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सेम सेक्स मैरिज: क्यों डर रही सरकार, क्या कह रहा सुप्रीम कोर्ट, 8 पॉइंट्स में हर बारीक बात समझिए

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नई दिल्ली

समलैंगिक विवाह यानी सेम सेक्स मैरिज का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे कानूनी मान्यता दिए जाने का अनुरोध करने वाली याचिकाओं को पांच जजों की संविधान पीठ के पास भेज दिया है। चीफ जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ की अगुआई वाली पीठ ने कहा कि यह मुद्दा एक तरफ संवैधानिक अधिकारों और दूसरी ओर विशेष विवाह अधिनियम सहित कई कानूनों से संबंधित है, जिसका एक दूसरे पर असर पड़ता है। इससे पहले केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट के सामने इन याचिकाओं का विरोध किया। सरकार की तरफ से कहा गया कि समलैंगिक विवाह को मान्यता देने से पर्सनल लॉ और स्वीकृत सामाजिक मूल्यों के बीच नाजुक संतुलन गड़बड़ा जाएगा। दूसरी तरफ, वे याचिकाकर्ता हैं जिन्होंने समलैंगिक जोड़ों के शादी करने के अधिकारों को मान्यता देने की मांग की है। वे निजता के अधिकार और भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को अपराध की श्रेणी से बाहर करने के अदालत के फैसले के आधार पर जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार, गरिमा के अधिकार समेत अन्य संवैधानिक अधिकारों की दुहाई दे रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सरकार क्यों डर रही है? सुप्रीम कोर्ट का क्या कहना है? 8 पॉइंट्स में पूरी बात समझ लीजिए।

​1-सुप्रीम कोर्ट में कहां पहुंचा है यह केस​
सुप्रीम कोर्ट ने मामला पांच जजों की संविधान पीठ के पास भेज दिया है। अब आगे सुनवाई 18 अप्रैल को होनी है। अभी बेंच में चीफ जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस जे.बी. पारदीवाला शामिल थे। पांच जजों की पीठ के सामने सुनवाई की सीधा प्रसारण किया जाएगा, जैसा संविधान पीठ के समक्ष पहले भी सुनवाई के दौरान होता आ रहा है।

2- पांच जजों की यह बेंच क्या है, क्या पावर हैं
जब कोई गूढ़ कानूनी मसला आता है तो सुप्रीम कोर्ट मामले को संविधान पीठ के पास भेजता है। हालांकि इस तरह की पीठ का गठन आए दिन नहीं होता है। इसमें पांच या उससे ज्यादा जज शामिल होते हैं। आमतौर पर ज्यादातर मामलों को दो या तीन जज ही सुनते हैं। अनुच्छदे 145 (3) में प्रावधान है कि कानून के महत्वपूर्ण प्रश्न से जुड़े किसी भी मामले में फैसला लेने के लिए पीठ में जजों की न्यूनतम संख्या पांच होगी। संविधान पीठ का फैसला बहुमत के आधार पर आता है। संविधान पीठ के फैसले बाध्यकारी होते हैं। 7 और 9 जजों की संविधान पीठ भी बन चुकी है और उसने ऐतिहासिक फैसले दिए हैं।

​3- सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी क्या है​
चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़- ​जरूरी नहीं है कि लेस्बियन या गे कपल का गोद लिया बच्चा भी लेस्बियन या गे हो। यह बच्चे के पर्सेप्शन पर निर्भर करता है।

चीफ जस्टिस- यह काफी महत्वपूर्ण मसला है। संविधान के अनुच्छेद 145 (3) के तहत पांच जजों की संविधान पीठ अब इस मामले का फैसला करेगी।

4- मोदी सरकार इस मामले पर क्या सोचती है
सरकार ने सीधे तौर पर सेम सैक्स मैरिज का विरोध किया है। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि अगर समलैंगिक विवाह को मान्यता दी जाती है तो इसका गोद लेने जैसे दूसरे कानूनों पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है। सरकार इसे भारतीय समाज के लिए ठीक नहीं मानती है। कानून मंत्री किरेन रीजिजू ने कहा है कि सरकार व्यक्तिगत स्वतंत्रता और लोगों की गतिविधियों में हस्तक्षेप नहीं करती है लेकिल विवाह से जुड़ा मामला नीतिगत विषय है।

​5- मोदी सरकार की 5 बड़ी दलीलें क्या हैं​

  • समाज कैसे विकसित हो, सुप्रीम कोर्ट फैसला लेने की एक बड़ी जिम्मेदारी निभा रहा है। अगर सेम-सेक्स मैरिज को मान्यता मिलती है तो गोद लेने का सवाल भी उठेगा।
  • संसद को इस पर डिबेट करना है कि समलैंगिक पैरेंट्स के बच्चे पर कैसा प्रभाव पड़ेगा।
  • समलैंगिक विवाह के मुद्दे पर दोनों पक्षों की दलीलों में कटौती न की जाए क्योंकि इस फैसले का पूरे समाज पर प्रभाव पड़ेगा।
  • सरकार ने कहा कि एक रिश्ते को कानूनी मंजूरी देना अनिवार्य रूप से विधायिका का काम है।
  • समलैंगिक विवाहों या व्यक्तियों के बीच संबंधों को मान्यता नहीं है, लेकिन वे गैरकानूनी नहीं हैं।
  • विपरीत लिंग के लोगों के बीच होने वाले विवाह को जो विशेष दर्जा प्राप्त है, उसे संविधान के अनुच्छेद 15(1) के तहत समलैंगिक कपल के साथ भेदभाव या विपरीत लिंगी जोड़े के साथ विशेष व्यवहार नहीं माना जा सकता है।

समलैंगिक कपल साथ रहते हैं लेकिन उनकी तुलना भारतीय परिवार से नहीं की जा सकती है जिसमें एक पति और दूसरी पत्नी होती है। उनकी शादी के बाद बच्चे होते हैं।
– केंद्र सरकार, सुप्रीम कोर्ट में

​6- सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका कब किसने लगाई
गे कपल की ओर से दो PIL दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता सुप्रियो चक्रवर्ती और अभय डांग ने कहा है कि वे 10 साल से कपल की तरह रह रहे हैं। वे शादी करना चाहते हैं। दो साल पहले उन्होंने सेरेमनी भी की थी। उनके माता-पिता भी रिलेशनशिप पर राजी हैं। एलजीबीटीक्यू कम्युनिटी के लोगों की शादी की मान्यता को लेकर याचिका दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता पार्थ और उदय राज हैं, जो 17 साल से रिलेशनशिप में हैं।

7- अभी तक शादी का कानून भारत में क्या है
भारत में पुरुष और महिला हिंदू, मुस्लिम (या अन्य धार्मिक आधार पर) पर्सनल लॉ या स्पेशल मैरिज ऐक्ट के तहत शादी कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ धारा-377 के तहत दो बालिगों के बीच सहमति से बनाए गए समलैंगिक संबंध को अपराध की श्रेणी से बाहर कर चुकी है।

8- दुनिया में समलैंगिक विवाह कहां-कहां वैध है
दुनिया के 20 से ज्यादा देशों में सेम सैक्स मैरिज को मान्यता मिली हुई है। ऑस्ट्रिया, अर्जेंटीना, बेल्जियम, डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, आयरलैंड, लक्जमबर्ग, माल्टा, नॉर्वे, पुर्तगाल, न्यूजीलैंड, स्पेन, स्वीडन में भी समलैंगिक विवाह किया जा सकता है।

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