कृषि विधेयक का विरोध, अकाली दल के नेता मिले तो क्या हस्ताक्षर नहीं करेंगे राष्ट्रपति?

नई दिल्ली

कृषि और किसानों से जुड़े बिलों को लेकर किसानों के विरोध की गूंज संसद से सड़क तक सुनाई दे रही है। हरियाणा और पंजाब समेत पूरे देश में किसान इन विधेयकों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। केन्द्र सरकार कह रही है कि ये बिल किसानों की भलाई के लिए हैं। इनसे उनकी आमदनी बढ़ेगी। वहीं कृषि बिल के खिलाफ किसानों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी किसानों से अपील कर रहें हैं कि इन बिलों से उन्हीं का फायदा होने वाला है। वहीं किसान प्रदर्शन के जरिए लगातार दबाव बना रहे हैं कि इस बिल को वापस लिया जाए।

दरअसल कृषि बिल भारी हंगामे के बीच लोकसभा और राज्यसभा दोनों से पास हो गए है। अब यह राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद यह कानून में बदलकर पूरे देशभर में लागू हो जाएगा। वहीं दूसरी तरफ विपक्षी पार्टियों का पूरा जोर इस पर है कि राष्ट्रपति खुद मामले को समझें और प्रदर्शन और जिस तरफ संसद में बिल को पास किया गया है, उस तरीके गलत मानते हुए बिल पर हस्ताक्षर न करें। जबकि किसानों का बिल को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन जारी है।

सड़क पर हैं किसान
पंजाब और हरियाणा में किसानों ने विभिन्न राजनीतिक और किसानों से जुड़े संगठनों के बैनर तले जगह जगह इन विधेयकों का विरोध करते हुए प्रदर्शन किए और सड़कों को जाम कर दिया। भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) की हरियाणा ईकाई ने कुछ अन्य किसान संगठनों के साथ तीन घंटे तक राज्यव्यापी प्रदर्शन किए। पंजाब युवा कांग्रेस ने भी पंजाब से दिल्ली के लिए ट्रैक्टर रैली निकाली। इसके अलावा वाम दलों से जुड़े किसान संगठनों ने लगभग पूरे देश में इन विधेयकों के खिलाफ प्रदर्शन किया है। इसके अलावा विधेयकों के विरोध में मोदी सरकार से पिछले सप्ताह मंत्री पद से इस्तीफा देने वाली हरसिमरत कौर बादल की पार्टी शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल अपने रुख पर अड़े रहे और उन्होंने राष्ट्रपति से विधेयकों पर हस्ताक्षर नहीं करने की अपील की। उन्होंने अपील में कहा कि राष्ट्रपति विधेयकों को पुनर्विचार के लिये संसद को लौटा दें।

25 सितंबर से शुरू होगा देशव्यापी प्रदर्शन
संसद में पारित किये गये तीन कृषि बिलों के विरोध में सोमवार को उत्तर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने प्रदर्शन किया। मुजफ्फरनगर भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार बहुमत के नशे में चूर है। राकेश टिकैत ने चेतावनी दी कि भारतीय किसान यूनियन इस हक की लड़ाई को मजबूती के साथ लड़ेगी। सरकार अगर हठधर्मिता पर अडिग है तो किसान भी पीछे हटने वाला नहीं है। 25 तारीख को पूरे देश का किसान इन बिलों के विरोध में सड़क पर उतरेगा, जब तक कोई समझौता नहीं होगा तब तक पूरे देश का किसान सड़कों पर रहेगा।

विपक्ष ने संसद परिसर में दिया धरना
विपक्ष ने रविवार को राज्यसभा में हुए हंगामे के चलते सोमवार को आठ विपक्षी सदस्यों को निलंबित किए जाने को लेकर सरकार पर हमला बोला तथा इस कदम के विरोध में संसद भवन परिसर में प्रदर्शन किया। निलंबित किए गए आठ सांसदों में कांग्रेस, मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी , तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के सदस्य शामिल हैं। उच्च सदन में कृषि संबंधी विधेयक को पारित किए जाने के दौरान ‘अमर्यादित व्यवहार’ के कारण इन सदस्यों को शेष सत्र के लिए निलंबित किया गया है। निलंबन के खिलाफ कांग्रेस, माकपा, शिवसेना, जनता दल (सेक्यूलर), तृणमूल कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और समाजवादी पार्टी के सांसद संसद भवन परिसर में धरने पर बैठ गए।

कई हाइवे बंद, कई जगह लगा जाम
पिछले कुछ दिनों से किसानों के प्रदर्शन से हरियाणा में कई रोड जाम हो गए। फतेहाबाद-सिरसा नैशनल हाइवे, अंबाला-चंडीगढ़ हाइवे, बरवाला में पंचकूला यमुनानगर हाइवे बंद कर दिया गया। वहीं जींद बरोदा और जींद दिल्ली हाइवे जाम हो गया। साथ ही गोहाना में रोहतक पानीपत हाइवे, पंचकूला, नारनौंद में जींद भिवानी रोड, पानीपत असंध रोड, जींद पाटियाला रोड, दादरी कनीना रोड जाम हो गया। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) की हरियाणा इकाई ने कृषि विधेयकों के विरोध में राज्य भर में विरोध-प्रदर्शन करने की घोषणा कर रहे हैं। वहीं पंजाब के मुक्तसर जिले में प्रदर्शन के दौरान 70 साल के एक किसान की जहरीले पदार्थ खाने के बाद मौत हो गई।

30 सितंबर तक दिल्ली में प्रदर्शन की इजाजत नहीं
दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) के आदेश का उल्लेख करते हुए पुलिस ने सोमवार को कहा कि कोरोना के मद्देनजर लोगों को 30 सितंबर तक शहर में प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी जा सकती। शहर में कृषि विधेयकों के खिलाफ प्रदर्शनों के बीच दिल्ली पुलिस ने कई ट्वीट कर लोगों को सूचित किया कि डीडीएमए के तीन सितंबर के आदेश के मुताबिक शहर में ऐसी गतिविधियों पर प्रतिबंध है।

राजस्थान में बंद रहेंगी 247 मंडियां
देशभर में जहां किसान नए कृषि अध्यादेशों का विरोध कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर सोमवार को राजस्थान में इसके विरोध में व्यापार संघ की ओर से अनाज मंडियां बंद रहेगी। राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ और विभिन्न किसान संघों की ओर से लिए गए फैसले के बाद प्रदेश में आज सभी 247 अनाज मंडियों में कामकाज नहीं होगा। जानकारों का कहना है कि इससे प्रदेश में 600 करोड़ रुपए के व्यापार पर असर होगा। जानकारी के अनुसार अनाज मंडियों के संगठनों का कहना है कि केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में 23 सितंबर को फिर से बैठक बुलाई जाएगी। जहां आगे की रणनीति पर मंथन होगा। वहीं मंडी कारोबारी का कहना है कि कि यदि विधेयक पर पुनः विचार नहीं किया जाएगा, तो विरोध प्रदर्शन भी जारी रहेगा।

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