5 C
London
Friday, April 24, 2026
Homeराष्ट्रीयशूटआउट पर तालियों की गूंज बड़ी बीमारी का कर रही है इशारा,...

शूटआउट पर तालियों की गूंज बड़ी बीमारी का कर रही है इशारा, क्या कोर्ट-पुलिस को सुधार पाएगी मोदी सरकार?

Published on

नई दिल्‍ली

अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की पुलिस कस्‍टडी में हत्‍या के बाद दो पक्ष सामने आए हैं। एक पक्ष इस बात से खुश है कि ऐसे निर्मम अपराधी के साथ जो कुछ हुआ बिल्‍कुल ठीक है। वहीं, दूसरा पक्ष भी है। इसे लगता है कि जिस तरह से सुरक्षा घेरे में अतीक की कनपटी पर हमलावरों ने गोली मारकर उसे ढेर कर दिया, वह किसी भी लोकतांत्रिक देश के लिए गलत है। पूर्व डिप्‍लोमैट और लेखक पवन के वर्मा ने न्‍यूज वेबसाइट फर्स्‍टपोस्‍ट में इसे लेकर अपनी राय जाहिर की है। उन्‍होंने एक लेख में कहा है कि यह मामला पुलिस, राजनीति और न्‍यायायिक सुधारों की गंभीर जरूरत की ओर इशारा करता है। लेख में उन्‍होंने बताया है कि इस तरह के एनकाउंटरों के क्‍या नुकसान हैं? क्‍यों यह एक बड़ी चिंता को पैदा करता है?

लेख की भूमिका में ही पवन इस बात को साफ करते हैं कि यह कोई पॉलिटिकल कॉलम नहीं है। न ही इसका तुष्टिकरण से लेनादेना है। यह लेख उचित प्रक्रिया के बारे में है जिसका संविधान में जिक्र है। यह एनकाउंटर राज को महिमामंडित करने के घातक परिणामों के बारे में है। यह राजनीति और अपराधियों के बीच खतरनाक गठजोड़ के बारे में है। यह सुस्त न्यायिक प्रक्रिया की निराशाजनक स्थिति के बारे में है। यह पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों की अपने राजनीतिक आकाओं के प्रति बढ़ती दासता के बारे में है।

क‍िसने बनाया माफ‍िया को नेता?
पूर्व डिप्‍लोमैट अपने लेख में कहते हैं कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि अतीक अहमद एक अपराधी था। उसके खिलाफ 100 से ज्‍यादा मामले दर्ज थे। लेकिन, यह पूछना भी लाजिमी है कि वह इतने लंबे समय तक कानून से कैसे बचा रहा? वे कौन सी ताकतें थीं जिन्होंने उसके आपराधिक कृत्यों का पालन-पोषण, समर्थन और यहां तक कि उसकी रक्षा की? समाजवादी पार्टी (सपा) और अपना दल पार्टी के पास इस सवाल का जवाब देने के लिए बहुत कुछ है। सपा ने उसे 2004 में लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया था। अपना दल ने माफिया को 2002 में विधायकी का चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिया था। दोनों पार्टियों ने जानते-बूझते हुए ऐसा किया था। वे माफिया डॉन की साख के बारे में बड़ी अच्‍छी तरह जानते थे। लेकिन, टिकट देने का सिर्फ एक मकसद यह था कि अतीक उनकी पार्टियों के लिए वोट ला सकता था। वह निर्दलीय के रूप में भी लड़ा। लेकिन, तब भी उसे कुछ राजनीतिक दलों का गुप्त समर्थन मिला।

पवन के अनुसार, इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि अतीक मुसलमान था। जितने बाहुबली हिंदू हैं या दूसरे धर्म के हैं, उन पर भी जघन्य अपराधों के दर्जनों मामले दर्ज हैं। अपराधी अपराधी होता है और कानून की नजर में उसकी कोई जाति या पंथ नहीं होता है। अतीक ने सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट से अपील की थी। उसे लगा था कि गिरफ्तारी के बाद उसकी जान को खतरा था।

लेख में पवन सवाल उठाते हुए कहते हैं कि क्या अपराध और राजनीति के गठजोड़ से फायदा उठाने के लिए सिर्फ सपा और अपना दल ही दोषी हैं? लेखक के मुताबिक, देशभर के राजनीतिक परिदृश्य पर नजर डालें तो पाएंगे कि शायद ही कोई दल अपने नाम के अनुरूप है। संसद के आंकड़ों को लें तो मिलेगा कि पक्ष और विपक्ष दोनों तरफ आपराधिक मामलों का सामना कर रहे माननीयों की भरमार है। इन पर डकैती से लेकर हत्या तक के केस हैं।

