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कुरान में लिखी हर बात जरूरी प्रैक्टिस नहीं… SC में गाय और बकरीद का भी आया जिक्र

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नई दिल्ली

हिजाब बैन के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में रोज सुनवाई हो रही है। आज कर्नाटक सरकार ने दलील दी कि कुरान में जो कुछ भी लिखा है वह धार्मिक तो हो सकता है लेकिन कुरान में लिखा हर शब्द जरूरी प्रैक्टिस नहीं हो सकता है। सिर्फ इसलिए कि कोई बात कुरान में लिखी है वह जरूरी प्रैक्टिस नहीं हो सकती है। कर्नाटक सरकार के एडवोकेट जनरल ने कहा कि तमाम धार्मिक प्रैक्टिस अनुच्छेद-25 में प्रोटेक्टेड नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट में हिजाब मामले में 9वें दिन सुनवाई के दौरान कर्नाटक सरकार के एडवोकेट जनरल पी. नावाडगी ने दलील दी है कि याचिकाकर्ता ने जरूरी प्रैक्टिस की बात कही है। अगर यह मान लिया जाए कि हिजाब का जिक्र कुरान से आया है तो क्या उसे जरूरी प्रैक्टिस मान लिया जाएगा? लेकिन जो भी एक्टिविटी है वह सब जरूरी प्रैक्टिस नहीं हो सकता है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि लेकिन याची का कहना है कि जो भी कुरान में लिखा गया है वह सब ऊपर वाले का शब्द है और वह अनिवार्य है। इस पर कर्नाटक सरकार के वकील ने कहा कि हम कुरान के एक्सपर्ट नहीं हैं लेकिन कुरान का शब्द धार्मिक तो हो सकता है लेकिन हर प्रैक्टिस अनिवार्य प्रैक्टिस नहीं हो सकता है। मुहम्मद हनीफ कुरैशी केस का जिक्र करते हुए सरकार के वकील ने कहा कि बकरीद में गाय काटना भी जरूरी प्रैक्टिस नहीं है। सिर्फ इसलिए कि कोई बात कुरान में लिखी है वह जरूरी प्रैक्टिस नहीं हो सकता है।

फ्रांस-तुर्की में महिलाएं हिजाब नहीं पहनती हैं
कर्नाटक सरकार के एडवोकेट जनरल ने कहा कि अगर हम यह स्वीकार कर लें कि कुरान में जितनी भी बातें लिखी गई है सब जरूरी प्रैक्टिस है तो फिर जरूरी क्या है यह टेस्ट ही बेमानी हो जाएगा। कुरान में लिखी गई बात धार्मिक रेफरेंस हो सकता हे लेकिन वह हर बात जरूरी प्रैक्टिस नहीं हो सकता है। बड़ी संख्या में मां और बहनें फ्रांस और तुर्की में हिजाब नहीं पहनती हैं, साथ ही इससे उनके मुस्लिम होने में कोई कमी नहीं हो जाती है। बड़े शहरों में मुस्लिम हिजाब में नहीं दिखती हैं। जस्टिस हेमंत गुप्ता ने इस दौरान टिप्पणी की कि वह पटना या फिर यूपी गए थे तो वहां मुस्लिम फैमिली से भी मिले थे लेकिन किसी को हिजाब में नहीं देखा था।

अयोध्या केस का क्यों आया जिक्र
सुनवाई के दौरान कर्नाटक सरकार के वकील ने यह भी दलील दी कि जो कुरान में लिखा है वह जरूरी प्रैक्टिस नहीं है, इसके लिए कई उदाहरण पेश किए। उन्होंने कहा कि शायरा बानो से संबंधित तीन तलाक केस में इसका टेस्ट हुआ था। जस्टिस कुरियन जोसेफ ने कहा था कि कुरान के प्रत्येक आयत में जो बातें हैं उसका प्रैक्टिस बाध्यकारी नहीं है। जस्टिस नरीमन ने ईज्मा और हदीस में दर्ज तीन तलाक को जरूरी प्रैक्टिस नहीं माना था। एक अन्य प्रैक्टिस में बहुविवाह को भी जरूरी प्रैक्टिस नहीं माना गया। ज्यूडिशियल ट्रेंड यही है कि इस्लामिक किताब में जो बातें हैं और वह बाध्यकारी न हो तब तक वह बात अनुच्छेद-25 के तहत संरक्षित नहीं है। उन्होंने अयोध्या जमीन विवाद केस का हवाला दिया और कहा कि मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का अभिन्न प्रैक्टिस नहीं माना गया है। कर्नाटक सरकार के एडवोकेट जनरल ने कहा कि तमाम धार्मिक प्रैक्टिस अनुच्छेद-25 में प्रोटेक्टेड नहीं है।

