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पाकिस्तान को मिली आखिरी ‘आसमानी आंख’, भारत कोसों पीछे, इतना जरूरी क्यों है AWACS?

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इस्लामाबाद:

स्वीडिश कंपनी साब ने पाकिस्तान को ऑर्डर किए गए साब 2000 एरीये एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल एयरक्राफ्ट में से आखिरी विमान सौंप दिया है। ऑर्डर किए गए साब 2000 एरीये विमानों में से आखिरी विमान 2 जुलाई, 2024 को मिन्हास एयर बेस पर पाकिस्तान को डिलीवर किया गया, जो इन विमानों के बेड़े का होम बेस है। इस डिलीवरी के साथ, पाकिस्तान वायु सेना के पास अब इस प्रकार के नौ विमान हैं, जो भारत के साथ सीमा पर गश्त करने में सक्रिय रूप से शामिल हैं। अंतिम वितरित विमान को तीसरे एयरबोर्न अर्ली वार्निंग स्क्वाड्रन में तैनात किया जाएगा, जो यूनिट को एयर बेस पर तैनात लड़ाकू विमानों के साथ समन्वय करने में भी मदद करेगा।

पाकिस्तान ने कब दिया था ऑर्डर
पाकिस्तान ने स्वीडिश कंपनी साब के साथ 2006 में साब एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एयरक्राफ्ट की खरीद के लिए एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे। उस समय, पाकिस्तान ने छह साब 2000 एरीये विमानों का ऑर्डर दिया था, लेकिन आर्थिक कठिनाइयों के कारण, ऑर्डर को घटाकर चार यूनिट कर दिया गया था। 2017 और 2020 में, देश ने हर साल तीन विमानों का ऑर्डर दिया। अब पाकिस्तानी रक्षा मंत्रालय ने बताया है कि वह एक अतिरिक्त ऑर्डर देना चाहता है।

भारत के खिलाफ बड़ी तैयारी में पाकिस्तान
भारत के साथ बिगड़ते संबंधों के कारण, पाकिस्तानी सरकार आधुनिक लड़ाकू विमानों सहित नवीनतम हथियारों की खरीद के लिए बड़े ऑर्डर दे रही है। मिलिटर्नी की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी पायलटों ने चीनी पांचवीं पीढ़ी के जे-31 लड़ाकू विमानों पर प्रशिक्षण शुरू कर दिया है। नए विमान संभावित रूप से पाकिस्तान की वायु सेना की क्षमताओं को बढ़ाएंगे और देश को संयुक्त विमानन परियोजनाओं पर अधिक निकटता से सहयोग करने की अनुमति देंगे।

भारत के पास कितने अवाक्स
भारतीय वायु सेना तीन रूसी IL-76 ‘फाल्कन’ अवाक्स और दो इंबरर नेत्र अर्ली वॉर्निंग एयरक्राफ्ट को संचालित करती है। इनमें से अधिकतर अवाक्स का संचालन चीन और पाकिस्तान की सीमा पर किया जाता है। अगर कोई अवाक्स मेंटीनेंस के लिए जाता है तो इसकी संख्या और ज्यादा कम हो जाती है। इससे भारत की आसमान से दुश्मन पर नजर रखने की क्षमता भी प्रभावित होती है। अवाक्स सिस्टम दुश्मन के क्षेत्र में अंदर तक जानकारी जुटाने के लिए लंबी दूरी के रडार से लैस होता है। यह दुश्मन की हर एक हवाई गतिविधि के बारे में अग्रिम जानकारी प्रदान करके युद्ध के समय महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

अवाक्स सिस्टम जरूरी क्यों
अवाक्स प्लेटफॉर्म शक्तिशाली ग्राउंड बेस्ड रडार की सीमित क्षमताओं के पार जाकर जानकारी जुटाते हैं। अवाक्स गतिशील होते हैं और विभिन्न ऊंचाइयों पर उड़ सकते हैं। इससे उन्हें कम ऊंचाई पर उड़ने वाली मिसाइलों, विमानों या पृथ्वी की वक्रता के कारण जमीन पर मौजूद रडार की दृष्टि में न आने वाले वस्तुओं की पहचान भी कर पाते हैं। अवाक्स एक व्यापक मोर्चे को कवर कर सकता है, जिससे यह जमीन पर मौजूद रडार और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के साथ समन्वय करके एक गहन नेटवर्क वाली एकीकृत वायु रक्षा (आईएडी) बना सकते हैं। यह दुश्मन के हवाई क्षेत्र पर भी नजर रख सकते हैं।

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