8.9 C
London
Saturday, May 9, 2026
Homeराष्ट्रीयकोर्ट कचहरी से यूं ही डर नहीं लगता साहब, जरा इन 1...

कोर्ट कचहरी से यूं ही डर नहीं लगता साहब, जरा इन 1 लाख लोगों का दर्द महसूस कीजिए

Published on

नई दिल्ली

तारीख पे तारीख आखिर क्यों? इसका जवाब शायद इसी बात में है कि देश की निचली अदालतों में एक लाख से अधिक केस पिछले 30 साल से पेंडिंग है। इनमें 67 हजार से अधिक आपराधिक मामले और 33,000 से अधिक दीवानी के मामले शामिल हैं। हैरानी की बात यह भी है कि इसमें 90% मामले सिर्फ चार राज्यों से ही है। कोर्ट में लंबित मामलों को लेकर कई बार सवाल उठाए जा चुके हैं। हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी पेंडिंग केस की संख्या दिनोंदिन बढ़ती ही जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस एनवी रमना ने भी इसको लेकर सवाल खड़े किए थे।

यूपी, महाराष्ट्र समेत ये 4 राज्य सबसे आगे
30 साल से अधिक समय से पेंडिंग केस के मामले में 41,210 मामलों के साथ उत्तर प्रदेश सूची में सबसे आगे है। इसके बाद महाराष्ट्र का नंबर है जहां 23,483 मामले लंबित हैं। वहीं तीसरे नंबर पर पश्चिम बंगाल का नंबर आता है जहां 14,345 केस और बिहार में 11,713 मामले पेंडिंग है। इन चार राज्यों में ही कुल लगभग 91 हजार मामले पेंडिंग है। यह बात सच है कि ये सभी राज्य बड़े हैं लेकिन यह भी समझने की जरूरत है कि भारत की आबादी का केवल 42% हिस्सा ही इन राज्यों में है और पेंडिंग केस में योगदान 90 फीसदी। दूसरे राज्यों की बात की जाए तो इसके बाद ओडिशा (4,248) और गुजरात (2,826) ही ऐसे अन्य राज्य हैं जिनमें एक हजार से अधिक मामले 30 वर्षों से अधिक समय से लटके पड़े हैं।

इस राज्य में कोई मामला नहीं, हरियाणा का भी प्रदर्शन बेहतर
चंडीगढ़, दमन और दीव, दादरा और नगर हवेली, लद्दाख, मिजोरम, नागालैंड और सिक्किम में तीन दशक से अधिक समय से कोई पेंडिग केस का मामला नहीं है। यह संख्या उत्तराखंड और पुडुचेरी के लिए एक-एक है, जबकि हिमाचल प्रदेश और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के लिए यह 10 से कम है। बड़े राज्यों में केवल 14 ऐसे मामलों के साथ हरियाणा में सबसे कम संख्या है। मेघालय, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, छत्तीसगढ़, असम, मणिपुर और जम्मू-कश्मीर इन राज्यों में ऐसे मामलों की संख्या 100 से कम है। बाकी राज्यों के लिए यह संख्या 100 से 1,000 के बीच है।

इन आंकड़ों से समझिए पेंडिंग केस की पूरी कहानी
करीब 5 लाख (4.9 लाख) मामले 20 से 30 साल से पेंडिंग हैं। 28. 7 लाख मामले 10-20 साल से लंबित हैं। राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि एक दशक से अधिक समय से लंबित मामलों की कुल संख्या 34. 6 लाख हो गई है। सिक्किम में 99.6% से अधिक लंबित मामले पांच साल से कम पुराने हैं और बड़े राज्यों में, पंजाब, हरियाणा, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में 90% से अधिक लंबित मामले हैं। यह अनुपात दिल्ली, तेलंगाना, असम, मध्य प्रदेश, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, जम्मू-कश्मीर और गुजरात के लिए 80% और 90% के बीच है। पांच साल से कम पुराने मामलों की हिस्सेदारी यूपी, ओडिशा और बिहार में 60% से 70% के बीच है और पश्चिम बंगाल के लिए 60% से थोड़ा कम है।

Latest articles

राज्यमंत्री कृष्णा गौर ने की विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा

भोपाल। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर सीहोर स्थित कलेक्ट्रेट...

बीएचईएल में पांच दिवसीय पूर्ण अनुवाद प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन

भोपाल। महाप्रबंधक (मानव संसाधन) टी. यू. सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को संपन्न हुआ।...

बीएचईएल में 4 वर्ष बाद होने वाले संयुक्त समिति चुनाव को लेकर एआईबीईयू ने कॉर्पोरेट प्रबंधन को सौंपा ज्ञापन

भोपाल। बीएचईएल भोपाल में 4 वर्ष बाद होने वाले संयुक्त समिति (जॉइंट कमेटी), प्लांट...

बीएचईएल में AGM से GM पदोन्नति हेतु इंटरव्यू

भोपाल। भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) में वर्ष 2026 की पदोन्नति प्रक्रिया के अंतर्गत...

More like this

शुभेंदु अधिकारी बनेंगे बंगाल के अगले CM, कल सुबह लेंगे शपथ

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के अगले सीएम शुभेंदु अधिकारी होंगे, ये फैसला BJP विधायक दल...

तमिलनाडु में विजय के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ, CPM/CPI और VCK समर्थन देने को तैयार

नई दिल्ली। तमिलनाडु में टीवीके प्रमुख विजय के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो...