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5 साल पहले NRC में नहीं आया था नाम, डिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

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नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने उस महिला की याचिका पर केंद्र और असम सरकार से जवाब तलब किया है, जिसे विदेशी घोषित कर दिया गया था। महिला का नाम अंतिम राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) से बाहर कर दिया गया था। शीर्ष अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि महिला के निर्वासन के लिए कोई कदम न उठाया जाए। जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के जून 2019 के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई पर सहमति जताई है।

जून 2017 में घोषित किया था विदेशी
बोंगाईगांव स्थित विदेशी न्यायाधिकरण ने जून 2017 में एक आदेश जारी कर महिला को विदेशी घोषित कर दिया था, जिसके खिलाफ महिला ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था लेकिन उसे वहां से राहत नहीं मिली थी तथा उसकी याचिका खारिज कर दी गयी थी। महिला पर आरोप है कि वह 25 मार्च, 1971 के बाद अवैध रूप से बांग्लादेश से भारत में प्रवेश की थी।

तीन सप्ताह में देना होगा जवाब
महिला की ओर से पेश अधिवक्ता पीयूष कांति रॉय ने शीर्ष अदालत को अवगत कराया कि याचिकाकर्ता के परिवार के अन्य सभी सदस्यों को एनआरसी में शामिल किया गया है। पीठ ने कहा, ‘‘नोटिस जारी किया जाए, जिसका जवाब तीन सप्ताह में देना होगा।’’ इसके साथ ही न्यायालय ने मामले की सुनवाई 17 अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दी।

माता-पिता, भाई-बहन सभी भारत के नागरिक
शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को पारित अपने आदेश में कहा, ‘‘(मामले के) सूचीबद्ध होने की अगली तारीख तक याचिकाकर्ता के निर्वासन के लिए कोई कदम नहीं उठाया जाएगा।’’ याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि वह जन्म से भारत की नागरिक है। याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता के माता-पिता, भाई-बहन और पति सभी भारत के नागरिक हैं।

डॉक्यूमेंट पर नहीं किया विचार, घोषित कर दिया था विदेशी
याचिका में कहा गया है, ‘‘हालांकि, ट्रिब्यूनल के साथ-साथ गौहाटी हाईकोर्ट ने भी विभिन्न प्रदर्शित दस्तावेजों पर विचार किये बिना याचिकाकर्ता को विदेशी घोषित कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप गंभीर अन्याय हुआ है।’’ याचिका में कहा गया है कि एनआरसी के मसौदे में याचिकाकर्ता का नाम उसके पूरे परिवार के सदस्यों के साथ था।

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