बिहार चुनाव और सुशांत… कंगना के जरिए बहुत कुछ साध रही है बीजेपी

मुंबई

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से जारी घटनाक्रम अब कंगना रनौत के दफ्तर को तोड़े जाने तक आ चुका है। अब इस पूरे मामले ने सियासी रंग भी ले लिया है। मराठी अस्मिता, उत्तर भारतीय वोटर्स, बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बीजेपी बहुत नपी-तुली साइड ले रही है। बीजेपी को यह अच्छे से पता है कि बिहार में ‘सुशांत के लिए न्याय’ मांगना महाराष्ट्र में उल्टा असर कर सकता है, जहां शिवसेना ने इसे मुंबई विरोधी और मराठी विरोधी कैम्पेन का रूप दिया है। बीजेपी दोनों ही नावों की सवारी कर राजनीति को साधने की कोशिश में है।

कंगना के मामले में बीजेपी संभलकर स्टैंड ले रही है। मुंबई को PoK बताए जाने के विरोध के साथ ही उनके दफ्तर को तोड़े जाने को गलत ठहराया। फडनवीस ने मुंबई को PoK बताए जाने के कंगना रनौत के बयान से किनारा कसते हुए कहा, ‘हमने कभी मुंबई को लेकर उनके बयान का समर्थन नहीं किया। कोई भी नहीं कर सकता है। लेकिन उद्धव सरकार ने बदला लेने की भावना से उनका बंगला तोड़ डाला, जो सही नहीं था।’

बीजेपी ने भी पार्टी के नेताओं को कंगना रनौत के सपॉर्ट में बोलने को लेकर सतर्कता बरतने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। कंगना रनौत और सुशांत राजपूत के मामले को लेकर चल रही जुबानी जंग में शिवसेना को काउंटर करने के लिए शिवसेना ने करीब आधा दर्जन नेताओं को तैनात किया है। इस पूरे प्रकरण के राजनीतिकरण से बीजेपी के ‘ऑपरेशन लोटस’ को बल मिला है।

अब बीजेपी में शामिल शिवसेना के पूर्व नेता नारायण राणे ने तो महाराष्ट्र में राज्यपाल का शासन लगाने की मांग की है। सोशल मीडिया पर भी ‘ट्रोल आर्मी’ ने उद्धव के बेटे आदित्य ठाकरे को जमकर निशाना बनाया गया। सुशांत आत्महत्या और कंगना-शिवसेना विवाद में बीजेपी की भूमिका दोनों ऐक्टर्स की उत्तर भारतीय छवि को टार्गेट करनी की दिखती है, जिसका संभावित मकसद आगामी बिहार चुनाव में फायदा उठाना है। इस साल बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को चुनाव प्रभारी नियुक्त किया है। पार्टी की तरफ से यह कदम भी इसी कड़ी में रणनीतिक रूप से लिया गया फैसला लगता है।

हालांकि बीजेपी से जुड़े सूत्रों का यह भी कहना है कि कंगना के खिलाफ शिवसेना की प्रतिक्रिया में भले ही स्थिति बिगड़ी हो। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि बीजेपी के खिलाफ शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस एक साथ आए हैं। सीएम उद्धव ठाकरे, एनसीपी चीफ शरद पवार और महाराष्ट्र पुलिस की छवि खराब करने के लिए कंगना रनौत और रिपब्लिक टीवी के हेड अर्णब गोस्वामी के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने के दौरान तीनों दलों में एकता नजर आई।

अब शिवसेना ने कंगना चैप्टर को बंद किए जाने का ऐलान करते हुए कहा कि दफ्तर में तोड़फोड़ की जिम्मेदारी बीएमसी की है। संजय राउत ने कहा कि दफ्तर तोड़े जाने के मामले में मेयर और बीएमसी कमिश्नर ही कुछ कह सकते हैं। वहीं एनसीपी ने कहा कि कंगना ने पब्लिसिटी स्टंट के लिए सब किया। एनसीपी चीफ जयंत पाटिल ने कहा कि महाराष्ट्र के लोग कंगना एपिसोड को मनोरंजन के तौर पर देख रहे हैं। यह सब कुछ बिहार चुनाव को लेकर चल रहा है।

शिवसेना और एनसीपी ने मराठी अस्मिता का मुद्दा उठाया है। वहीं बीजेपी इस फैक्टर को भी अच्छे से समझ रही है कि मुंबई में उत्तर भारत की बड़ी आबादी रहती है। बीजेपी का ध्यान मुंबई और महाराष्ट्र में रहने वाले गैर-मराठी वोटर्स पर भी है। शिवसेना के साथ गठबंधन में रहने के दौरान भी बीजेपी का फोकस उत्तर भारतीय वोटर्स पर रहता था।

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