को कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी संगठन और पूर्व प्रधानमंत्री खालिद जिया की पार्टी बीएनपी की स्टूडेंट इकाई बांग्लादेश इस्लामी छात्र शिबिर ने किया है.
दरअसल शेख हसीना सरकार ने हाल ही में जमात-ए-इस्लामी, इसकी छात्र शाखा और इससे जुड़े अन्य संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया था. यह कदम बांग्लादेश में कई सप्ताह तक चले हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद उठाया गया था. कहा जा रहा है कि सरकार की इस कार्रवाई के बाद ये संगठन शेख हसीना सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं. ऐसे में शेख हसीना सरकार को बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.
शेख हसीना के खिलाफ सड़कों पर उतरे हुजूम को रोकने के लिए सरकार ने देशभर में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया है. इस कर्फ्यू की वजह से अवामी लीग का सोमवार को तय शोक जुलूस रद्द कर दिया गया है. भारत ने बांग्लादेश में जारी हिंसा के कारण अपने सभी नागरिकों को अगली सूचना तक पड़ोसी देश की यात्रा नहीं करने की सलाह दी है.
एक ही थाने के 13 पुलिसकर्मियों को मारा गया
सरकारी नौकरियों के लिए कोटा प्रणाली को खत्म करने की मांग को लेकर लंबे समय से चल रहा छात्रों का प्रदर्शन रविवार को उग्र हो गया था. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अब उनकी एक ही मांग है पीएम शेख हसीना का इस्तीफा. बांग्लादेश के प्रमुख अखबार प्रोथोम अलो ने बताया कि देशभर में झड़पों, गोलीबारी और जवाबी कार्रवाई में कम से कम 100 लोग मारे गए हैं. पुलिस मुख्यालय के मुताबिक देशभर में 14 पुलिसकर्मी मारे गए हैं. इनमें से 13 एक ही थाने सिराजगंज के इनायतपुर में मारे गए हैं. वहीं, करीब 300 पुलिसकर्मी घायल बताए जा रहे हैं.
