गुजरात : मुर्दों के बाद अब सरकारी बाबू और पुलिस वाले भी मनरेगा मजदूर!

अहमदाबाद

गुजरात में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत गड़बड़ घोटाला थमने का नाम नहीं ले रहा है। आलम यह है कि यहां मुर्दों से मनरेगा का काम कराने के बाद अब जेल में बंद आरोपी, सरकारी सेवा में पेंशन पाने वाले लोग भी मजदूरों में शुमार हो गए हैं। और तो और एक डेयरी सहकारी बोर्ड के सदस्य का नाम भी मनरेगा के मस्टर रोल में सामने आया है। यह पूरा मामला बनासकांठा जिले के पालनपुर तालुका गांव का है।

टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, मनरेगा घोटाले की जांच में पता चला है कि एसआरपी ग्रुप-16 के एक सिपाही, उनकी मां जो एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं और उनके पिता जो एक ऑटोरिक्शा चालक हैं, को 2013 में MGNREGA में लाभार्थियों के रूप में जोड़ा गया था, जबकि वे सभी दूसरे माध्यमों से पैसे कमा रहे थे। इसके अलावा पालनपुर के सरकारी स्कूल के एक चपरासी को भी मनरेगा में एक मजदूर के रूप में काम करते हुए दिखाया गया था।

डेयरी सहकारी समिति के बोर्ड सदस्य भी मनरेगा मजदूर
इसके अलावा एक डेयरी सहकारी समिति के बोर्ड सदस्य और उनकी पत्नी को भी मनरेगा में एक मजदूर के रूप में लिस्टेड किया गया था। मनरेगा मस्टर रोल के दस्तावेजों से पता चलता है कि 2012 में पुलिस में शामिल हुए सिपाही कल्पेशगिरि गोस्वामी को भी मजदूर के रूप में नामित किया गया था और जनवरी 2013 से उनका नाम शामिल रहा। इसके अलावा उनके पिता जयंतीगिरी, जो कि एक ऑटोरिक्शा चालक और कल्पेश की मां पुष्पा, जो कि एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता थी, इनका नाम भी 2013 में मनरेगा मजदूरों के रूप में शामिल किया गया।

12 दिनों तक काम के बदले दिए 5,400 रुपये
स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि लगभग 12 दिनों तक काम के बदले इन्हें 5,400 रुपये आवंटित किया गया था। उधर, सिपाही कल्पेश ने मनरेगा में काम करने से इनकार करते हुए बताया कि अगर उसकी जगह कोई और मनरेगा में काम कर रहा हो तो उसे जानकारी नहीं होगी।

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