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‘मम्मा, हम मुस्लिम लोग गंदे होते हैं?’ बच्चों के दिमाग में नफरती जहर कौन भर रहा

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नई दिल्ली

करीब 30 साल पहले प्रयागराज के एक स्कूल की बात है। विद्यालय में वंदना होती थी तो सभी बच्चे पूरी निष्ठा के साथ हाथ जोड़कर खड़े रहते थे। तब नाम भले ही किसी का शरीफ या इशरार हो, पर वहां किसी तरह का भेदभाव नहीं होता था। बच्चों के मन में हिंदू-मुस्लिम जैसी कोई बात नहीं होती थी। बच्चे बड़े हुए तब पता चलता था कि फला दोस्त मुस्लिम था। धर्म अलग होने से आखिर क्या व्यवहार भी बदल जाता है? आज यह सवाल खड़ा होने की एक बड़ी वजह है। सोशल मीडिया पर दिल्ली के एक मां ने अपनी बेटी के साथ स्कूल में घटी घटना शेयर की है। इससे यह सवाल उठता है कि आखिर पढ़ने के लिए स्कूल जाने वाले नन्हे-मुन्ने बच्चों के दिमाग में ‘नफरती जहर’ कौन घोल रहा है?

यहां हम बच्ची की तस्वीर और उसके परिजन का नाम सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं। पोस्ट में अभिभावक ने लिखा है, ‘आज मेरी बेटी का नए स्कूल में दूसरा दिन था। बेटी ने घर आते ही मुझसे रोते हुए पूछा- मम्मा, हम मुस्लिम लोग बहुत गंदे होते हैं? मैं हैरान थी उसके मुंह से ये बातें सुनकर। मैंने उससे पूरी बात सुनी तो मालूम हुआ कि आज मेरी बेटी को उसकी हमउम्र लड़की ने सवाल किया और उसके मुंह पर थूक दिया।’ वह बच्ची क्लास में बगल में ही बैठी थी।

अभिभावक ने लिखा है कि जब बच्ची ने टीचर को बताया तो उन्होंने उस मासूम बच्ची को समझाया। उन्होंने लिखा, ‘नफरत का जहर मासूम बचपन को अपनी गिरफ्त में ले चुका है। स्कूल बहुत नामी गिरामी है उस स्कूल का नाम नहीं बताना चाहती हूं क्योंकि इसमें स्कूल प्रशासन का कोई दोष मुझे नजर नहीं आ रहा। जाहिर सी बात है कि इतने बड़े स्कूल में आने वाले बच्चे भी संभ्रांत परिवार से आते होंगे। अब सवाल उठता है कि आखिर उस बच्ची को अभी से नफरती परमाणु बम क्यों बनाया जा रहा है?’

उन्होंने बच्ची की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि बच्चे देश का भविष्य होते हैं। क्या हम अंदाजा भी लगा पा रहे हैं कि हमारे देश का भविष्य क्या होगा? आज जिस नफरत का सामना मेरी मासूम बेटी को करना पड़ा है, मैं नहीं चाहती हूं कि उस नफरत का सामना किसी और मासूम बच्चे को करना पड़े। बच्ची के अभिभावक ने सवाल किया कि इस सबका दोष किसे दूं? उस मासूम बच्ची के मां-बाप को? या दिन रात हिंदू-मुस्लिम करने वालों को?

यह सवाल भले ही एक अभिभावक ने उठाया है लेकिन पूरे समाज को इस बारे में सोचने की जरूरत है। हमारा रवैया, हमारी सोच, टीवी डिबेट, घरों में चर्चाएं, राजनीति की दिशा हर तरफ सोचना और समझना होगा। क्या हमारे किसी रवैये से घर में पढ़ाई करने वाले कोमल मन में कुछ गलत बातें तो घर नहीं कर रही हैं। सोशल मीडिया पर डिबेट शुरू हो गई लेकिन जरूरत मंथन की है।

सोशल मीडिया पर अभिभावक के पोस्ट के जवाब में एक शख्स ने मशहूर शायर का वीडियो शेयर किया। इसके बोल हैं-
जहरीली घर की हवाएं हो गईं
शराब से महंगी दवाएं हो गईं

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