क्यों कोरोना पर काबू पाने के लिए इटली हो सकता है आदर्श मॉडल?

कोरोना से होने वाली कुल मौतों के मामले में इटली दुनिया में 6ठे नंबर पर है. यहां अब तक 35,700 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. लेकिन कुल संक्रमण के मामले में इटली दुनिया में 20वें नंबर पर है. अब तक सिर्फ 2.98 लाख लोग इटली में संक्रमित हुए हैं. नए केस की संख्या भी काफी कम हो गई है और फिलहाल इटली ने कोरोना की दूसरी लहर को रोक दिया है.

कोरोना वायरस का कहर झेलने वाले शुरुआती देशों में इटली प्रमुख है. शुरुआत में ही गंभीर मरीजों से यहां के अस्पताल भर गए थे और काफी मौतें होने लगी थीं. लेकिन इसके बाद इटली ने ठोस कदम उठाए और कोरोना को काफी हद तक कम करके रखा. इसलिए इटली की अब तारीफ भी हो रही है.

इटली के एक्सपर्ट्स का कहना है कि यहां सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क पहनने के नियमों का कड़ाई से पालन किया जा रहा है. अन्य देशों ने जहां क्वारनटीन के समय को घटाकर 7 दिन या 10 दिन तक कर दिया, इटली ने ऐसा करने से इनकार कर दिया. यहां लोगों को सख्ती से 14 दिन तक क्वारनटीन किया जाता है.

साथ में इटली कोरोना टेस्ट को लेकर भी खास तौर से सतर्क है. हर पॉजिटिव केस मिलने के बाद उस व्यक्ति से जुड़े हर शख्स की कोरोना जांच की जाती है और करीबी लोगों को सख्ती से क्वारनटीन किया जाता है. वहीं, इटली के आमलोग भी मास्क पहनने को लेकर अन्य देशों के मुकाबले अधिक सतर्क नजर आते हैं.एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि इटली कोरोना से तबाही झेलने वाला यूरोप का पहला देश था, इसलिए यहां के लोगों के मन से अभी डर गया नहीं है. लोग इसकी वजह से भी एहतियात बरत रहे हैं और नहीं चाहते हैं कि देश दोबारा मार्च वाली स्थिति में पहुंचे.

वहीं, इटली में अब बाजार खुल गए हैं और यूनिवर्सिटी में भी पढ़ाई शुरू हो गई है. लेकिन पाबंदियों के साथ. यूनिवर्सिटी के आधे छात्र घर से ऑनलाइन पढ़ रहे हैं और आधे क्लासरूम के जरिए. लेकिन सभी के लिए मास्क अनिवार्य कर दिया गया है.एक तरफ इटली में नए केस काफी कम हैं, दूसरी ओर, यूरोप के अन्य देशों में मामले बढ़ रहे हैं और वे लॉकडाउन की तैयारी कर रहे हैं. इटली में रोज 1500 से 2 हजार ही केस आ रहे हैं. जबकि मार्च में 30 से 40 हजार नए केस रोज आते थे.

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