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बंगाली बहुत हैं… तुगलकाबाद में बुलडोजर के शिकार और किस-किस प्रदेश के लोग?

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नई दिल्ली

दक्षिणी दिल्ली के महरौली से बदरपुर मार्ग पर तुगलकाबाद के किले की बाउंड्री के अंदर और बाहर बनी कॉलोनियों को ढहा दिया गया। दिल्ली के तुगलकाबाद किले की बाउंड्री में बनी कॉलोनियों कॉलोनियों में बंगाल, बिहार और यूपी के अधिकांश निवासी थे।ऑर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) की बताई गई 1247 प्रॉपर्टीज के खिलाफ दो दिन पहले एक्शन शुरू हुआ। कोर्ट के निर्देश पर एएसआई, जिला प्रशासन और एमसीडी की संयुक्त कार्रवाई में अवैध निर्माण को ढहाया गया। इन कॉलोनियों में रहने वाले लोगों का कहना है कि जब हम वर्षों से रह रहे थे बिजली कनेक्शन है तो फिर यह कार्रवाई क्यों। कुछ निवासियों का कहना है कि हम यहीं पैदा हुए और वर्षों पुराने घर बने हैं। हमें बेघर कर दिया गया। हालांकि यह मामला कई वर्षों से चल रहा था और कोर्ट में इसकी सुनवाई हुई।

किले की जमीन में अवैध रूप से बंगाली मोहल्ला, सूर्या मोहल्ला, घुरिया मोहल्ला और बंगाली कॉलोनी आदि के नाम से कई छोटे मोहल्ले बन गए थे। उनमें पश्चिम बंगाल, बिहार, यूपी और राजस्थान आदि से आए अधिसंख्य मजदूर वर्ग के लोग रह रहे थे। सबसे अधिक बंगाल के लोग थे। एएसआई के एक अधिकारी ने बताया कि नियमों के बावजूद तुगलकाबाद किले की करीब 15 सौ बीघा जमीन में अवैध रूप से प्रॉपर्टीज का निर्माण किया गया है। एएसआई ने कार्रवाई से पहले 14 अप्रैल को सभी 1247 अवैध निर्माणों के खिलाफ नोटिस जारी करके इन्हें खाली करने की चेतावनी दे दी थी।

तुगलकाबाद किला का रकबा 6 किलोमीटर से अधिक एरिया में फैला हुआ है। एएसआई के अनुसार जमीन पर अवैध कब्जा हुआ है। 2001-2002 में इस जमीन को खाली कराने की कार्रवाई शुरू हुई थी। 300 बीघा से अधिक जमीन को खाली कराया गया लेकिन उसक वक्त मामला हाई कोर्ट में गया और हाई कोर्ट ने गांव के पक्ष में स्टे दे दिया। एएसआई इस मामले को लेकर सुप्रीम का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2011 में स्टे हटा दिया और जमीन खाली करने के लिए कहा।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को 1995 में दिल्ली विकास प्राधिकरण डीडीए से तुगलकाबाद किले की 2600 बीघा से अधिक जमीन रखरखाव के लिए दी। लेकिन इस दौरान इस दौरान करीब 1500 बीघा जमीन पर अवैध कब्जा हो गया। कई साल तक मामला ठंडे बस्ते में रहा। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को हाई कोर्ट के पास भेजकर मॉनिटरिंग करने का आदेश दिया था। दिल्ली हाई कोर्ट ने केस की सुनवाई के दौरान एएसआई की खिंचाई करते हुए कहा कि वह अतिक्रमण पर मूकदर्शक नहीं बन सकता। कोर्ट ने 4 हफ्ते का समय दिया था जिसके बाद यह कार्रवाई हुई।

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