स्कूल का यूनिफॉर्म अभिव्यक्ति की आजादी पर वाजिब रोक की तरह
साथ ही एडवोकेट जनरल ने यह भी दलील दी कि अनुच्छेद-19 विचार अभिव्यक्ति की बात करता है लेकिन उसमें वाजिब रोक भी है क्योंकि वह अधिकार पूर्ण अधिकार नहीं है और वाजिब रोक के दायरे में स्कूल यूनिफॉर्म आता है। राज्य सरकार का जो एक्शन है वह विचार अभिव्यक्ति के अधिकार को रोकना नहीं है बल्कि अनुशासन लाना है और अनुच्छेद-19 (2) के तहत वाजिब रोक है और स्कूल का अगर रेग्युलेशन है तो वह वाजिब है। सरकार का एजुकेशन एक्ट है और यह नियम कानून के तहत है। स्कूल यूनिफॉर्म एक रेग्युलेशन के तहत है। राज्य सरकार का सर्कुलर स्टूडेंट को स्कूल ट्रांसपोर्ट में और कैंपस में हिजाब के लिए नहीं रोक रहा है बल्कि क्लास में हिजाब पर रोक है।

अनुच्छेद-25 के तहत क्लास रूम में हिजाब पहनना मौलिक अधिकार नहीं है। इस मामले में वाजिब रोक भी है और वह रोक यूनिफॉर्म है। साथ ही एडवोकेट जनरल ने निजता के अधिकार के जजमेंट का उल्लंघन किया और कहा कि जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा है कि बिना निजता गरिमा का अधिकार नहीं है और गरिमा के बिना लिबर्टी नहीं है। लेकिन सरकार के वकील ने कहा कि कोई ड्रेस पहनना निजता के अधिकार में रखना है लेकिन यह सब इतना आसान नहीं है। उन्होंने कोर्ट के सवाल राइट टु ड्रेस और राइट टु अनड्रेस के सवाल पर भी कहा कि राइट टु ड्रेस है लेकिन यह अधिकार पूर्ण अधिकार नहीं है और सभी जगह के लिए यह अधिकार मान्य नहीं है। निजता के अधिकार भी सीमित है और केस दर केस निर्भर करेगा। लोक हित के आधार पर निजता के अधिकार सीमित हो सकते हैं।

हिजाब पर बैन नहीं सिर्फ स्कूल में यूनिफॉर्म तय
कर्नाटक सरकार की ओर से अडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने दलील दी कि हिजाब बैन को लेकर काफी हल्ला मचाया जा रहा है। लेकिन सरकार की ओर से हम साफ करना चाहते हैं कि हिजाब पर कोई बैन नहीं किया गया है। सरकार की मंशा नहीं है कि हिजाब पर बैन लगाया जाए। राज्य ने सिर्फ यूनिफॉर्म तय किया है और वह भी धार्मिक समानता वाला है। हम किसी धार्मिक गतिविधि को सेक्युलर संस्थानों में इजाजत नहीं दे सकते हैं। हम धार्मिक गतिविधियों को न तो प्रमोट करते हैं और न ही उस पर रोक लगाते हैं। धार्मिक वर्गीकरण की सेक्युलर संस्थानों में इजाजत नहीं हो सकती है। स्कूल में एक समान यूनिफॉर्म है और यह अनुच्छेद-14 के तहत है। सेक्युलर संस्थानों में धर्म के नाम पर भेदभाव नहीं हो सकता है। उन्होंने दलील दी कि कल अगर कोई बुर्के में एयरपोर्ट जाएगा तो क्या उसका चेहरा नहीं देखा जाएगा। कल को कोई कहे कि धर्म में हवन का अधिकार है तो क्यों इंडिया गेट या कोर्ट में हवन कर सकता है? धार्मिक अधिकार में संतुलन की जरूरत है। इस केस को संवैधानिक बेंच भेजने की जरूरत नहीं है। यह साधारण केस है जिसमें यूनिफॉर्म का मामला है और यह अनुशासन से संबंधित केस है।

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