नई दिल्ली
देश के बड़े उद्योगपति साइरस मिस्त्री के कार हादसे में निधन से सड़क सुरक्षा की चिंता फिर से बहस के केंद्र में है। देश में सड़कों के जानलेवा हालात को लेकर लोग चिंता जता रहे हैं तो यात्री वाहनों के अंदर सुरक्षा सुविधाओं पर भी खूब बहस हो रही है। दरअसल, मिस्त्री की कार जिस मुंबई-अहमदाबाद हाइवे पर फर्राटे भर रही थी, उसमें कई खामियां हैं। लोग सड़क की डिजाइन से लेकर ट्रैफिक सिस्टम तक की शिकायतें करते रहते हैं। ऐसा नहीं है कि यह हाल सिर्फ मुंबई-अहमदाबाद हाइवे का ही है, देश के बाकी हाइवेज भी इन्हीं कमियों के कारण अकाल मृत्यु की वजह बनते हैं। आंकड़े भी यही बताते हैं कि जानलेवा सड़कों के मामले में भारत दुनिया में शीर्ष पर है। आपको भी ये आंकड़े देखने चाहिए ताकि समझ सकें कि 21वीं सदी में भी हमारी सरकारें किस तरह बुनियादी सुविधाएं देने में बुरी तरह नाकाम रही हैं।
घातक सड़क हादसों में भारत टॉप पर
सेवलाइव फाउंडेशन के आंकड़े बताते हैं कि पिछले वर्ष 2021 में भारत प्रति 1,000 सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों के मामले में दुनिया में सबसे आगे है। तकनीकी भाषा में इसे रोड क्रैश सिवयरिटी कहा जाता है जो भारत में 38.6 है। यानी भारत में अगर 1,000 सड़क दुर्घटनाएं होती हैं तो औसतन 38.6 लोग मारे जाते हैं। यह दर 2021 की थी जो एक वर्ष पहले 2020 में 37.5 से ज्यादा है।
साल 2016 के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, भारत दुनिया के उन 20 देशों की लिस्ट में टॉप पर है जहां रोड क्रैश सिवियरिटी सबसे ज्यादा है। इस मामले में भारत 31.7 पहले जबकि चीन 29.4 के साथ दूसरे नंबर पर है।
2021 में 4 लाख से ज्यादा सड़क हादसे
नैशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2021 में देश ने सड़क हादसों के 4,03,116 मामले देखे जो वर्ष 2020 में 3,54,796 मामलों से ज्यादा हैं। इस दौरान रोड एक्सिडेंट्स में मौतों की संख्या में भी 16.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई। 2020 में सड़क हादसों में 1,33,201 लोगों ने जान गंवाई थी। 2021 में यह आंकड़ा बढ़कर 1,55,622 हो गया।
सड़क हादसों में हुई मौतों का राज्यवार आंकड़ा
एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि उत्तर प्रदेश में सड़क हादसों में सबसे ज्यादा मौतें हुईं। उसके बाद तमिलनाडु और महाराष्ट्र के नंबर आते हैं। वर्ष 2021 में देश में सड़क हादसों से हुईं कुल मौतों में इन तीन राज्यों की हिस्सेदारी क्रमशः 14 प्रतिशत, 9.88 प्रतिशत और 8.94 प्रतिशत है।
आम तौर पर सड़क हादसों में मरने वालों से ज्यादा तादाद घायलों की होती है। हालांकि, मिजोरम, पंजाब, झारखंड और उत्तर प्रदेश में यह मामला उलटा है। यानी, इन राज्यों में हुए सड़क हादसों में कम संख्या में लोग घायल हुए जबकि मौतों की संख्या ज्यादा रही। मिजोरम में 64 रोड एक्सिडेंट्स हुए और इतनी ही मौतें हुईं जबकि 28 लोग जख्मी हुए। पंजाब में 6,097 सड़के हादसों में 4,516 मौतें हुईं जबकि 3,034 लोग जख्मी हुए। झारखंड में 4,728 रोड एक्सिडेंट्स हुए जिनमें 3,513 मौतें हुईं जबकि 3,227 घायल हुए। वहीं, उत्तर प्रदेश में कुल 33,711 सड़क दुर्घटनाओं में 21,792 लोगों का अकाल मृत्यु हो गई जबकि 21,792 लोग घायल हुए।
2021 में दोपहिया वाहनों के हादसों में सबसे ज्यादा 69,240 मौतें हुईं। उसके बाद कार हादसों में 23,531 जबकि ट्रकों और लॉरियों के हादसों में 14,622 जानें गईं। इस तरह, सड़क हादसों में हुईं कुल मौतों में बाइकों की हिस्सेदारी 44.5 प्रतिशत, कारों की 15.1 प्रतिशत जबकि ट्रकों/लॉरियों की 9.4 प्रतिशत रही।
दोपहिया वाहनों से सबसे ज्यादा 8,259 मौतें तमिलनाडु में जबकि 7,429 मौतें उत्तर प्रदेश में रहीं। एसयूवी/कार/जीप एक्सिडेंट में सबसे ज्यादा 4,039 मौतें उत्तर प्रदेश में हुईं। वहीं, ट्रकों/लॉरियों/मिनी ट्रकों के हादसों में सबसे ज्यादा 3,423 मौतें मध्य प्रदेश में हुईं। वहीं, वहीं बस हादसों में सबसे ज्यादा 1,337 मौतें उत्तर प्रदेश में हुईं जबकि 551 मौतों के साथ तमिलनाडु दूसरे नंबर पर है। बिहार 2,796 मौतों के साथ पैदल यात्रियों की मौतों के मामले में देश में अव्वल रहा।महीने के लिहाज से जनवरी सबसे घातक साबित हुआ जब कुल 40,235 मौतें सड़क हादसों में हुईं। इस महीने सबसे ज्यादा 5,322 मौतें तमिलनाडु में हुईं।

