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महिलाओं के साथ ज्यादती, सड़कों पर बिखरी लाशें, असद समर्थकों का कत्लेआम.. सीरिया में नहीं रुक रही हिंसा

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नई दिल्ली,

सीरिया के लताकिया और तारतूस में सुरक्षाबलों और असद समर्थक अलावी समुदाय के बीच जारी हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही. छह से 10 मार्च के बीच इस हिंसा में अब तक 1000 लोगों की मौत हो गई है. इन इलाकों में 72 घंटों से पानी और बिजली की सप्लाई पूरी तरह से बंद है. मौतों के इस आंकड़ें को 2011 के गृहयुद्ध के बाद से सबसे ज्यादा माना जा रहा है.

सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स के मुताबिक, सीरियाई सुरक्षाबलों ने 6 से 10 मार्च के बीच 1,018 लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया है. पिछले साल दिसंबर में तख्तापलट के बाद बशर अल असद देश छोड़कर रूस भाग गए थे. इसके बाद सीरिया की सत्ता पर हयात तहरीर अल-शाम (HTS) का कब्जा है. एचटीएस के लड़ाके अब सीरियाई सेना का हिस्सा है.

सीरियाई सरकार का कहना है कि बशर अल असद के वफादार लड़ाकों ने सुरक्षाबलों पर हमला किया है, जिसके बाद हिंसा शुरू हो गई. वहीं, असद के लड़ाकों ने सुरक्षाबलों पर रिहाइशी इलाकों में बमबारी करने का आरोप लगाया है. कहा जा रहा है कि स्थिति उस समय बिगड़ गई, जब सुरक्षाबलों ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार करने की कोशिश की, जिसके बाद सरकार ने लटाकिया और टार्टस में भारी सुरक्षाबलों की तैनाती की और कर्फ्यू लगाने का आदेश दिया.

रिपोर्ट के मुताबिक, चुन-चुनकर अलावी समुदाय के लोगों को मारा जा रहा है. आलम ये है कि सड़कें लाशों से पटी पड़ी हैं. इस समुदाय की महिलाओं को भी निर्वस्त्र कर सड़कों पर घुमाने के आरोप लग रहे हैं.

बशर अल-असद के वफादार क्यों हैं अलावी?
अलावी समुदाय बड़े पैमाने पर बशर अल-असद के समर्थन हैं. इसका प्रमुख कारण ये है कि असद खुद अलावी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. उनके पिता ने सत्ता संभालते ही सरकारी और सैन्य पदों पर बड़ी संख्या में अलावियों को अपॉइंट किया था. उन्हें सत्ता और रिसोर्सेज में सीधा और मोटा हिस्सा मिलने लगा, जबकि उनकी आबादी करीब 12 फीसदी ही है, वहीं सुन्नी जनसंख्या 74 प्रतिशत है.

इस वजह से बहुसंख्यक सुन्नी समुदाय अल्पसंख्यक अलावी समुदाय से गुस्सा हैं. लेकिन सत्ता में बड़ी भागीदारी ही अकेला कारण नहीं, है. सुन्नियों के गुस्से के पीछे धार्मिक कारण भी हैं. असद सरकार का शासन धर्मनिरपेक्ष था, जिससे सुन्नी धार्मिक नेता और कट्टरपंथी गुट असद के खिलाफ हो गए. सुन्नी समुदाय के कई हिस्से अलावी मुस्लिमों को धर्म से भटका हुआ मानते हैं. असद परिवार के दौर में सीरिया में मस्जिदों पर सरकारी नियंत्रण था, और सुन्नी धार्मिक नेताओं को सरकार की आलोचना की इजाजत नहीं थी.

सीरिया में क्यों हो रही है हिंसा?
1971 से सीरिया में अल-असद परिवार का कंट्रोल था जो दिसंबर 2024 में जाकर खत्म हुआ. बशर अल-असद को सत्ता से हटाकर अहमद अल-शरा ने अंतरिम सरकार बनाई है. सीरिया में कई लोगों का मानना ​​है कि भले वहां सुन्नी बहुसंख्यक हैं, लेकिन इन 5 दशकों में सत्ता और संसाधन अल्पसंख्यक समुदाय- अलावी के हाथों में केंद्रित थी. अल-असद परिवार इसी समुदाय से आता है.

दिसंबर 2024 में जाकर सीरिया में सत्तापरिवर्तन हुआ और बशर अल-असद को सीरिया छोड़कर भागना पड़ा. अहमद अल-शरा के नेतृत्व वाले इस्लामी समूह हयात तहरीर अल-शाम ने असद को सत्ता से उखाड़ फेंका है. इस समूह की जड़ें अल-कायदा की सीरियाई शाखा में हैं. इसे अभी भी अमेरिका और कई पश्चिमी सरकारों ने आतंकवादी संगठन के रूप में लिस्ट कर रखा है.

अब बशर अल-असद के वफादार लड़ाकों की टक्कर नई सरकार के सुरक्षाकर्मियों और हयात तहरीर अल-शाम के लड़ाकों से हो रही है. सुरक्षाकर्मियों और हयात तहरीर अल-शाम के लड़ाकों ने उन क्षेत्रों को निशाना बनाया है जहां अलावी समुदाय के लोग रहते हैं. खून-खराबा बेहिसाब हो रहा है और अलावी समुदाय इससे सबसे अधिक प्रभावित हुआ है.

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