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क्या सफेदपोशों का नाम लेना अतीक के लिए बन गया काल? 15 के यहां पड़ चुका है ED का छापा

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प्रयागराज

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में जिस प्रकार से मीडिया कैमरों के सामने अतीक अहमद और अशरफ की हत्या कर दी गई, उसने प्रदेश की सरकार और पुलिस के सामने सवालों के ढेर लगा दिए हैं। एक सवाल यह भी उठ रहा है कि पुलिस रिमांड में पूछताछ के दौरान सफेदपोशों को अपना नाम लिए जाने का डर था? हत्या के पीछे कहीं कोई लॉबी तो काम नहीं कर रही? सवाल इस कारण महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि हत्यारों को सुपारी दिए जाने का मामला सामने आया है। हत्याकांड में ऐसे हत्यारे सामने आए हैं, जिन्होंने इससे पहले किसी भी बड़ी वारदात को अंजाम नहीं दिया था। मतलब, नौसिखिए हत्यारों ने घटना को अंजाम दिया। इसके पीछे की वजह उनके किसी के नजर में न आ पाना बताया जा रहा है।

अतीक और अशरफ की हत्या को लेकर अब दावा किया जा रहा है कि पुलिस रिमांड के दौरान दोनों ने सफेदपोशों का नाम लिया है। 45 सफेदपोशों का नाम लिए जाने की चर्चा चल रही है। मीडिया रिपोर्ट में इन नामों को लेकर कुछ अहम खुलासे हो रहे हैं, हालांकि पुलिस खुलकर इन बातों को अब तक नहीं कह रही है। दावा किया जा रहा है कि अतीक ने 45 सफेदपोशों का नाम लिया है। इनमें से 15 सफेदपोशों के घर पर ईडी का छापा पड़ चुका है। अन्य के खिलाफ भी अब इस हत्याकांड के बाद जांच शुरू होने का दावा किया जा रहा है।

माफिया डॉन के कई राजनीतिक दलों से संबंध रहे हैं। वह भले ही कई दलों में रहा हो, उसके संबंध तमाम दलों के नेताओं से रहे हैं। ऐसे में दावा किया जा रहा है कि कुछ ऐसे राजनेताओं के नाम अतीक ने लिए हैं, जिनको लेकर हंगामा मच सकता है। अतीक ने विपक्षी पार्टियों के सफेदपोशों से संपर्क और उनके साथ कारोबारी रिश्तों का खुलासा किया है। ऐसे में यह सवाल उठने लगा है कि अतीक और अशरफ को आखिरकार कौन चुप कराना चाहते थे? वे कौन हैं, जो नहीं चाहते थे कि अतीक अहमद उनके नाम पुलिसवालों के सामने में खोले।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो माफिया डॉन ने पैसे आने के स्रोतों को लेकर भी बड़ा खुलासा किया। उसने कई बड़े उद्योगपति, बिल्डर और कारोबारियों से संपर्क में रहने की बात मानी थी। एक कारोबारी ग्रुप के प्रमुख, दो बिल्डरों और एक कार डीलर के साथ अतीक ने नजदीकी संबंध होने की बात स्वीकार की थी। अधिकांश कंपनियों में अतीक अहमद के बेनामी पैसा लगे होने की बात भी कही जा रही है। राजधानी लखनऊ के चार बिल्डरों के सज्ञथ बेनामी पार्टनरशिप का भी मामला सामने आया है। इन तमाम खुलासों के बीच सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इन 45 सफेदपोशों के नाम कब सामने आएंगे? इन पर कार्रवाई कब शुरू होगी?

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