GDP में गिरावट के बावजूद विदेशी मुद्रा भंडार में रिकॉर्ड इजाफा, क्या हैं मायने

नई दिल्ली,

भले ही जीडीपी के मोर्चे पर सरकार को झटका लगा है. लेकिन विदेशी मुद्रा भंडार के मामले में हर हफ्ते भारत की स्थिति और मजबूत होती जा रही है. विदेशी मुद्रा भंडार अगस्त के आखिरी हफ्ते में 541.43 बिलियन डॉलर (करीब 39.77 लाख करोड़ रुपये) पर पहुंच गया है.आंकड़ों के मुताबिक हफ्ते भर के दौरान इसमें 3.88 बिलियन डॉलर (28.49 हजार करोड़ रुपये) की बढ़ोतरी हुई है. इससे पहले 21 अगस्त को खत्म हुए हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार 537.548 बिलियन डॉलर यानी 39.49 लाख करोड़ रुपये था.

भारत के लिए अच्छी खबर
गौरतलब है कि पहली बार इस साल जून महीने में विदेशी मुद्रा भंडार 500 बिलियन डॉलर के आंकड़े को पार करते हुए 501.7 बिलियन डॉलर यानी 36.85 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया था. एक समय था जब 1991 में भारत ने प्रमुख वित्तीय संकट से बाहर निकलने के लिए गोल्ड रिजर्व को गिरवी रख दिया था. मार्च 1991 में देश का विदेशी मुद्रा भंडार केवल 5.8 बिलियन डॉलर (42.59 हजार करोड़ रुपये) था.

भारतीय रिजर्व बैंक के मुताबिक देश के विदेशी मुद्रा भंडार में वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान 64.9 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई, जबकि इसमें वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान 11.7 अरब डॉलर की कमी हुई थी. आपको बता दें कि वर्तमान में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार दुनिया के कई बड़े देशों से ज्यादा हो गया है.

विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने का मतलब
विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी किसी भी देश की इकोनॉमी के लिए अच्छी बात है. इसमें करंसी के तौर पर अधिकतर डॉलर होता है. डॉलर के जरिए ही दुनियाभर में कारोबार किया जाता है. कहा जा रहा है कि अब भारत के पास इतना बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार हो चुका है कि इससे करीब ढाई साल से ज्यादा समय तक की जरूरतों के सामान आयात किए जा सकते हैं.

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