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कल किसी को लिवर ट्रांसप्लांट करना है…किसी को ब्रेन… Re-NEET के ख‍िलाफ मांग पर ये बोले IIT एलुमनी

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नई दिल्ली,

नीट यूजी पर आई तमाम याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है. करीब 23 लाख कैंडिडेट्स की नजर सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हुई है. इस विवाद में कई कैंडिडेट्स ने याचिका दायर की है कि नीट की परीक्षा दोबारा होनी चाहिए तो वहीं, कुछ कैंडिडेट्स ऐसे भी हैं जिन्होंने परीक्षा दोबारा कराने के विरोध में याचिकाएं दायर की है. कल ही सुप्रीम कोर्ट में री-नीट को लेकर सुनवाई हुई है, जिसमें फैसला लिया गया कि सीबीआई कोर्ट को अपनी जांच रिपोर्ट जमा करेगी. ऐसे में आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि री-नीट होने से उन कैंडिडेट्स पर क्या असर पड़ेगा जो री एग्जाम के खिलाफ हैं.

स्कोलर डेन के मेनेजिंग डायरेक्टर और आईआईटी खड़गपुर के एल्युमिनी विवेक ठाकुर का कहना है कि ‘जो री-नीट नहीं कराने की मांग वाले छात्र हैं, जो कह रहे हैं कि इनपर असर पड़ेगा, यह बात बिल्कुल निराधार है क्योंकि परीक्षा में 700 नंबर लाने वाले बच्चे के अगर री-एग्जाम में 690 अंक आते हैं तो उसकी रैंक फिर भी अच्छी होगी. यह स्पष्ट संदेश है कि इसमें आपको परेशान नहीं होना चाहिए. बच्चों को MBBS के बाद जिस प्रोफेशन में काम करना है वह बहुत टफ है. उसमें बहुत मेंटल टफनेस चाहिए, किसी बच्चे को आगे जाकर लिवर ट्रांसप्लांट करना है, किसी को ब्रेन ट्रांसप्लांट करना है. आप इस बात की दुहाई नहीं दे सकते कि आप मेंटली इतने फ्रेजाइल हैं’.

पैसे देकर सिस्टम में घुसना चाहते हैं कैंडिडेट्स- एक्सपर्ट
एक्सपर्ट ने आगे कहा कि ‘2 महीने बाद इन बच्चों का री एग्जाम हो रहा है तो वह घबरा क्यों रहे हैं. मुझे लग रहा है कि इसके पीछे वे बच्चे हैं जो 30-40 लाख रुपये देकर सिस्टम में घुसना चाह रहे हैं. जिन बच्चों ने मेरिट से यह एग्जाम दिया है, वे दोबारा भी कर लेंगे परीक्षा और थोड़े बहुत नंबर कम होने पर भी उन्हें अच्छा कॉलेज मिलेगा क्योंकि रैंकिंग में बहुत बड़ी गड़बड़ी हुई है. आज एनटीए के पास जवाब नहीं जुड़े रहे थे. आज सीजेआई ने कहा है कि आप पब्लिक डोमेन में डालिए सारा रिजल्ट ताकि डेटा एनेलिस्ट ये साफ कर दें कि वाकई में कितने बड़े स्तर पर गड़बड़ी हुई है’.

क्या होगा री एग्जाम?
नीट परीक्षा को लेकर कल सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के अनुसार, पेपर लीक के तथ्यों का पता लगाया जाएगा साथ ही सीबीआई की जांच रिपोर्ट को भी देखा जाएगा. सीजेआई ने सुनवाई के दौरान पूछा कि क्या हम नीट छात्रों के डेटा को साइबर फोरेंसिक विभाग में डेटा एनालिटिक्स यूनिट में डालकर पता लगा सकते हैं, क्योंकि हमें यह पहचानना है कि क्या पूरी परीक्षा प्रभावित हुई है, क्या गलती करने वालों की पहचान करना संभव है, ऐसी स्थिति में केवल उन्हीं छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा का आदेश दिया जा सकता है.

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