कृषि बिल: सिद्धू बोले- पंजाब की आत्मा पर वार..हरसिमरत का इस्तीफा नाटक

चंडीगढ़

लोकसभा में पास कृषि विधेयक को लेकर पंजाब में हंगामा मचा है। गुरुवार को शिरोमणि अकाली दल की मंत्री हरसिमरत कौर ने विधेयक का विरोध करते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। वहीं अन्य विपक्षी दल भी मोदी सरकार के इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं। शुक्रवार को कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने मोदी सरकार पर कृषि विधेयक को लेकर निशाना साधा है।

सिद्धू ने ट्वीट कर किसानों के साथ होने की बात कही है। विधेयक के खिलाफ उन्होंने सिलसिलेवार दो ट्वीट किए। पहले ट्वीट में उन्होंने हिंदी में शेर लिखते हुए मोदी सरकार पर तंज कसा। वहीं दूसरे ट्वीट में पंजाबी में केंद्र सरकार को चेतावनी दी और कहा कि हमारे अस्तित्व पर हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सिद्धू ने कहा, ‘किसानी पंजाबी की रूह है। शरीर के घाव भर जाते हैं लेकिन आत्मा पर वार.. हमारे अस्तित्व पर हमला बर्दाश्त नहीं।’ उन्होंने आगे लिखा कि वह हर पंजाबी किसान के साथ हैं।

सिद्धू का निशाना
एक शेर के जरिए भी उन्होंने केंद्र सरकार पर हमला बोला। सिद्धू ने लिखा, ‘सरकारें तमाम उम्र यही भूल करती रहीं/ धूल उनके चेहरे पर थी, आईना साफ करती रहीं।’ बता दें कि कृषि विधेयक को लेकर पंजाब में केंद्र सरकार का जमकर विरोध हो रहा है। बीजेपी की सबसे पुरानी सहयोगी पार्टी अकाली दल भी ऐक्ट के विरोध में है। गुरुवार को विधेयक से असहमति जताते हुए अकाली की दल की मंत्री हरसिमरत कौर ने इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति ने उनका इस्तीफा मंजूर भी कर लिया है।

हालांकि, उनके इस्तीफे को लेकर विपक्षी दलों ने अलग तरीके की प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस ने इसे नाटक करार दिया है। पार्टी महासचिव और मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि हरियाणा के उपमुख्यमंत्री और जेजेपी नेता दुष्यंत चौटाला को भी कम से कम मनोहर लाल खट्टर सरकार से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने ट्वीट किया कि अकाली दल को प्रतीकात्मक दिखावे से आगे बढ़कर सच के साथ खड़ा होना चाहिए।

दुष्यंत पर भी निशाना
सुरजेवाला ने कहा कि जब किसान विरोधी अध्यादेश मंत्रिमंडल में पारित हुए तो हरसिमरत जी ने विरोध क्यों नही किया? आप लोकसभा से इस्तीफ़ा क्यों नही देते? अकाली दल मोदी सरकार से समर्थन वापस क्यों नही लेता? प्रपंच नही, किसान का पक्ष लें। सुरजेवाला ने दुष्यंत चौटाला पर निशाना साधते हुए कहा, ‘दुष्यंत जी, हरसिमरत के इस्तीफ़े के नाटक को ही दोहरा कर छोटे सीएम के पद से इस्तीफा दे देते। पद प्यारा है, किसान प्यारे क्यों नहीं? कुछ तो राज है। किसान माफ नहीं करेंगे। जेजेपी, सरकार की पिछलग्गू बनकर किसान की खेती-रोटी छिनने के जुर्म की भागीदार है।’

‘इस्तीफा देना मजबूरी’
वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बलराम जाखड़ ने इस्तीफे को अकाली दल की मजबूरी करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह किसानों के लिए प्यार नहीं है। चार महीनों से वे लोग किसानों को मूर्ख बना रहे थे और अब अंत में उन्होंने खुद को हंसी का पात्र बना लिया। जाखड़ ने कहा कि कौर के इस्तीफे से अकाली दल ने एनडीए में भी अपना सम्मान खो दिया है। इसलिए क्योंकि, किसानों से उनका कोई वास्ता नहीं है। मोदी जी ने भी इसलिए ही उन्हें डंप करना ही बेहतर समझा क्योंकि किसानों के समर्थन के बिना अकाली दल उनके लिए बोझ ही है।

वहीं, किसान-मजदूर संघर्ष समिति के जनरल सेक्रेट्री सरवन सिंह पंढेर हरसिमरत कौर के इस्तीफे को देर से लिया गया फैसला बताते हैं। उन्होंने कहा कि कौर का इस्तीफा काफी देर से आया है। इसका मकसद लोगों के गुस्से को शांत करना है। उन्होंने कहा कि अगर सुखबीर सिंह बादल को आज भी लगता है कि यह गलत है तो उन्हें अपने लाखों कार्यकर्ताओं के साथ संसद का घेराव करना चाहिए।

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