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रूस के साथ दोस्ती भारत को पड़ी भारी! अमेरिका ने फिलीपींस के साथ बनाया स्क्वॉड, क्या खत्म होगा क्वाड?

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वॉशिंगटन

दक्षिण चीन सागर में ताइवान को लेकर युद्ध का खतरा बढ़ता जा रहा है। वहीं चीन और फिलीपींस के बीच हाल के दिनों में तनाव देखा गया है। इस बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने जापान, ऑस्ट्रेलियाऔर फिलीपींस के समकक्षों की मेजबानी की जिसे ‘स्कॉड’ कहा जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया, जापान, अमेरिका और भारत का एक क्वाड समूह भी है, जिसे चीन के खिलाफ बनाया गया था। लेकिन अब फिलीपींस को भारत की जगह लाने से माना जा रहा है कि क्वाड की प्रासंगिकता खत्म हो रही है। ऑस्टिन ने दावा किया कि नया क्वाड ग्रुप एक एक दीर्घकालिक सुरक्षा समूह के रूप में मजबूत हो रहा है। भारत को किनारे लगाने का सबसे बड़ा कारण रूस के साथ उसकी दोस्ती माना जा रहा है है।

क्वाड के विपरीत स्क्वॉड में अधिक आंतरिक सुसंगतता और क्षेत्र के लिए एक स्पष्ट साझा रणनीतिक दृष्टि है। क्वाड में होने के बावजूद भारत के उसके पारंपरिक साझेदार रूस के साथ घनिष्ठ संबंध हैं। यूक्रेन पर हमले के बाद जब अमेरिका ने रूस पर प्रतिबंध लगाया तो भारत ने उससे तेल खरीदा। भारत के विपरीत फिलीपींस एक अमेरिकी पारस्परिक रक्षा संधि सहयोगी है। ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के साथ अपने मौजूदा समझौतों की ही तरह वह जापान के साथ एक विजिटिंग फोर्सेज समझौते को अंतिम रूप देने को तैयार है। फिलीपींस के राष्ट्रपति मार्कोस जूनियर प्रशासन ने फिलीपींस के उन ठिकानों की संख्या में विस्तार किया है, जिन तक अमेरिका की सैन्य पहुंच है।

रूस के साथ रहा भारत
स्कॉड में शामिल होने से चीन के साथ चल रहा फिलीपींस का समुद्री संघर्ष और भी ज्यादा बढ़ेगा। लेकिन अब एक संभावित सशस्त्र संघर्ष की चिंता बढ़ी है, जो अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया तक भी पहुंच सकती है। वहीं अगर क्वाड की बात करें तो भारत ने अपना गुट निरपेक्ष रुख बरकरार रखा है। यूक्रेन पर हमले के बाद भी रूस के खिलाफ भारत नहीं गया। भारत रूस के साथ दृढ़ता से खड़ा रहा।

क्या क्वाड हो जाएगा खत्म?
स्क्वाड बनाने से सवाल उठ रहा है कि क्या क्वाड को अमेरिका खत्म करना चाहता है? एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसा बिल्कुल नहीं है। क्योंकि क्वाड का फोकस समुद्री सुरक्षा से परे गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों पर केंद्रित है। इसके अलावा इसमें स्वास्थ्य, साइबर सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, प्रौद्योगिकी, STEM रिसर्च, एचएडीआर, आपूर्ति जैसे व्यापक विषयों को शामिल किया गया है। लेकिन यह भी माना जा रहा है कि अमेरिका चीन के खिलाफ फिलीपींस को भारत के छोटे विकल्प के तौर पर लाया है। इतना ही नहीं, अमेरिका की परेशानी यह भी है कि भारत पूरी तरह पश्चिम के सुर में सुर नहीं मिलाता है। भारत एससीओ और ब्रिक्स का सदस्य है, जिसमें रूस और चीन का भी प्रतिनिधित्व है।

अमेरिका समय-समय पर दिखाता रहा है कि वह इससे खुश नहीं है। पिछले साल ऑस्ट्रेलिया में होने वाली क्वाड की समिट में अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन ने आखिरी मौके पर शामिल होने से मना कर दिया था, जिसके कारण यह मीटिंग नहीं हो सकी। इसके बाद जो बाइडेन ने भारत के गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने से भी मना कर दिया था। वहीं अगर अब क्वाड के भविष्य की बात करें तो 2024 में इस बारे में पता भी नहीं है कि क्वाड की मीटिंग होगी या नहीं होगी।

स्क्वाड पर क्या बोला चीन
स्क्वॉड में फिलीपींस के शामिल होने को लेकर कई मीडिया रिपोर्ट्स में चिंता जताई जा रही है कि यह एशिया का ‘यूक्रेन’ बन सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि फिलीपींस आसियान देशों की जगह बाहर से मदद ले रहा है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने कहा फिलीपींस को अमेरिका मैनिपुलेट कर रहा है, जिससे उसकी स्वायत्तता खो रही है और क्षेत्र में वह अमेरिका का मोहरा बनकर रह जाएगा। इससे फिलीपींस का यूक्रेनीकरण हो सकता है। चीन यहां कहना चाहता है कि अमेरिका सिर्फ हथियार देगा और लड़ना फिलीपींस को पड़ेगा। ठीक उसी तरह जैसे आज यूक्रेन रूस से लड़ रहा है।

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