नई दिल्ली,
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने लश्कर-ए-तैयबा के उप-प्रमुख अब्दुल रहमान मक्की को वैश्विक आतंकी घोषित कर दिया है. अमेरिका और भारत लगातार मक्की को वैश्विक आतंकी घोषित करने की मांग कर रहे थे. पहले चीन उसे ग्लोबल आतंकी घोषित करने में अड़ंगा लगाता रहा, लेकिन यूएनएससी में उसके खिलाफ प्रस्ताव पारित पर उसे वैश्विक आतंकी घोषित कर दिया गया. भारत के इस मोस्ट वॉन्टेड आतंकवादी को पाकिस्तान में मई 2019 में गिरफ्तार किया गया था.
ऐसे हुई थी मक्की की गिरफ्तारी
वो 15 मई 2019 का दिन था. जब पाकिस्तान ने आतंकी संगठन जमात-उद-दावा (जेयूडी) के प्रमुख हाफिज सईद के साले और मुंबई हमले में मोस्ट वॉन्टेड आतंकी अब्दुल रहमान मक्की को गिरफ्तार किया था. उसकी गिरफ्तारी पंजाब प्रांत के गुजरांवाला से की गई थी. असल में मक्की की गिरफ्तारी जमात-उद-दावा (जेयूडी), फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन (एफआईएफ) और जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) से जुड़े 11 संगठनों पर बैन लगने के कुछ दिन बाद की गई थी. उसकी गिरफ्तारी को लेकर उसके समर्थकों ने हंगामा करने की कोशिश भी की थी.
मक्की ने की थी पाक सरकार की आलोचना
वैसे तो अब्दुल रहमान मक्की भारत के खिलाफ आतंकी साजिश रचने का काम किया करता था. लेकिन उस पर गिरफ्तारी की तलवार उस वक्त लटकी, जब उसने गुजरांवाला में पाकिस्तान सरकार और कुछ संगठनों के खिलाफ भाषण दिया था. मक्की ने अपने भाषण में फाइनेंसियल एक्शन टास्क फॉर्स (FATF) के फरमान पर उठाए गए कदमों की भी आलोचना की थी. यही वजह थी कि वो पाक सरकार के लिए भी परेशानी का सबब बन रहा था. लिहाजा, उसकी गिरफ्तारी में देरी नहीं की गई.
ऐसे जुटा रहा था फंड
दरअसल, अब्दुल रहमान मक्की अपने मंसूबे पूरा करने के लिए आतंकी गतिविधियों में शामिल रहता था. इसके लिए उसे फंड की ज़रूरत होती थी. लिहाजा, वह जमात-उद-दावा और फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन के नाम पर लोगों से फंड जुटाता था. ताकि वो अपने आतंकी मिशन को पूरा कर सके. लोग उसके झांसे में आकर उसे चंदा दिया करते थे. आर्थिक रूप से उसकी मदद करते थे. मई 2019 में गिरफ्तारी के बाद अब्दुल रहमान मक्की को लाहौर की जेल में रखा गया था.
भारत विरोधी है मक्की
आतंकी संगठन जमात-उद-दावा में मक्की का काफी प्रभाव था. वह आतंकी संगठन में दूसरी कमान के नेता के रूप में जाना जाता था. मक्की भारत के खिलाफ जहर उगलने से गुरेज नहीं करता था. साल 2010 में भारत विरोधी बयानों को लेकर वह सुर्खियों में आ गया था. उसने पुणे की जर्मन बेकरी में धमाके के आठ दिन पहले मुजफ्फराबाद में भाषण दिया था और पुणे समेत भारत के तीन शहरों में आतंकी हमले करने की धमकी दी थी. इसके बाद भारत की मांग पर ही अमेरिका ने मक्की को आतंकी घोषित किया था.
तालिबान और अलकायदा का करीबी है मक्की
पाकिस्तान में गिरफ्तारी से पहले अब्दुल रहमान मक्की एक वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती देते हुए कश्मीर को आजादी दिलाने की बात कहता नजर आया था. भारत के खिलाफ हमेशा जहर उगलने वाले मक्की के सिर पर करीब 13 करोड़ रुपये (20 लाख डॉलर) का इनाम है. मक्की तालिबान सरगना मुल्ला उमर और अलकायदा सरगना अल-जवाहिरी का भी बेहद करीबी रहा है.
आतंकवाद पर पाकिस्तान की कार्रवाई
ये वो दौर था, जब पूरी दुनिया से पाकिस्तान पर आतंक के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव आ रहा था. उसी के चल मक्की की गिरफ्तारी से पहले पाकिस्तान ने जमात-उद-दावा (जेयूडी), फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन (एफआईएफ) और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों पर भी कार्रवाई की थी. यह कार्रवाई नेशनल एक्शन प्लान (NAP) के तहत अंजाम दी गई थी. इसी ऑपरेशन के तहत पाक एजेंसियों ने जेयूडी और एफआईएफ के मालिकाना हक वाली 500 से अधिक संपत्तियां वहां के पंजाब प्रांत में जब्त की थी.
