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हाजीपुर सीट को लेकर बढ़ी तकरार, चाचा पशुपति का चिराग पासवान पर पलटवार

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पटना,

हाजीपुर के सांसद और आरएलजेपी प्रमुख पशुपति कुमार पारस और उनके भतीजे चिराग पासवान के बीच हाजीपुर सीट को लेकर तकरार खत्म होने का नाम नहीं ले रही है. हाजीपुर से कौन चुनाव लड़ेगा, इस पर चिराग और पशुपति पारस के अपने-अपने दावे हैं. क्योंकि पशुपति पारस ने एक बार फिर कहा है कि मैं हाजीपुर से चुनाव लड़ूंगा. मैंने कई बार कहा है कि मैं अपने राजनीतिक जीवन के दौरान एनडीए के साथ रहूंगा और हाजीपुर के लोगों की सेवा करता रहूंगा. उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें (चिराग पासवान) वहां जाना चाहिए जहां पासवान (दिवंगत रामविलास पासवान) उन्हें ले गए थे और उन लोगों की सेवा करनी चाहिए.

दरअसल, पिछले दिनों ही चिराग पासवान ने कहा था कि वह चाहते हैं कि उनकी मां हाजीपुर से लोकसभा चुनाव लड़ें, जिस सीट पर उनके दिवंगत पिता रामविलास पासवान ने कई दशकों तक लोगों की सेवा की थी.

पशुपति पारस ने कहा कि हमारी पार्टी NDA गठबंधन के बुरे दिनों की सहयोगी है. मैंने शुरू से कहा है कि जब से NDA का गठन हुआ है, तब से इसके साथ हूं. साथ ही कहा कि हाजीपुर सीट का मेरे अलावा कोई औऱ दावेदार नहीं है. उन्होंने कहा कि मैं दाएं-बाएं होने वाला नहीं हूं. हम जिसके साथ रहते हैं पूरे विश्वास के साथ रहते हैं. यहीं मेरी राजनीति की पूंजी है. उन्होंने कहा कि हम तीन भाई थे, तीनों में बहुत स्नेह था. लेकिन बड़े और छोटे भाई के निधन के बाद ऐसी कौन सी वजह थी जिससे हमारा परिवार टूट गया.

चाचा पशुपति ने चिराग का नाम लिए बिना कहा कि वह हमारे परिवार के दुख-दर्द का पार्ट नहीं है. इतना ही नहीं, चिराग के NDA में शामिल होने पर उन्होंने कहा कि ये चुनाव का साल है, ये ठीक उसी तरह है जैसे बारिश के दिनों में कई मेंढ़क टर्र-टर्र करने लग जाते हैं, बहुत से लोग आएंगे और जाएंगे. उन्होंने कहा कि वह (चिराग) ये भी सोचें कि पहले उन्होंने NDA गठबंधन के साथ कैसा व्यवहार किया था.

लोक जनशक्ति पार्टी के पूर्व अध्यक्ष चिराग पासवान ने पिछले दिनों कहा था कि हाजीपुर के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस द्वारा एड़ी-चोटी का जोर लगाने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मौजूदा सांसद के रूप में उनका (पारस) सीट के लिए दावा करना स्वाभाविक है. लेकिन हमारे लिए हाजीपुर एक भावनात्मक पहलू है. मैं इस जमीन को अपनी मां मानता हूं. मेरे पिता की अनुपस्थिति में मेरे लिए यह इच्छा स्वाभाविक है कि मैं इस निर्वाचन क्षेत्र की देखभाल उसी तरह करूं, जैसे मेरे पिता ने अपने जीवनकाल में किया था.

चिराग पासवान ने कहा था कि पिता के निधन के बाद अपनों ने सहारा देने के बजाय जख्म देने का काम किया. हाजीपुर सीट उनके पिता की कर्मभूमि रही है. लिहाजा इस सीट पर या तो वो लड़ेंगे या मां लड़ेंगी. साल 2019 के चुनाव में जिस-जिस सीट से लोजपा चुनाव लड़ी थी, वो सभी सीटें हमारी प्राथमिकता में हैं.

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