कोरोना: ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन से निराशा, साइड इफेक्ट से रुका ट्रायल

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका (Oxford and AstraZeneca) द्वारा विकसित कोरोना वैक्सीन के तीसरे चरण का ट्रायल अमेरिका में रोक दिया गया है. रेस में काफी आगे चल रही इस वैक्सीन ट्रायल (Vaccine trials) के स्थगित होने से दुनिया की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है. ‘स्टैट न्यूज’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन में वैक्सीन लेने वाले एक वॉलंटियर की हेल्थ में गंभीर रिएक्शन (Sideffects) देखने के बाद अमेरिका में दर्जनों ट्रायल्स पर रोक लगाई गई है.

एस्ट्राजेनेका का जवाब
एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca vaccine) के एक प्रवक्ता ने बताया कि ‘स्टैंडर्ड रिव्यू प्रोसेस’ ने सेफ्टी डेटा रिव्यू की अनुमति के लिए वैक्सीनेशन को रोका है. इस वैक्सीन कैंडिडेट को अमेरिका और ब्रिटेन में कई जगहों पर टेस्ट किया जा रहा था. लोकल रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा का ये मुद्दा तुरंत सामने नहीं आया था. हालांकि वैक्सीन से तबियत बिगड़ने के बाद वॉलंटियर के रिकवर होने की उम्मीद है.

दुनियाभर के क्लीनिकल ट्रायल्स पर असर
स्टैट न्यूज ने बताया कि इस वैक्सीन ट्रायल को रोकने का असर एस्ट्राजेनेका के बाकी वैक्सीन ट्रायल्स (AstraZeneca vaccine trials) पर भी पड़ा है. वैक्सीन निर्माताओं द्वारा किए जाए रहे अन्य क्लीनिकल ट्रायल्स (Clinical trials) भी इससे प्रभावित हुए हैं.

ट्रायल पर रोक बड़ा मसला नहीं
एस्ट्रेजेनेका के प्रवक्ता ने कहा, ‘ये एक रूटीन एक्शन है जो किसी भी ट्रायल में अस्पष्ट बीमारी के होने पर उसकी जांच करते हुए अक्सर होता है. हम ये सुनिश्चित करते हैं कि ट्रायल पूरी ईमानदारी से किया जाए.’ प्रवक्ता ने यह भी बताया कि समीक्षा में तेजी लाने और ट्रायल की टाइमलाइन पर संभावित प्रभाव को कम करने के लिए काम किया जा रहा है.

सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ट्रायल पर रोक
वैक्सीन की विकास प्रक्रिया से जुड़े एक शख्स के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने कहा था कि सावधानी को प्रमुखता से ध्यान में रखते हुए ट्रायल को होल्ड पर रखा गया है. एक अन्य व्यक्ति ने नाम ना बताने की शर्त पर कहा कि इस घटना का एस्ट्राजेनेका के तमाम वैक्सीन ट्रायल्स पर असर पड़ा है. साथ ही अन्य वैक्सीन निर्माताओं द्वारा किए जा रहे क्लीनिकल ट्रायल्स भी इससे प्रभावित हुए हैं.

कब तक लगी रहेगी रोक?
क्लीनिकल ट्रायल पर रोक असामान्य नहीं हैं और यह स्पष्ट भी नहीं है कि एस्ट्राजेनेका इसे कितने समय तक होल्ड पर रख सकता है. मौजूदा समय में नौ संभावित वैक्सीन ट्रायल के तीसरे चरण में हैं और सभी इस वैश्विक महामारी को काबू करने के नए तरीकों को खोजने में जुटे हैं.

साइड इफेक्ट्स की जांच
सूत्रों के मुताबिक, शोधकर्ता अब तथाकथित ‘डेटा एंड सेफ्टी मॉनिटरिंग बोर्ड’ द्वारा रिव्यू किए गए डेटाबेस के आधार पर वैक्सीन से होने वाले साइड इफेक्ट के अन्य मामलों की जांच में जुट गए हैं. अब अगर इस तरह के और भी कई मामले सामने आते हैं तो वैक्सीन का जल्द आना मुश्किल हो जाएगा.

यूएस में 62 जगहों पर ट्रायल
बता दें कि एस्ट्राजेनेका ने अगस्त के अंत में सिर्फ अमेरिका में ही ट्रायल के तीसरे चरण की शुरुआत की थी. क्लीनिकल ट्रायल रजिस्ट्रेशन के मुताबिक, अमेरिका में 62 जगहों पर इसका ट्रायल चल रहा है. हालांकि इनमें से कई ने अभी तक प्रतिभागियों की नामांकन प्रक्रिया भी नहीं शुरू की है. जबकि ब्राजील, ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका में 2/3 चरण का ट्रायल शुरू किया गया था.

भारत में भी क्लीनिकल ट्रायल में देरी
बता दें कि इससे पहले भारत में इस वैक्सीन का क्लिनिकल ट्रायल किया जाना है, लेकिन चंडीगढ़ के द पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER) में होने वाला इस वैक्सीन का ट्रायल एक हफ्ते के लिए टाल दिया गया है. ये ट्रायल सितंबर के पहले हफ्ते में शुरू किया जाना था.

किस वजह से टला क्लीनिकल ट्रायल
इस हफ्ते के देरी के पीछे सुरक्षा के कुछ कारण बताए जा रहे हैं. डाटा सेफ्टी मॉनिटरिंग बोर्ड (DSMB) ने न्यूज एजेंसी IANS को जानकारी देते हुए बताया कि सेफ्टी अप्रूवल ना मिल पाने की वजह से इस ट्रायल को एक हफ्ते के लिए टाल दिया गया है. इस ट्रायल के लिए 100 लोगों को चुना गया है.

ट्रायल में देरी की वजह से और वॉलंटियर्स की भर्ती रोक दी गई है. फिलहाल ट्रायल के लिए 400 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया है जिसमें 253 लोगों को वैक्सीन की पहली डोज दी जाएगी. PGIMER में वैक्सीन ट्रायल शेड्यूल के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर प्रोफेसर मधु गुप्ता ने कहा, ‘फिलहाल, ऑक्सफोर्ड वैक्सीन के ट्रायल के लिए वॉलंटियर्स की भर्ती को होल्ड पर डाल दिया गया है क्योंकि हम डाटा सेफ्टी मॉनिटरिंग बोर्ड की तरफ से पहले 100 वॉलंटियर्स की सुरक्षा की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं.’

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