नई दिल्ली,
हिंदू महासभा ने अतीक तथा अशरफ अहमद के हत्यारों को कानूनी मदद देने का ऐलान किया है. हिंदू महासभा के प्रमुख स्वामी चक्रपाणि ने अपनी यूपी इकाई से अतीक हत्याकांड के आरोपियों को आवश्यक कानूनी और आर्थिक मदद प्रदान करने का आदेश दिया है. चक्रपाणि के इस ऐलान के बाद बयानबाजी होना तय माना जा रहा है.
बता दें कि, माफिया अतीक अहमद और उसके चचेरे भाई अशरफ की उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी जब पुलिस दोनों को प्रयागराज के कॉल्विन अस्पताल में मेडिकल के लिए लेकर जा रही थी. इसी दौरान तीन हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी और मौके पर ही अतीक और अशरफ की मौत हो गई थी.
कौन हैं चक्रपाणि महाराज
हिन्दू संतों और साधुओं की शीर्ष हिन्दू संस्था मानी जाने वाले अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद् ने स्वामी चक्रपाणि को एक फर्जी संत की उपाधि दी थी. स्वामी चक्रपाणि उस वक्त भी खूब सुर्खियों में रहे थे जब उन्होंने वांटेड दाउद इब्राहिम की संपत्तियों को खरीद कर उसे सार्वजनिक शौचालय में तब्दील करने की बात कही थी. उन्होंने कुछ साल पहले दाउद इब्राहीम की कार को 32 हजार में खरीदा था और बाद में उसमें आग लगा थी. इसके बाद उन्हें जान से मारने की धमकी भी मिली थी.
अलग-अलग जिलों के रहने वाले हैं आरोपी
अब तक की पूछताछ में पता चला है कि अतीक और अशरफ की हत्या करने वाला लवलेश तिवारी बांदा का रहने वाला है, जबकि अरुण मौर्य कासगंज का निवासी है. वहीं तीसरा आरोपी सनी हमीरपुर जनपद से है. पूछताछ में तीनों आरोपियों ने अपना यही पता बताया है.
कौन है सनी सिंह
हमीरपुर का रहने वाला सनी सिंह हिस्ट्रीशीटर रहा है. वसूली, हत्या जैसी वारदातों को अंजाम दे चुके सनी पर 17 केस दर्ज हैं. इससे पहले सनी सिंह के भाई पिंटू सिंह ने कहा- ‘यह कुछ नहीं करता था और इसके ऊपर पहले से भी मामले दर्ज़ हैं. हम लोग 3 भाई थे जिसमें से एक की मृत्यु हो गई. यह ऐसे ही घूमता-फिरता रहता था और फालतू के काम करता रहता था. हम उससे अलग रहते हैं और बचपन में ही भाग गया था.’
लवलेश भी जेल में रहा बंद
वहीं एक अन्य आरोपी लवलेश तिवारी बांदा का रहने वाला है. लवलेश के पिता ने इस हत्याकांड के बाद बताया कि उनका लवलेश से कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने कहा, ”हमारी लवलेश से सालों से बातचीत बंद है. वह कोई काम धंधा नहीं करता. बस दिन भर नशा करता है. इसलिए काफी पहले से ही घर के सभी लोगों ने उससे बातचीत बंद कर दी है.’ दो साल पहले एक लड़की को थप्पड़ मारने के बाद लवलेश जेल में भी बंद रहा था.
अरुण मौर्या भी हिस्ट्रीशीटर
जानकारी के अनुसार, प्रयागराज के धूमनगंज मेडिकल कॉलेज में अतीक अहमद और अशरफ को गोली मारकर हत्या करने में शामिल शूटर अरुण मौर्या कासगंज के गांव बघेला पुख्ता का रहने वाला है. गांव में उसे अरुण मौर्य उर्फ कालिया के नाम से जाना जाता था. बताया जा रहा है कि जब अरुण छोटा था, तभी उसके माता-पिता की मौत हो गई थी. जब कुछ बड़ा हुआ तो वह सोरों कस्बे में जाकर रहने लगा. वर्ष 2014-15 में कासगंज बरेली-फर्रुखाबाद रेलवे मार्ग पर उझयानी और सोरों के मध्य चलती ट्रेन में लूट के बाद सिपाही की गोली मारकर हत्या कर दी थी. इस मामले में अरुण जेल गया था. उसके बाद उसके तार अपराधियों से जुड़ गए और वह लगातार अपराध की दुनिया में बढ़ता चला गया.
एनकाउंटर में मारा गया था बेटा
इससे दो दिन पहले झांसी में यूपी एसटीएफ ने अतीक अहमद के तीसरे नंबर के बेटे और उमेश पाल हत्याकांड के आरोपी असद के साथ शूटर गुलाम को एनकाउंटर में मार गिराया गया था. अतीक अपने बेटे के जनाजे में नहीं शामिल हो पाया था. वहीं एनकाउंटर पर सवाल उठने के बाद डीएम ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए हैं. इस जांच के लिए सिटी मजिस्ट्रेट को जांच अधिकारी बनाया गया है. घटना के बारे में सिटी मजिस्ट्रेट के यहां बयान दर्ज कराए जा सकते हैं.