क्‍यों आम लोगों का अच्‍छा लगता है एनकाउंटर?
वह लिखते हैं कि आम नागरिक एनकाउंटर की अक्सर सराहना करते हैं। दरअसल, ये एनकाउंटर अपराध के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ का मैसेज देते हुए मालूम पड़ते हैं। इनसे एक मजबूत सरकार की छवि दिखती है जो कम साधनों के बावजूद अंतिम लक्ष्य का पीछा करने के लिए संकल्पित है। इसकी एक वजह है। देश का न्यायशास्त्र इस सिद्धांत पर आधारित है कि एक निर्दोष को सजा नहीं मिलनी चााहिए। फिर भले नौ अपराधी छूट जाए। इसमें स्वाभाविक रूप से अभियुक्तों को दोषी ठहराने के लिए अदालतों के समक्ष स्थायी सबूत पेश करने की जरूरत पड़ती है। यह प्रक्रिया प्रभाव वाले अपराधियों को बचने का मौका दे देती है। इसमें वकीलों की भूमिका आती है। गवाहों को धमकाना-लुभाना आता है। कानून के भीतर खामियों का फायदा उठाने की चालें आती हैं। दोष साबित होने में सालों साल लग जाते हैं। इस दौरान अपराधी या तो जमानत लेकर बाहर होता है या फिर जेल के अंदर अपनी गतिविधियों को चलाता है। यहां तक कि राज्य विधानसभा या संसद के लिए निर्वाचित भी हो जाता है। यही कारण है कि आम आदमी को लगता है कि एनकाउंटर में हत्‍या अपराध से निपटने का ज्यादा तेज और ज्यादा प्रभावी तरीका है। इसमें ताज्‍जुब भी नहीं होना चाहिए।

ऐसे न्‍याय में क‍िस तरह की समस्‍या?
लेखक कहते हैं कि इस तरह के न्याय में हालांकि एक गंभीर समस्या है। अगर एनकाउंटर किलिंग और फटाटफ न्याय को वैधता मिल जाती है तो राज्य को बेगुनाहों या विरोधियों के खिलाफ बदला लेने से क्या चीज रोकेगी? जो लोग इस तरह की कार्रवाई की सराहना कर रहे हैं जब कानून की उचित प्रक्रिया का सहारा लिए बिना उनके खिलाफ ऐक्‍शन होगा तो उन्हें पछतावा होगा। कथित रूप से दोषी के खिलाफ ‘बुलडोजर’ जस्टिस इस ज्‍यादती का एक और उदाहरण है। 1970 के दशक में आपातकाल के दौरान शुरुआत में मध्यम वर्ग इसका सबसे बड़ा समर्थक था। लेकिन, जल्द ही यह एहसास हो गया कि जब अपराध और सजा के बीच कानून का राज खत्म हो जाता है तो कोई भी सुरक्षित नहीं है।

पवन कहते हैं कि पुलिस व्यवस्था को एक गंभीर बदलाव की जरूरत है। जिस सहजता से वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी अपने राजनीतिक आकाओं के दास बन जाते हैं और निष्पक्ष रूप से कानून को बनाए रखने के अपने कर्तव्य से मुक्त हो जाते हैं, उसने खतरनाक रूप धारण कर लिया है। भले ही कोई भी सरकार सत्ता में हो। लंबे समय से प्रतीक्षित पुलिस सुधार को तत्काल लागू करने की आवश्यकता है। उन्‍हें खुशी है कि अतीक की हत्या की न्यायिक जांच शुरू हो गई है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने इस संबंध में उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस भी जारी किया है। उम्‍मीद करनी चाहिए कि जांच निष्पक्ष और विश्वसनीय होगी। ऐसा नहीं होने पर नतीजे अशुभ होंगे।

 

Latest articles

बंगाल चुनाव में ‘बंपर वोटिंग’, आज़ादी के बाद बना नया रिकॉर्ड, पहले चरण में 93% मतदान

तमिलनाडु के इतिहास में अब तक की सबसे ज़्यादा 85% वोटिंग कोलकाता। पश्चिम बंगाल और...

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 92 वर्षीय डॉ. निर्मल घोष को किया सम्मानित, आपातकाल के संघर्षों को किया याद

बैकुंठपुर (कोरिया)। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर के प्रवास...

ओसियां को 416 करोड़ की सौगात: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने की खेल स्टेडियम की घोषणा, बोले- उन्नत तकनीक से समृद्ध बनें किसान

ओसियां (जोधपुर)। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ओसियां उपखण्ड मुख्यालय के दौरे के...

जयपुर में ‘ग्राम-2026’ का शंखनाद: दिल्ली इन्वेस्टर मीट में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने निवेशकों को किया आमंत्रित

नई दिल्ली/जयपुर। राजस्थान की कृषि विकास यात्रा को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के...

More like this

बंगाल चुनाव में ‘बंपर वोटिंग’, आज़ादी के बाद बना नया रिकॉर्ड, पहले चरण में 93% मतदान

तमिलनाडु के इतिहास में अब तक की सबसे ज़्यादा 85% वोटिंग कोलकाता। पश्चिम बंगाल और...

पहलगाम हमले की बरसी: PM मोदी ने जान गंवाने वाले निर्दोषों को याद किया, कहा- आतंक के आगे भारत कभी नहीं झुकेगा

नई दिल्ली। पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भावुक...

महिला आरक्षण बिल पास नहीं हुआ, PM बोले- माफी मांगता हूं

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राष्ट्र को संबोधित किया। इस दौरान पीएम...