नई दिल्ली,
चंडीगढ़ मेयर चुनाव में रिटर्निंग ऑफिसर रहे अनिल मसीह ने मतपत्रों से छेड़छाड़ पर गलत बयान देने के लिए शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी. मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने अनिल मसीह के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 340 के तहत कार्यवाही शुरू की थी, क्योंकि उन्होंने मतपत्रों से छेड़छाड़ करके 8 वोटों को अवैध कर दिया था और कोर्ट में गलत बयान दिया था.
संक्षिप्त सुनवाई के दौरान, अनिल मसीह की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने पीठ से कहा, “उन्होंने इस पर बिना शर्त माफी मांगी है और केवल यही कह सकता हूं कि वह भारी दबाव में थे. मैंने खुद उनसे बात की थी और वह अपने आचरण के लिए माफी मांग रहे हैं. वह अपना पहला हलफनामा वापस ले लेंगे.”
मैं मानसिक आघात और तनाव में था: मसीह
दरअसल, अपने पहले हलफनामे में मसीह ने दावा किया था कि AAP नेता द्वारा आठ मतपत्रों को खराब कर दिया गया था. यह भी कहा था कि वीडियो लीक के बाद वह डिप्रेशन में थे और इसलिए मुख्य न्यायाधीश द्वारा पूछे गए सवालों का सही उत्तर नहीं दे सके. हलफनामे में लिखा है, “मैं मानसिक आघात और तनाव में था. अदालत में तनावपूर्ण माहौल था, तीखी बहसें हुईं, जिसका मुझ पर असर पड़ा. जब मैं अदालत में सवालों के जवाब दे रहा था, उस दौरान मैं भारी दवाएं ले रहा था.”
सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में घोषणा की थी कि आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार कुलदीप कुमार चंडीगढ़ नगर निगम के मेयर पद के लिए वैध रूप से निर्वाचित उम्मीदवार हैं और कहा था कि लोकतंत्र में वैधता और विश्वास बनाए रखने के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव जरूरी है.विस्तृत आदेश में कहा गया था, “इस अदालत ने लगातार माना है कि स्वतंत्र और स्वतंत्र चुनाव संविधान की मूल संरचना का हिस्सा हैं. स्थानीय भागीदारी स्तर पर चुनाव देश में बड़े लोकतांत्रिक ढांचे के सूक्ष्म जगत के रूप में कार्य करते हैं.”
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी कड़ी फटकार
बता दें कि आम आदमी पार्टी की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान मेयर चुनाव की प्रक्रिया पर चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने प्रशासन और रिटर्निंग अफसर अनिल मसीह को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा था कि ये लोकतंत्र का मजाक है. कोर्ट ने कहा था कि इस चुनाव में रिटर्निंग अफसर की हरकत के वीडियो देखकर तो साफ है कि लोकतंत्र की हत्या हुई है. ये रिटर्निंग ऑफिसर क्या कर रहा है? हम नही चाहते कि देश में लोकतंत्र की हत्या हो. हम ऐसा नहीं होने देंगे. ऐसी स्थिति में सुप्रीम कोर्ट आंखें बंद कर नहीं बैठा रहेगा. सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणी मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव के दौरान मतदान और मतगणना के समय का वीडियो देखकर की थी.
‘कैमरे की तरफ क्यों देख रहे थे?’
कोर्ट में दिखाई गई वीडियो क्लिप उस समय की थी, जब वोट अयोग्य ठहराए जा रहे थे. सुप्रीम कोर्ट ने इस चुनाव में रिटर्निंग ऑफिसर अनिल मसीह को भी पेश होने का निर्देश दिया था. उसके बाद रिटर्निंग ऑफिसर सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए. CJI ने पूछा कि रिटर्निंग ऑफिसर कौन होता है और कैसे नियुक्त होता है? उन्होंने रिटर्निंग ऑफिसर से सवाल पूछे कि आप कैमरे की तरफ क्यों देख रहे थे?
मसीह ने कोर्ट में दिए थे ये बयान
रिटर्निंग अफसर अनिल मसीह ने कहा था कि वहां कैमरे की ओर बहुत शोर था, इसलिए मैं वहां देख रहा था. कोर्ट ने पूछा कि आपने कुछ बैलेट पेपर पर X मार्क लगाया या नहीं? मसीह ने कहा- हां, मैंने आठ पेपर पर लगाए थे. लेकिन आम आदमी पार्टी के मेयर प्रत्याशी ने आकर बैलेट पेपर झपट लिए और फाड़कर भागे थे. कोर्ट ने पूछा कि लेकिन आप क्रॉस क्यों लगा रहे थे? किस नियम के तहत आपने ये कार्रवाई की?
