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राजस्थान में BJP के वरिष्ठ नेताओं में घमासान, जयपुर शहर सहित 17 जिलों में जिलाध्यक्ष का चुनाव अटका

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जयपुर:

कहने तो सभी राजनैतिक पार्टियों के नेता गुटबाजी से इनकार करते हुए एकजुट होने के दावे करते हैं, लेकिन अमूमन सभी दलों में गुटबाजी होना लाजमी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता अपने चहेतों को आगे बढ़ाने के लिए संगठन में पदों पर नियुक्ति दिलाने की कोशिश में लगे रहते हैं। जब संगठन में पदाधिकारियों की नियुक्ति का समय आता है, तब वरिष्ठ नेताओं की आपसी खींचतान सामने आ जाती है। भाजपा के प्रदेश संगठन में चुनाव होने हैं। चुनाव प्रक्रिया फरवरी के पहले सप्ताह तक पूरी हो जानी चाहिए थी, लेकिन आपसी खींचतान के चलते पूरी नहीं हुई। संगठन महासचिव बीएल संतोष के दखल के बाद ब्लॉक और मंडल अध्यक्षों का निर्वाचन किया गया। जिला अध्यक्षों और प्रदेश संगठन के चुनाव अभी तक नहीं हुए हैं।

प्रदेश अध्यक्ष के लिए भी होनी है निर्वाचन प्रक्रिया
मदन राठौड़ राजस्थान भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष हैं, लेकिन पार्टी संविधान के मुताबिक, फरवरी के पहले सप्ताह में निर्वाचन प्रक्रिया होनी थी। 5 फरवरी तक आवेदन, 6 फरवरी को आवेदन की जांच, 7 फरवरी तक नाम वापसी और फिर जरूरत पड़ने पर 8 फरवरी को चुनाव प्रक्रिया अपनाना तय था। लेकिन, अभी तक यह प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। हालांकि यह तय है कि भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ही रहेंगे।

निर्वाचन प्रक्रिया एकाध दिन में औपचारिकता के तौर पर पूरी की जाएगी। वे अकेले ही नामांकन दाखिल करेंगे और निर्विरोध निर्वाचन तय है। प्रदेशाध्यक्ष का निर्वाचन तो राष्ट्रीय नेतृत्व तय करता है, लेकिन जिला अध्यक्षों को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में रस्साकशी चल रही है। यही वजह से ही अभी तक 17 जिलों में अध्यक्ष का चुनाव नहीं किया जा सका है।

44 में से 27 जिलों में हुआ चुनाव
भाजपा में संगठनात्मक दृष्टि से कुल 44 जिले हैं। जिला अध्यक्षों की नियुक्ति और चुनाव प्रक्रिया के लिए विधायकों, मंत्रियों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की जिम्मेदारियां दी गई थी। 44 में से 27 जिलों में जिला अध्यक्षों का चुनाव कर लिया गया। वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में 27 जिलों में अध्यक्ष का चुनाव निर्विरोध रूप से संपन्न कराया गया। शेष 17 जिलों में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की एक राय नहीं बनने से जिला अध्यक्षों का चुनाव नहीं हो सका है। इन 17 जिलों से पार्टी के दिग्गज नेता ताल्लुक रखते हैं। वे अपने अपने चहेतों को आगे लाना चाहते हैं। ऐसे में आपसी खींचतान के चलते चुनाव प्रक्रिया देरी हो रही है।

इन 17 जिलों में नहीं हो सके चुनाव
जयपुर शहर, जयपुर शहर उत्तर, दौसा, झालावाड़, सवाई माधोपुर, बारां, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, बूंदी, बीकानेर शहर, टोंक, करौली, धौलपुर, झुंझुनूं, भीलवाड़ा और जोधपुर उत्तर में भाजपा जिला अध्यक्षों का चुनाव नहीं हो सका है। अब ऐसा माना जा रहा है कि इन 17 जिलों में चुनाव प्रक्रिया नहीं अपनाई जाएगी। आगामी दिनों में प्रदेश अध्यक्ष ही उच्च पदाधिकारियों की राय लेकर सीधे नियुक्ति प्रदान करेंगे। पार्टी संविधान के मुताबिक प्रदेशाध्यक्ष के चुनाव के लिए कम से कम 23 जिला अध्यक्षों का चुनाव होना अनिवार्य है। 27 जिलों में जिला अध्यक्षों की चुनाव प्रक्रिया अपनाई जा चुकी है। ऐसे में अब शेष रहे जिलों में चुनाव प्रक्रिया अपनाया जाना जरूरी नहीं है।

दिग्गज नेताओं में फंसा है दांव
जिन जिलों में जिला अध्यक्षों का चुनाव नहीं हो सका है। वे जिले पार्टी के दिग्गज नेताओं के क्षेत्र हैं। जैसे जयपुर शहर से सीएम भजनलाल शर्मा, डिप्टी सीएम दीया कुमारी और पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया के निर्वाचन क्षेत्र हैं। तीनों चाहते हैं कि उनके समर्थकों को संगठन में काम करने का मौका मिले। चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़ जिले पार्टी के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष और लोकसभा सांसद सीपी जोशी का निर्वाचन क्षेत्र है। झालावाड़ पूर्व सीएम वसुंधरा राजे का निर्वाचन क्षेत्र है और धौलपुर उनका गृह जिला है।

कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा का निर्वाचन क्षेत्र सवाई माधोपुर है और उनका गृह जिला दौसा है। इन वरिष्ठ नेताओं के जिलों में अभी तक जिला अध्यक्षों का चुनाव नहीं कराया जा सका है। इसी तरह अन्य जिलों में भी दिग्गज नेताओं की पसंद और संगठन के पदाधिकारियों की एक राय नहीं होने की वजह से चुनाव प्रक्रिया अटकी हुई है।

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