सीरो-सर्वेक्षण : इंदौर के 7.72 फीसद प्रतिभागियों में कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी मिलीं

इंदौर,

मध्य प्रदेश में कोविड-19 से सबसे ज्यादा प्रभावित इंदौर में सीरो-सर्वेक्षण से पता चला है कि इसमें शामिल 7.72 फीसद प्रतिभागियों के शरीर में कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी विकसित हुई हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शहर में 11 से 23 अगस्त के बीच किए गए इस सर्वेक्षण के नतीजों को शुक्रवार को सार्वजनिक किया। उन्होंने इन नतीजों पर आधारित पुस्तिका का विमोचन किया।

गौरतलब है कि सीरो-सर्वेक्षण में रक्त के सीरम की जांच से पता लगाया जाता है कि अगर संबंधित प्रतिभागी पिछले दिनों सार्स-सीओवी-2 (वह वायरस जिससे कोविड-19 फैलता है) के हमले का शिकार हुआ है, तो उसके रोग प्रतिरोधक तंत्र ने किस तरह प्रतिक्रिया दी है और उसके रक्त में इस वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी विकसित हुई हैं या नहीं?

इंदौर संभाग के आयुक्त (राजस्व) पवन कुमार शर्मा ने बताया कि केंद्र सरकार के राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) की मदद से किए गए सर्वेक्षण में एक साल से अधिक उम्र के 7,103 लोगों के रक्त के नमूने लिए गए। शर्मा ने कहा, “इनमें से 548 नमूनों यानी 7.72 प्रतिशत प्रतिभागियों में सार्स सीओवी-2 (वह वायरस जिससे कोविड-19 फैलता है) के खिलाफ एंटीबॉडी मिली हैं।

खास बात यह है कि सर्वेक्षण में शामिल महिलाओं और पुरुषों, दोनों में समान रूप से इस वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी मिली हैं।” उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण के नतीजों से पता चलता है कि शहर में महामारी से सर्वाधिक प्रभावित इलाकों में संक्रमण को वहीं रोककर नियंत्रित करने के उपाय कामयाब रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि शहर के बॉम्बे बाजार क्षेत्र में 30 फीसद से ज्यादा प्रतिभागियों में कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी मिली हैं। इसके अलावा, 45 से 60 साल के आयु वर्ग में सबसे ज्यादा एंटीबॉडी पायी गयी हैं।

माना जा रहा है कि सीरो-सर्वेक्षण के तहत रक्त का नमूना लिए जाने के 15 दिन पहले ये लोग कोरोना वायरस संक्रमण की चपेट में आ चुके थे। लेकिन महामारी के लक्षण नहीं होने के कारण उन्हें संक्रमण का पता नहीं लगा। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक इंदौर जिले में 24 मार्च से 27 अगस्त के बीच कोविड-19 के कुल 12,229 मरीज मिले हैं। इनमें से 379 मरीजों की इलाज के दौरान मौत हो चुकी है, जबकि 8,610 लोग उपचार के बाद स्वस्थ हो चुके हैं। जिले में कोरोना वायरस के प्रकोप की शुरुआत 24 मार्च से हुई, जब पहले चार मरीजों में इस महामारी की पुष्टि हुई थी।

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