नई दिल्ली
केंद्र सरकार द्वारा बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री पर बैन लगाए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक पीआईएल दाखिल की गई है। इस PIL में कहा गया है कि 2002 के गुजरात दंगों पर आधारित बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री पर केंद्र सरकार ने असंवैधानिक तरीके से बैन लगाया। पीआईएल में मामले में दोषियों के खिलाफ जांच की मांग की गई है।
एडवोकेट एमएल शर्मा द्वारा दाखिल पीआईएल में कहा गया है कि सच्चाई के डर से भारत में इस डॉक्यूमेंट्री को बैन दिया गया। इस डॉक्यूमेंट्री में जो तथ्य रिकॉर्ड किए गए हैं, वे ऐसे पीड़ितों के लिए सबूत हो सकते हैं जो अभी न्याय से वंचित हैं। पीआईएल में मोदी सरकार के 21 जनवरी के उस फैसले को रद्द करने की मांग की है, जिसके जरिए डॉक्यूमेंट्री को बैन किया गया था।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ के सामने यह PIL अर्जेंट लिस्टिंग के लिए गया। CJI चंद्रचूड़ अर्जेंट सुनवाई के लिए तैयार हो गए हैं और 6 फरवरी को सुनवाई होगी।आपको बता दें कि इस पीआईएल के अलावा वरिष्ठ पत्रकार एन राम और एडवोकेट प्रशांत भूषण ने भी एक पीआईएल दाखिल की है, जो उनके ट्वीट से बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री का लिंक हटाने के खिलाफ है। इस याचिका पर सुनवाई अगले सोमवार को होनी है।
